गिरवी रखा सोना को बेचने वाले SBI के शाखा प्रबंधक पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार


लव इंडिया, संभल। सम्भल निवासी नबी हसन ने अपने व्यापार को चलाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक, संभल में सोना गिरवी रखकर ऋण लिया था। अनुबंध समाप्ति से पूर्व ही बैंक ने उसका गिरवी रखा सोना बेचकर ऋण खाता बन्द कर दिया। इसका पता उसे जब चला जब उसे सोने के आभूषण की जरूरत पड़ी तो वह बैंक गया और अपने गिरवी रखे सोने की मांग बैंक से की तो शाखा प्रबंधक द्वारा बताया गया कि आपका गिरवी रखा सोना बेचकर ऋण खाता बन्द कर दिया गया है, तब नबी हसन ने कहा कि अभी अनुबंध समाप्त नहीं हुआ है तो मेरा सोना अपने कैसे बेच दिया।

अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय

नबी हसन ने किसी भी बात का जवाब न मिलने पर उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय से संपर्क किया और आप बीती बताई । तब उसकी ओर से जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल किया गया, जहां उपभोक्ता आयोग द्वारा दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत आयोग ने बैंक शाखा प्रबंधक को उसके गिरवी रखे सोने जिसका वजन 49.800 ग्राम या उसका बाजार मूल्य 78,100 प्रति 10 ग्राम के हिसाब से 3,88,938 रुपए, उस पर परिवाद संस्थान की तिथि से 9% वार्षिक ब्याज सहित अंदर दो माह में अदा करें।


आभूषणों की कीमत में से परिवादी द्वारा अपने ऋण खाते में पूर्व में जमा धनराशि समायोजित कर शेष धनराशि परिवादी को अदा करे। इसके अलावा परिवादी को 25000रु मानसिक कस्ट एवं आर्थिक हानि की मद में तथा ₹5000 बाद व्यय की मद में अदा करे। नियत अवधि में धनराशि अदा न करने की दशा में ब्याज 12% वार्षिक की दर से देय होगा।

उपभोक्ता अदालत का 17 सितंबर का आदेश


आयोग के आदेश की अवहेलना करने पर अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय द्वारा आयोग को बताया कि इस आदेश का अनुपालन बैंक द्वारा नहीं किया जा रहा है आयोग ने पुनः बैंक को तलब किया परन्तु कोई संतोष जनक जवाब न देने पर भारतीय स्टेट बैंक संभल के शाखा प्रबंधक व बैंक के चेयरमैन के विरुद्ध जमानतीय वारंट जारी किए गए हैं।

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