मेरठ सांप कांड: रविता और अमरदीप को फांसी की सजा, पति अमित कश्यप की हत्या को सांप के काटने का रूप देने की रची थी साजिश

राजेश कश्यप लव इंडिया मेरठ, 16 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के चर्चित अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने दोषी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड यानी फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले को सांप कांड के नाम से भी जाना जाता है। आरोप था कि दोनों ने मिलकर अमित कश्यप की गला दबाकर हत्या की और वारदात को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के लिए उसके शव के पास सांप छोड़ दिया था।

दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स की रिपोर्टों के अनुसार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोनों को दोषी ठहराए जाने के बाद मृत्युदंड सुनाया। इससे पहले अदालत ने 7 अक्टूबर 2026 को दोनों को हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। सजा के ऐलान के साथ ही यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

क्या है मेरठ का चर्चित सांप कांड?

यह मामला मेरठ जिले के बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का है। यहां अमित कश्यप की हत्या के बाद शुरुआती तौर पर मामला सांप के काटने से हुई मौत जैसा दिखाई देने की कोशिश की गई थी। लेकिन पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की परिस्थितियों पर संदेह पैदा हुआ और मामला हत्या की जांच तक पहुंच गया।

अभियोजन के मुताबिक, अमित की पत्नी रविता और अमरदीप के बीच संबंध थे। आरोप था कि दोनों ने मिलकर अमित को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। पुलिस की जांच में सामने आया कि अमित की मौत सांप के काटने से नहीं, बल्कि गला दबाने से हुई थी।

कैसे खुला हत्या का राज?

मामले की जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम साबित हुई। रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना सामने आने के बाद पुलिस ने घटना को हत्या के रूप में जांचना शुरू किया।

इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के बीच बातचीत, घटनाक्रम और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या वाली रात रविता और अमरदीप के बीच 50 से अधिक बार फोन पर बातचीत हुई थी। इस संपर्क को मामले की परिस्थितियों और अन्य साक्ष्यों के साथ अदालत के सामने रखा गया।

जांच में यह आरोप भी सामने आया कि हत्या के बाद मौत को सांप के काटने से हुई घटना दिखाने के लिए शव के पास सांप छोड़ा गया था। पुलिस ने मामले में साक्ष्य जुटाए और आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा चलाया।

रविता और अमरदीप की क्या भूमिका बताई गई?

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, रविता ने हत्या के दौरान अमित के हाथ पकड़े थे, जबकि अमरदीप ने उसका गला दबाया था। इसके बाद शव के पास सांप छोड़कर घटना को सर्पदंश से हुई मौत का रूप देने का प्रयास किया गया।

ये आरोप मुकदमे में प्रस्तुत अभियोजन के मामले का हिस्सा थे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के बाद दोनों को दोषी ठहराया तथा 16 अक्टूबर को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

अदालत में कौन-कौन से साक्ष्य महत्वपूर्ण रहे?

इस मामले में कई प्रकार के साक्ष्यों की चर्चा हुई, जिनमें प्रमुख हैं:

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट: मौत के कारण को समझने और कथित सर्पदंश की कहानी की जांच में महत्वपूर्ण रही।
  • फोन रिकॉर्ड: अभियोजन के अनुसार, हत्या वाली रात दोनों के बीच बार-बार बातचीत हुई थी।
  • गवाहों के बयान: परिवार के सदस्यों और अन्य गवाहों के बयान मुकदमे में महत्वपूर्ण बताए गए।
  • सांप उपलब्ध कराने से जुड़ा साक्ष्य: अभियोजन ने उस व्यक्ति की गवाही भी पेश की, जिसने कथित तौर पर अमरदीप को सांप उपलब्ध कराया था।

इन साक्ष्यों और मुकदमे की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया। 16 अक्टूबर को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा इसी मामले की अगली महत्वपूर्ण न्यायिक कार्रवाई है।

अमित कश्यप के परिवार ने की थी फांसी की मांग

मामले की सुनवाई के दौरान अमित कश्यप के परिवार ने दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमित की मां मुनेश देवी ने कहा था कि वह अपने बेटे की हत्या के मामले में न्याय चाहती हैं और दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।

परिवार के लिए यह मामला केवल हत्या का नहीं, बल्कि उस तरीके का भी था जिसमें कथित तौर पर मौत को सांप के काटने से हुई घटना बताने का प्रयास किया गया। अमित के पीछे उसके तीन बच्चे भी हैं, जिनका उल्लेख मामले की रिपोर्टिंग में किया गया है।

नीला ड्रम हत्याकांड के बाद फिर चर्चा में मेरठ

मेरठ पहले भी सौरभ राजपूत हत्याकांड के कारण देशभर में चर्चा में रहा था। उस मामले में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अमित कश्यप हत्याकांड के फैसले पर भी लोगों की नजरें थीं।

दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों मामलों में वैवाहिक संबंधों और हत्या की साजिश से जुड़े पहलुओं ने व्यापक सार्वजनिक चर्चा पैदा की। ऐसे मामलों में अदालत का फैसला, उपलब्ध साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया के तथ्य सामने रखना जरूरी है।

क्या मृत्युदंड के बाद मामला समाप्त हो गया?

मृत्युदंड सुनाया जाना और सजा का अंतिम रूप से लागू होना अलग-अलग बातें हैं। भारतीय कानून के तहत मृत्युदंड के मामलों में दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील करने तथा कानून के अनुसार आगे की न्यायिक राहत मांगने के अधिकार उपलब्ध होते हैं।

इस मामले में आगे की अपील, उच्च न्यायालय की पुष्टि या किसी अन्य न्यायिक कार्रवाई की स्थिति के बारे में अलग आधिकारिक जानकारी सामने आने पर ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है। फिलहाल, मेरठ की अदालत ने रविता और अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है।

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