ISTD और TMIMT का अतिथि व्याख्यान: विद्यार्थियों को भविष्य के कौशल और AI के लिए किया प्रेरित

लव इंडिया, मुरादाबाद। भारतीय प्रशिक्षण एवं विकास संस्था (आईएसटीडी) मुरादाबाद चैप्टर एवं तीर्थंकर महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (टीएमआईएमटी), तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “बियॉन्ड द मैनेजमेंट एजुकेशन: प्रिपेयरिंग फॉर द वर्ल्ड दैट डजन्ट एग्जिस्ट येट” विषय पर विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उभरती तकनीकों और नेतृत्व कौशल के प्रति जागरूक करना था।कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद मुख्य वक्ता डॉ. सी. मनोहर का स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया।मुख्य वक्ता डॉ. सी. मनोहर, जो एजुकेशन इवेंजेलिस्ट, कैपेसिटी बिल्डर, मेंटर एवं कंसल्टेंट हैं, ने कहा कि भविष्य की दुनिया में केवल पारंपरिक प्रबंधन शिक्षा पर्याप्त नहीं होगी।

विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार, डिजिटलीकरण, रचनात्मक सोच, समस्या समाधान, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, संचार कौशल और आजीवन सीखने की आदत विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऐसे अनेक रोजगार और अवसर पैदा होंगे जिनकी आज कल्पना भी नहीं की जा सकती।तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के कुलपति एवं आईएसटीडी मुरादाबाद चैप्टर के चेयरपर्सन प्रो. वी.के. जैन ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नवाचार, नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना भी है। उन्होंने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के सहयोग पर आधारित ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया।

आईएसटीडी मुरादाबाद चैप्टर के सचिव प्रो. विपिन जैन ने कहा कि वर्तमान समय में प्रबंधन शिक्षा का लक्ष्य केवल कुशल प्रबंधक तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार और दूरदर्शी नेतृत्वकर्ताओं का निर्माण करना है जो भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि आईएसटीडी लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों, शिक्षकों और उद्योग जगत के बीच ज्ञान और अनुभव साझा करने का मंच उपलब्ध करा रहा है।कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने करियर, नेतृत्व विकास, भविष्य के कौशल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव से जुड़े प्रश्न पूछे। डॉ. मनोहर ने सभी प्रश्नों के व्यावहारिक उत्तर देकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

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