नौ साल पुराने दहेज उत्पीड़न मामले में सास-ससुर दोषी, फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सुनाई 5 वर्ष की सजा


उमेश लव लव इंडिया मुरादाबाद। करीब नौ वर्ष पुराने दहेज उत्पीड़न और विवाहिता को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-1 ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सास-ससुर को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों आरोपियों को धारा 306 और 498-ए आईपीसी के तहत सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलने के कारण प्रत्येक आरोपी को प्रभावी रूप से पांच वर्ष का कारावास भुगतना होगा।


2017 में दर्ज हुआ था मुकदमा


मझोला थाना क्षेत्र के गांव डिडौली निवासी अब्दुल सलीम ने वर्ष 2017 में मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी पुत्री समीना को विवाह के बाद दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। 15 जुलाई 2017 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी।
पुलिस ने मामले में मुकदमा अपराध संख्या 759/2017 दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के बाद ससुर बुंदू अली और सास अनीसा के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।


सुनवाई के दौरान बदला मुकदमे का स्वरूप


मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। अदालत ने यह माना कि विवाहिता को प्रताड़ित किए जाने और उसे आत्महत्या के लिए प्रेरित किए जाने के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को धारा 306 और 498-ए आईपीसी में दोषी ठहराया गया।


क्या सजा सुनाई गई


फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोनों दोषियों को धारा 306 आईपीसी में 5-5 वर्ष का कारावास एवं 50-50 हजार रुपये अर्थदंड और धारा 498-ए आईपीसी में 3-3 वर्ष का कारावास एवं 10-10 हजार रुपये अर्थदंड
की सजा सुनाई।
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी, इसलिए प्रत्येक दोषी को प्रभावी रूप से 5 वर्ष का कारावास भुगतना होगा।


प्रतिकर का भी आदेश


अदालत ने आदेश दिया कि वसूले गए अर्थदंड का 90 प्रतिशत हिस्सा मृतका के पिता को प्रतिकर के रूप में दिया जाए, जबकि शेष राशि राजकोष में जमा की जाएगी।


नौ साल बाद आया फैसला


वर्ष 2017 में दर्ज हुए इस मुकदमे में लगभग नौ वर्ष बाद फैसला आया है। अदालत के निर्णय के बाद मामले का लंबा न्यायिक अध्याय समाप्त हुआ।

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