गांगन नदी की जमीन पर कथित अवैध कॉलोनियों को लेकर भाकियू (संविधान) का प्रदर्शन, भूमाफियाओं पर कार्रवाई की मांग
लव इंडिया, मुरादाबाद। गांगन नदी की जमीन पर कथित रूप से अवैध तरीके से कॉलोनियां बसाए जाने के मामले को लेकर भारतीय किसान यूनियन (संविधान) के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने मंडल आयुक्त कार्यालय मुरादाबाद पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मंडल आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की गई।
संगठन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. रामेश्वर दयाल तुरैहा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान गांगन नदी की जमीन की कथित बिक्री और उस पर बसी कॉलोनियों का मुद्दा उठाया गया।

भूमाफियाओं और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
राष्ट्रीय महासचिव डॉ. रामेश्वर दयाल तुरैहा ने आरोप लगाया कि कई भूमाफियाओं ने संबंधित अधिकारियों से कथित मिलीभगत कर गांगन नदी की सैकड़ों एकड़ जमीन गरीब और भोले-भाले लोगों को धोखाधड़ी एवं गुमराह करके बेच दी। संगठन का दावा है कि इसके बाद वहां कॉलोनियां विकसित कर सड़कें और लाइटें तक लगाई गईं।
उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में इन क्षेत्रों में पानी भरने की समस्या सामने आती है। संगठन का आरोप है कि प्रशासन द्वारा कथित तौर पर भूमाफियाओं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय हर वर्ष बरसात के दौरान कॉलोनी खाली कराने की कार्रवाई की जाती है।
तीन दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो भूख हड़ताल की चेतावनी
भाकियू (संविधान) ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले भूमाफियाओं एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और जमीन खरीदने वाले प्रभावित लोगों के पैसे वापस दिलाने की दिशा में कार्रवाई की जाए।
डॉ. रामेश्वर दयाल तुरैहा ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर संबंधित अधिकारियों एवं भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और प्रभावित लोगों के पैसे वापस दिलाने की पहल नहीं हुई, तो संगठन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मंडल आयुक्त कार्यालय पर भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

प्रदर्शन एवं ज्ञापन देने वालों में जसवंत सिंह तोमर, डॉ. असलम पाशा, ठाकुर मंजु राठौर, आंचल कश्यप, धर्मेंद्र कश्यप, अजय सैनी, अर्जुन सैनी, ओमकार प्रजापति, हर्षित प्रजापति, रामोतार सागर, प्रदीप सागर, वीर बहादुर कश्यप, राजेश कश्यप सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
संपादकीय सावधानी: भूमाफियाओं, अधिकारियों की मिलीभगत, धोखाधड़ी और जमीन की बिक्री संबंधी बातें संगठन द्वारा लगाए गए आरोप हैं। इन्हें जांच या आधिकारिक कार्रवाई से पहले स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत न करना बेहतर रहेगा।
