करवा चौथ पर चंद्रमा की आंख-मिचौली, चांद के इंतजार में परेशान रहीं सुहागिनें

उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ करवा चौथ का निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को गुरुवार, 29 अक्टूबर की शाम चंद्रमा के दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ा।

देर शाम मौसम में अचानक बदलाव और आसमान में बादल छा जाने के कारण चंद्रमा कभी दिखाई दिया तो कभी बादलों की ओट में छिप गया। इससे व्रत का पारण करने के लिए चंद्र दर्शन की प्रतीक्षा कर रही महिलाओं की परेशानी बढ़ गई।

करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश तथा करवा माता की पूजा-अर्चना कर व्रत कथा सुनती हैं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के दर्शन करती हैं और फिर व्रत का पारण करती हैं।

चंद्रमा के दिखने का इंतजार, बार-बार आसमान पर टिकी निगाहें

गुरुवार शाम तक करवा चौथ के पर्व को लेकर महिलाओं में उत्साह बना हुआ था। पूजा-अर्चना और व्रत कथा के बाद सभी को चंद्रोदय का इंतजार था।

लेकिन शाम को बादल छाने से चंद्र दर्शन में बाधा उत्पन्न हुई। चंद्रमा के कभी नजर आने और फिर बादलों के पीछे छिप जाने से व्रती महिलाओं को बार-बार आसमान की ओर देखना पड़ा।

मुरादाबाद में चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8:04 बजे बताया गया था। हालांकि, निर्धारित समय पर चंद्रमा का उदय होना और किसी स्थान से उसका स्पष्ट दिखाई देना दो अलग-अलग बातें हैं।

आसमान में बादल होने पर चंद्रमा क्षितिज से ऊपर आने के बाद भी कुछ समय तक दिखाई नहीं दे सकता है।

धार्मिक आस्था से जुड़ा है करवा चौथ का व्रत

करवा चौथ उत्तर भारत में विशेष रूप से मनाया जाने वाला पर्व है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

व्रत के दौरान चंद्रमा को अर्घ्य देने और छलनी से चंद्रमा तथा पति के दर्शन करने की परंपरा प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

हालांकि, चंद्र दर्शन में मौसम के कारण बाधा आने पर पूजा और पारण की वैकल्पिक विधियों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में परंपराएं भिन्न हो सकती हैं।

महापौर विनोद अग्रवाल के पुत्र अंकुर अग्रवाल और पुत्रवधू प्रिया अग्रवाल बादलों के बीच चंद्रमा को देखते हुए

ऐसी स्थिति में महिलाएं अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय विद्वान या पुरोहित की सलाह के अनुसार निर्णय लेती हैं।

बादलों के कारण चंद्र दर्शन में देरी संभव

मौसम संबंधी उपलब्ध जानकारी में 29 अक्टूबर को मुरादाबाद में बादल छाए रहने की स्थिति दर्ज की गई थी। ऐसे मौसम में चंद्रमा की दृश्यता प्रभावित हो सकती है। खगोलीय गणना के अनुसार चंद्रोदय का समय निर्धारित रहता है, लेकिन बादलों की मोटाई और उनके आवागमन के कारण चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन का समय अलग हो सकता है।

करवा चौथ के अवसर पर कोठीवाल नगर गीता ज्ञान मंदिर में पूजा अर्चना की गई। करवा चौथ पर पूजन कर चांद के दीदार करतीं ईशू गुंबर,आकांक्षा,आशा मेहरोत्रा,मधु,सीमा,नीलम गगनेज,तानिया,गरिमा,यशोदा मिश्रा,रश्मि मिश्रा,मीनाक्षी मिश्रा व अन्य महिलाएं।

करवा चौथ की शाम चंद्रमा की आंख-मिचौली ने पर्व के अंतिम चरण को इंतजार भरा बना दिया। महिलाओं के लिए चंद्र दर्शन केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक आस्था और व्रत की परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षण है।

error: Content is protected !!