विधायक प्रेम सागर पटेल से आय से अधिक संपत्ति के आरोपों पर जवाब तलब, 25 नवंबर तक समय-सीमा

लखनऊ/महराजगंज। उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले की सिसवा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक प्रेम सागर पटेल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर जानकारी छिपाने से जुड़े आरोपों को लेकर शिकायत किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश उप लोक आयुक्त कार्यालय की ओर से विधायक से तथ्यात्मक स्पष्टीकरण माँगा गया है और जवाब दाखिल करने के लिए 25 नवंबर 2026 तक का समय निर्धारित किया गया है।

शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में परिवाद संख्या 106/2024 तथा पत्र संख्या 2404-2025/10 का उल्लेख किया गया है। हालांकि, संबंधित आधिकारिक पत्र की स्वतंत्र पुष्टि और उसकी पूरी विषयवस्तु की जाँच के बाद ही कार्यालय की कार्रवाई तथा जवाब देने की समयसीमा को अंतिम रूप से प्रमाणित माना जा सकता है।

2017 और 2022 के चुनावी हलफनामों को लेकर शिकायत

शिकायतकर्ता मुकेश, निवासी कुशीनगर, ने आरोप लगाया है कि विधायक प्रेम सागर पटेल ने वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान दाखिल किए गए हलफनामों में अपनी और परिवार की वास्तविक आय तथा संपत्तियों का पूरा विवरण नहीं दिया। शिकायत में वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2020-21 के विवरणों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

ये आरोप शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। इनकी पुष्टि संबंधित चुनावी हलफनामों, आयकर विवरणों और अन्य आधिकारिक अभिलेखों की जाँच से ही हो सकती है।

परिवार के नाम पर संपत्तियों का आरोप

परिवाद में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2016 से 2022 के बीच विधायक, उनकी पत्नी, पुत्र और बहू के नाम पर कई जमीनों तथा आवासीय प्लॉटों की खरीद और रजिस्ट्री कराई गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन संपत्तियों का पूरा विवरण चुनावी हलफनामों में नहीं दर्शाया गया।

इन संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद मूल्य और हलफनामों में उनके उल्लेख की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

सरकारी ठेकों में परिजनों की फर्मों का उल्लेख

शिकायत में लोक निर्माण विभाग (PWD), महराजगंज से संबंधित कुछ फर्मों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि विधायक के प्रभाव के कारण उनके पुत्र के नाम से संचालित मेसर्स अंकुर इंटरप्राइजेज और अंकुर इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा पत्नी के नाम से बताई गई मेसर्स पीएस ट्रेडिंग कंपनी को सरकारी ठेकों का लाभ मिला।

इस संबंध में ठेका आवंटन के रिकॉर्ड, फर्मों के पंजीकरण, भुगतान विवरण और संभावित हितों के टकराव से जुड़े दस्तावेजों की जाँच किए बिना किसी अनियमितता को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

ट्रस्ट के माध्यम से धन जुटाने का आरोप

परिवाद में ‘सरदार पटेल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन ट्रस्ट’ का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट और उससे जुड़े बैंक खातों के माध्यम से धन जुटाने तथा संपत्तियाँ बढ़ाने में अनियमितताएँ हुईं।

इन आरोपों की पुष्टि के लिए ट्रस्ट के पंजीकरण दस्तावेज, बैंक लेन-देन, आय-व्यय विवरण और संबंधित संपत्तियों के रिकॉर्ड की जाँच जरूरी होगी। फिलहाल, उपलब्ध विवरण के आधार पर कथित वित्तीय अनियमितताओं को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

25 नवंबर तक जवाब देने की बात

शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस मामले में पहले भी नोटिस जारी किया गया था और अब उप लोक आयुक्त कार्यालय की ओर से विधायक से साक्ष्यों तथा शपथपत्र के साथ तथ्यात्मक जवाब माँगा गया है। बताई गई समयसीमा 25 नवंबर 2026 है।

शिकायतकर्ता ने मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जाँच कराने की माँग की है। उसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भी कार्यवाही का उल्लेख किया है। इस संबंध में सुनवाई की तारीख, याचिका की स्थिति और न्यायालय के आदेश की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

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