Green Orchid Society प्रकरण में Builder-Management के साथ Administration पर भी सवाल



बच्ची के लिफ्ट में फंसने के बाद फिर सड़क पर उतरे निवासी, सवाल—पुरानी शिकायतों और कार्रवाई के बावजूद क्यों नहीं सुधरी व्यवस्था


उमेश लव लव इंडिया मुरादाबाद। दिल्ली रोड स्थित ग्रीन ऑर्चिड सोसायटी में आठ वर्षीय बच्ची के लिफ्ट में करीब 10 मिनट तक फंसे रहने की घटना ने एक बार फिर सोसायटी की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्ची के लिफ्ट में फंसने के बाद शनिवार रात सोसायटी के लोगों ने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर पैदल मार्च निकाला और बिल्डर व प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।
लेकिन इस पूरे प्रकरण में सवाल केवल बिल्डर और सोसायटी प्रबंधन से ही नहीं, बल्कि प्रशासन की निगरानी और पिछली कार्रवाई पर भी उठ रहे हैं।


2024 में भी उठ चुका है लिफ्ट का मुद्दा


ग्रीन ऑर्चिड सोसायटी में लिफ्ट की समस्या कोई नई शिकायत नहीं है। जून 2024 में भी सोसायटी के लोगों के लिफ्ट में फंसने, बेसमेंट में सीवर का पानी भरने और मूलभूत सुविधाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन की खबर सामने आई थी। उस समय निवासियों ने लिफ्ट खराब होने और लोगों के फंसने की शिकायत की थी।


मामला एमडीए तक पहुंचा था। रिपोर्ट के अनुसार, एमडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर शिकायतों की जांच की थी और बिल्डर को समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए गए थे। उस समय एमडीए की ओर से यह भी बताया गया था कि बिल्डर को भवन का पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं।


फिर वही सवाल, आखिर बदला क्या?


करीब दो साल बाद एक बच्ची के लिफ्ट में फंसने की घटना ने पुराने सवालों को फिर जिंदा कर दिया है।
सोसायटीवासियों का कहना है कि यदि पहले भी लिफ्ट को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी थीं और संबंधित विभाग तक मामला पहुंच चुका था, तो फिर ऐसी स्थिति दोबारा क्यों बनी?
निवासियों की मांग है कि केवल घटना के बाद औपचारिक निरीक्षण करने के बजाय सभी लिफ्टों की तकनीकी और सुरक्षा जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आपात स्थिति में लिफ्ट के अंदर फंसे व्यक्ति को तत्काल मदद मिल सके।


प्रशासन की जिम्मेदारी भी बनती है?


सोसायटीवासियों के मुताबिक, बिल्डर और प्रबंधन से सुविधाओं की उम्मीद करना अपनी जगह है, लेकिन जब किसी आवासीय परिसर में बार-बार सुरक्षा संबंधी शिकायतें सामने आती हैं तो संबंधित प्रशासनिक और नियामक विभाग की जिम्मेदारी भी बनती है कि वह शिकायतों की गंभीरता से निगरानी करे।


ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पिछली शिकायतों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा होगी? क्या यह जांच होगी कि पूर्व में दिए गए निर्देशों का कितना पालन हुआ? और क्या लिफ्टों की वर्तमान स्थिति का स्वतंत्र तकनीकी निरीक्षण कराया जाएगा?


बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा


निवासियों का कहना है कि लिफ्ट केवल सुविधा नहीं बल्कि बहुमंजिला इमारतों में रोजमर्रा की जरूरत है। इसमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं लगातार सफर करते हैं। ऐसे में लिफ्ट का अचानक बंद होना और उसमें लोगों का फंसना गंभीर सुरक्षा चिंता है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने लिफ्टों में यूपीएस, पर्याप्त पावर बैकअप, नियमित मेंटेनेंस और प्रभावी इमरजेंसी सिस्टम की मांग की है।


अब कार्रवाई का इंतजार


बच्ची के लिफ्ट में फंसने के बाद निकाला गया पैदल मार्च यह संकेत दे रहा है कि सोसायटी के लोगों का असंतोष केवल एक घटना तक सीमित नहीं है। निवासी पुरानी शिकायतों के समाधान और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।


अब देखना यह है कि प्रशासन इस बार मामले को केवल शिकायत और प्रदर्शन तक सीमित रखता है या लिफ्ट सुरक्षा, रखरखाव और पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की जिम्मेदारी तय करते हुए ठोस कार्रवाई करता है।



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