मुरादाबाद में किसान यूनियन का प्रदर्शन: गन्ने का मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल करने की मांग

लव इंडिया, मुरादाबाद। गन्ने का मूल्य बढ़ाने और किसानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) से जुड़े किसानों ने 16 अक्टूबर को मुरादाबाद कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। किसानों ने जिलाधिकारी अनुनय झा को ज्ञापन सौंपकर गन्ने का मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल निर्धारित करने सहित छह प्रमुख मांगें उठाईं।

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष चौधरी सतीश कुमार के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में गन्ना केवल एक फसल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। संगठन के अनुसार, प्रदेश में लगभग 48 लाख गन्ना किसान परिवार इससे जुड़े हैं। खेती की लागत लगातार बढ़ने और गन्ने के मूल्य में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं होने से किसानों पर आर्थिक दबाव पड़ रहा है।

गन्ने का मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल करने की मांग

ज्ञापन में आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य बढ़ाकर ₹500 प्रति क्विंटल निर्धारित करने और किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और कृषि मजदूरी की लागत में बढ़ोतरी को देखते हुए गन्ने के मूल्य पर पुनर्विचार जरूरी है।

बारिश से फसल नुकसान का मुआवजा मिले

किसान यूनियन ने हाल की असमय बारिश और तेज हवाओं से धान, उड़द, मूंग सहित अन्य फसलों को हुए नुकसान का गांववार सर्वे कराने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रभावित किसानों को वास्तविक नुकसान के आकलन के आधार पर शीघ्र मुआवजा और बीमा भुगतान दिया जाए। फसल कटाई के बाद खेतों या खलिहानों में रखी उपज को हुए नुकसान को भी लागू नियमों के अनुसार राहत में शामिल करने की मांग की गई है।

आलू के बीज और कोल्ड स्टोरेज पर राहत

ज्ञापन में आलू उत्पादक किसानों को सस्ते बीज उपलब्ध कराने और कोल्ड स्टोरेज के किराये में सहायता देने की मांग की गई है। संगठन ने कहा कि बाजार में आलू का भाव और सरकारी दरों पर उपलब्ध बीज की लागत में अंतर होने से किसानों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। ज्ञापन में आलू के बीज का मूल्य बाजार भाव से दोगुना या ₹1,500 प्रति क्विंटल से अधिक निर्धारित नहीं करने की मांग भी रखी गई है।

ठेके पर खेती करने वाले किसानों को भी मिले राहत

किसान यूनियन ने कहा कि बड़ी संख्या में किसान दूसरे लोगों की जमीन ठेके या बटाई पर लेकर खेती करते हैं। ऐसे किसान बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी का खर्च स्वयं उठाते हैं, लेकिन भूमि अभिलेखों में नाम दर्ज नहीं होने के कारण कई बार मुआवजे से वंचित रह जाते हैं। संगठन ने ग्राम पंचायत, लेखपाल और कृषि विभाग के संयुक्त सत्यापन से वास्तविक खेती करने वाले किसानों की पहचान कर उन्हें राहत देने की मांग की है।

यूरिया और डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग

ज्ञापन में धान, गेहूं, गन्ना, दलहन और अन्य फसलों की जरूरत के अनुसार यूरिया, डीएपी तथा दूसरे आवश्यक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। संगठन ने जिला और ब्लॉक स्तर पर मांग का आकलन कर पर्याप्त स्टॉक रखने, अधिक कीमत वसूलने, कालाबाजारी और जमाखोरी पर कार्रवाई करने तथा किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की मांग उठाई।

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने मुख्यमंत्री से इन मांगों पर प्रभावी निर्णय लेने की अपील की है। प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष चौधरी सतीश कुमार ने किसानों की समस्याओं के समाधान और खेती की लागत के अनुरूप उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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