12 वर्षीय जीशान अपहरण व हत्या कांड में पिता- पुत्र समेत चार को उम्रकैद

उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। वर्ष 2018 में हुए चर्चित मौ. जीशान अपहरण और हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पिता-पुत्र समेत चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश चंचल कुमार की अदालत ने रशीद अहमद, सुहेल, फराज खां और फैजान को धारा 364, 302/34 और 201 भारतीय दंड संहिता के तहत दोषसिद्ध मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 75-75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।


दरगाह का रास्ता पूछने के बहाने ले गए थे बच्चा


अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना कटघर क्षेत्र निवासी मौ. यामीन ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उनका भांजा मौ. जीशान पुत्र इस्तेखार अहमद निवासी सहसपुर अलीनगर थाना डिडौली, जनपद अमरोहा पिछले करीब डेढ़ वर्ष से उनके घर रहकर पढ़ाई कर रहा था।
16 अगस्त 2018 की शाम करीब 4:20 बजे दो युवक आमिर और मुरसलीन उनके घर पहुंचे और दरगाह का रास्ता पूछने लगे। उस समय 12 वर्षीय जीशान घर से बाहर आया तो दोनों युवक उसे अपने साथ ले गए। इसके बाद जीशान वापस नहीं लौटा। परिवार ने काफी तलाश की लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। बाद में कटघर थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।


सट्टे के नंबर के लालच में रची गई साजिश


पुलिस की जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने सट्टे के नंबर के लालच में बच्चे का अपहरण किया था। वादी पक्ष के अनुसार 22 अगस्त 2018 को चार लोग मजार पर आए और उन्होंने घटना में शामिल होने की बात स्वीकार की। इनमें रशीद अहमद, उसका पुत्र सुहेल निवासीगण जामा मस्जिद बरबलान गली नंबर- 3 चामुण्डा गली वाली मस्जिर के सामने मुगलपुरा थाना मुरादाबाद, फराज खां निवासी हाथी वाला मंदिर वारसी नगर गली नंबर- 3 थाना मुगलपुरा जिला मुरादाबाद और फैजान निवासी जामा मस्जिद मुगलपुरा थाना मुगलपुरा जिला मुरादाबाद शामिल थे।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक आरोपियों ने बताया कि वे मूल रूप से किसी अन्य व्यक्ति के बेटे का अपहरण करना चाहते थे, लेकिन उसके न मिलने पर उन्होंने जीशान को उठा लिया। अपहरण के बाद जीशान को सुहेल के मकान पर ले जाया गया, जहां वह रोने और घर जाने की जिद करने लगा। चूंकि जीशान आरोपी फराज, फैजान और सुहेल को पहचानता था, इसलिए आरोपियों को अपनी पहचान खुलने का डर सताने लगा।


हाथ-पैर बांधकर की गई हत्या


अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपियों ने पहले जीशान के हाथ-पैर बांधे और उसके मुंह पर कपड़ा कसकर बांध दिया ताकि वह शोर न मचा सके। बाद में रात करीब नौ बजे उसकी हत्या कर दी गई। आरोप था कि पहचान छिपाने के लिए शव के टुकड़े कर अलग-अलग स्थानों पर फेंके गए।
वादी पक्ष के अनुसार बातचीत के दौरान आरोपियों ने यह भी बताया कि जीशान की गर्दन रशीद अहमद ने गोश्त काटने वाली छुरी से काटी थी, जबकि अन्य तीन आरोपियों ने बच्चे को पकड़े रखा था। यह सुनकर जब वादी पक्ष ने शोर मचाया तो आरोपी मोटरसाइकिल पर बैठकर मौके से फरार हो गए।

सीसीटीवी फुटेज बना अहम सबूत


मामले की जांच के दौरान पुलिस वादी पक्ष को लेकर सुप्रीम मेटल कारखाने के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज दिखाने पहुंची। फुटेज में घटना वाले दिन एक सफेद मोटरसाइकिल पर जीशान को दो युवकों के बीच बैठाकर ले जाते हुए देखा गया। पुलिस जांच में मोटरसाइकिल चलाने वाला सुहेल और पीछे बैठा युवक फराज खां बताया गया।
एडीजीसी नीलम वर्मा ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को पुलिस ने केस डायरी में शामिल किया। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत जुटाकर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।


अदालत ने सुनाई उम्रकैद


मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमति चंचल ने 20 मई 2026 को चारों आरोपियों को दोषी साबित माना। अदालत ने सजा के मुद्दे पर 21 मई 2026 की तारीख निर्धारित की थी। अभियोजन पक्ष में निर्मम हत्या के लिए फांसी की सजा मांगी जबकि आरोपी पक्ष में सजा में रम की अपील की दोनों पक्षों को सुनने के बाद अप सत्र न्यायाधीश सप्तम चंचल कुमार ने रशीद अहमद, उसके बेटे सुहेल और फराज खां और फैजान को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।


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