मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर 5 लाख का जुर्माना, उपभोक्ता आयोग ने माना इलाज में चिकित्सकीय उपेक्षा

हृदय रोग के इलाज के दौरान महिला की मौत का मामला


लव इंडिया, संभल। दिल्ली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत और देवकी देवी फाउंडेशन को जिला उपभोक्ता आयोग संभल ने बड़ी राहत न देते हुए इलाज में चिकित्सकीय उपेक्षा के मामले में दोषी माना है। आयोग ने अस्पताल प्रबंधन पर 5 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति लगाने के साथ मानसिक कष्ट और वाद व्यय की धनराशि भी अदा करने के आदेश दिए हैं।


मामला ग्राम नगला खोकर, पोस्ट असमोली निवासी नेमपाल सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी पत्नी श्रीमती भाग्यवती के हृदय रोग के इलाज के लिए दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।


3 लाख के पैकेज से बढ़कर 11 लाख से ज्यादा वसूले


शिकायत के अनुसार अस्पताल द्वारा इलाज के लिए करीब 3 लाख रुपये का पैकेज बताया गया था। लेकिन इलाज के दौरान धीरे-धीरे करके कुल 11 लाख 80 हजार 795 रुपये वसूल लिए गए। बताया गया कि 31 अगस्त 2021 को मरीज के हृदय के राइट एंट्रीयम में स्थित मांस को सर्जरी के जरिए निकाला गया, लेकिन इसके बाद मरीज का राइट वेंट्रिकल अक्रियाशील हो गया, जिससे रिकवरी काफी धीमी हो गई।


15 दिन बाद डिस्चार्ज, अगले दिन मौत


परिजनों का आरोप है कि लगभग 14-15 दिन तक अस्पताल में भर्ती रखने के बावजूद मरीज की हालत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। इसके बाद अस्पताल ने मरीज को घर ले जाने की सलाह दी और 21 सितंबर 2021 को छुट्टी दे दी गई। परिजनों का कहना है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले ही दिन महिला की मृत्यु हो गई।

इलाज के कागजात न देने का भी आरोप


नेमपाल सिंह ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने तय पैकेज से कई गुना अधिक धनराशि वसूली। इलाज से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।


उपचार में लापरवाही बरती गई

उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय का फाइल फोटो


इसके बाद उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग संभल में वाद दायर किया गया। आयोग ने मांगी ऑपरेशन से पहले और बाद की रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने आयोग को बताया कि ऑपरेशन पूरी तरह सफल और सही तरीके से किया गया था।
इस पर आयोग ने ऑपरेशन से पहले और बाद की चिकित्सा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बताया गया कि पहले अस्पताल ने किसी रिपोर्ट के अस्तित्व से इनकार किया
बाद में आयोग के आदेश पर ऑपरेशन से पहले की जांच रिपोर्ट दाखिल की गई। लेकिन ऑपरेशन के बाद की रिपोर्ट बार-बार आदेश के बावजूद प्रस्तुत नहीं की गई। इसी आधार पर आयोग ने मामले को गंभीर माना।

आयोग ने सुनाया फैसला


दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग संभल ने देवकी देवी फाउंडेशन और मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के प्रबंधक निदेशक/अध्यक्ष को आदेश दिया कि
आयोग के आदेश नेमपाल सिंह को 5 लाख रुपये क्षतिपूर्ति दी जाए।। यह राशि परिवाद दायर होने की तिथि से 7% वार्षिक ब्याज सहित दो माह के भीतर अदा की जाए। मानसिक कष्ट और आर्थिक हानि के लिए 50 हजार रुपये दिए जाएं। वाद व्यय के लिए 5 हजार रुपये अलग से दिए जाएं।आयोग ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर 9% वार्षिक हो जाएगी।

चिकित्सा लापरवाही पर बड़ा संदेश


उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय का मानना है कि यह फैसला निजी अस्पतालों के खिलाफ उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला है। मरीज को इलाज से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराना अस्पताल की जिम्मेदारी है। तय पैकेज से अधिक वसूली और रिकॉर्ड न देना गंभीर विषय माना जाता है

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