रतूपुरा प्रकरण: कांग्रेसियों की तरह BKU नेताओं को नहीं जाने दिया गया ठाकुरद्वारा,CO सिविल लाइन को सौंपा ज्ञापन

लव इंडिया, मुरादाबाद। बिजनौर जिले की बढ़ापुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक कुंवर सुशांत सिंह के मुरादाबाद जनपद के रतूपुरा स्थित आवास से जुड़े तीन कश्यप युवकों की कथित पिटाई और प्रताड़ना का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बावजूद इसके पुलिस प्रशासन ने कांग्रेस नेताओं की तरह भारतीय किसान यूनियन संविधान के नेताओं को भी ठाकुरद्वारा नहीं जाने दिया।

रविवार को भारतीय किसान यूनियन (संविधान) का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने डिलारी पहुंचा, लेकिन रामू कश्यप की तबीयत बिगड़ने और परिजनों के दिल्ली में होने के कारण मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने एसएसपी को संबोधित ज्ञापन सीओ सिविल लाइंस को सौंपकर मुकदमा दर्ज करने और कार्रवाई की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर डिलारी पहुंचा था। इसमें राष्ट्रीय महासचिव डॉ. रामेश्वर दयाल तुरैहा, मंडल अध्यक्ष ठाकुर मंजु राठौर, मुरादाबाद जिलाध्यक्ष ओमकार प्रजापति, अमरोहा जिलाध्यक्ष अवधेश कश्यप, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष जसवंत तोमर, धर्मेंद्र यादव और धर्मेंद्र कश्यप शामिल रहे।

7 अक्टूबर की घटना का आरोप, 9 अक्टूबर को दी गई थी तहरीर

रामू कश्यप की मां ओमवती ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि चोरी हुए सोने के कंगन के शक में रामू, अतुल कश्यप और लविश कश्यप को विधायक के रतूपुरा स्थित आवास पर बंधक बनाकर पीटा गया। परिवार ने मारपीट, बिजली का करंट लगाने और गंभीर प्रताड़ना के आरोप भी लगाए थे। शिकायत के मुताबिक, घटना 7 अक्टूबर के आसपास की है और 9 अक्टूबर को ठाकुरद्वारा थाने में तहरीर दी थी।

परिवार के आरोपों के अनुसार, रामू की हालत बिगड़ने पर उसे पहले काशीपुर में उपचार के लिए ले जाया गया। बाद में उसे दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया। 18 अक्टूबर को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, रामू का इलाज दिल्ली के मैक्स अस्पताल में चल रहा है और उसकी हालत फिर बिगड़ने की खबर है। अतुल और लविश के उपचार को लेकर भी रिपोर्ट में जानकारी दी गई है।

किसान यूनियन ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की

भारतीय किसान यूनियन (संविधान) के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से आरोपों की निष्पक्ष जांच, मुकदमा दर्ज करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. रामेश्वर दयाल तुरैहा ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन किया जाएगा।

इससे पहले कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रास्ते में रोका गया था

इस मामले में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की सक्रियता भी बढ़ी है। इससे पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पीड़ित परिवार से मिलने के लिए 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाने की घोषणा की थी। 17 अक्टूबर की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डिलारी जाने की कोशिश कर रहे कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया था।

एफआईआर और जांच की स्थिति पर सवाल

18 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के करीब दस दिन बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई थी और पुलिस जांच की प्रगति को लेकर सवाल उठ रहे थे। दूसरी ओर, पुलिस पहले कह चुकी है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। विधायक सुशांत सिंह ने पहले इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि युवकों से गायब कंगन के संबंध में पूछताछ की गई थी, मारपीट नहीं की गई।

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