तिरुनेलवेली में गणेश जी की तस्वीर वाले बिरयानी विज्ञापन पर विवाद, दुकानदार गिरफ्तार; पहले भी धार्मिक प्रतीकों वाले विज्ञापनों पर उठ चुके हैं सवाल


तिरुनेलवेली। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में गणेश चतुर्थी के दौरान बिरयानी दुकान के एक विज्ञापन को लेकर विवाद खड़ा हो गया। दुकान के बाहर लगाए गए बैनर में भगवान गणेश की तस्वीर को बिरयानी के साथ दिखाया गया था। स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताया। शिकायत के बाद पुलिस ने विवादित बैनर हटाया और दुकान मालिक 30 वर्षीय जयंथ को गिरफ्तार किया।


₹99 की बिरयानी के विज्ञापन में गणेश जी की तस्वीर


रिपोर्टों के मुताबिक तिरुनेलवेली के वीएम चत्रम इलाके में तिरुनेलवेली-तिरुचेंदूर मार्ग पर स्थित ‘डिंडीगुल कल्याणा बिरयानी’ दुकान के बाहर विज्ञापन लगाया गया था। इसमें ‘Arabic Style Chicken 65 Biryani’ को ₹99 में देने का ऑफर था। विवाद की वजह विज्ञापन में भगवान गणेश की तस्वीर का बिरयानी के साथ इस्तेमाल होना बना।


हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में तस्वीर के वर्णन में थोड़ा अंतर है—कुछ ने गणेश जी को बिरयानी खाते हुए, जबकि कुछ ने बिरयानी बनाते हुए बताया है। इसलिए तथ्यात्मक खबर में इसे केवल “भगवान गणेश की तस्वीर को बिरयानी के साथ दिखाया गया” कहना अधिक उचित होगा।


विरोध के बाद पुलिस ने हटाया बैनर


विवाद सामने आने के बाद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता दुकान के सामने पहुंचे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की और विवादित विज्ञापन को हटवा दिया। इसके बाद नरसिंगनल्लूर निवासी सेल्वराज (42) की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। पुलिस का कहना है कि विज्ञापन किसने तैयार किया और उसमें गणेश जी की तस्वीर इस्तेमाल करने के पीछे क्या उद्देश्य था, इसकी जांच की जा रही है।


पुलिस ने दुकान मालिक जयंथ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के तहत कार्रवाई की है। यह धारा जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य से संबंधित है।


ऐसा पहली बार नहीं, पहले भी सामने आ चुके हैं विवाद


गणेश जी या अन्य हिंदू देवी-देवताओं को विज्ञापनों में अलग संदर्भों में दिखाने को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं। हालांकि हर मामले की परिस्थितियां अलग रही हैं और सभी मामलों को एक जैसा मानना सही नहीं होगा।


केरल में कृष्ण जी और नॉनवेज डिश वाला विज्ञापन


अप्रैल 2026 में केरल के अलप्पुझा/चेरथला में विषु पर्व के दौरान एक रेस्टोरेंट के विज्ञापन में भगवान कृष्ण की तस्वीर के सामने कुज़ीमंधी नामक नॉनवेज डिश दिखाई गई थी। इस पर विवाद हुआ और पुलिस ने रेस्टोरेंट के दो संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की। दोनों को हिरासत में लिया गया और बाद में जमानत मिल गई। रेस्टोरेंट संचालकों ने सफाई देते हुए कहा था कि विज्ञापन का उद्देश्य किसी धर्म का अपमान करना नहीं था और विवादित पोस्ट को हटा दिया गया था।


इसके बाद केरल के कुछ अन्य इलाकों में भी कृष्ण जी के साथ नॉनवेज व्यंजनों वाले विषु विज्ञापनों को लेकर मामले सामने आए। मालप्पुरम में पुलिस ने ऐसे ही एक पोस्टर के संबंध में तीन लोगों पर मामला दर्ज किया था।
इस विवाद का एक दूसरा पहलू भी सामने आया। चेरथला मामले में विवादित पोस्ट के लगातार प्रसार को लेकर अलग मामला दर्ज हुआ और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ ऐसा पोस्ट बनाने का आरोप लगा जिसमें एक मुस्लिम व्यक्ति को मस्जिद के सामने पोर्क खाते दिखाया गया था। यानी मामला आगे बढ़ने पर धार्मिक प्रतीकों को लेकर जवाबी आपत्तिजनक पोस्टों का सिलसिला भी सामने आया।


गणेश चतुर्थी पर रेड लेबल का विज्ञापन भी रहा विवादों में


कुछ वर्ष पहले रेड लेबल चाय के गणेश चतुर्थी विज्ञापन को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस हुई थी। विज्ञापन में एक हिंदू व्यक्ति गणेश प्रतिमा खरीदने जाता है और उसे पता चलता है कि प्रतिमा एक मुस्लिम कारीगर ने बनाई है। विज्ञापन का संदेश धार्मिक सद्भाव की ओर था, लेकिन कुछ लोगों ने इसे हिंदुओं को गलत तरीके से दिखाने वाला बताया।
इस मामले में ASCI की शिकायत निवारण प्रक्रिया में विज्ञापन की समीक्षा हुई। ASCI ने पाया कि विज्ञापन का उद्देश्य समुदायों को जोड़ना था और शिकायत को स्वीकार नहीं किया गया।


2023 में गणेश प्रतिमाओं के रूप को लेकर भी विवाद


2023 में गुजरात के सूरत में गणेश प्रतिमाओं को पुलिस की वर्दी और फिल्म ‘पुष्पा’ के अंदाज में प्रस्तुत करने को लेकर विवाद हुआ था। आपत्ति के बाद एक प्रतिमा से पुलिस की वर्दी हटाई गई और दूसरी प्रतिमा के स्वरूप को लेकर भी विवाद सामने आया।


विज्ञापन, आस्था और कानून—कहां खींची जाए सीमा?


तिरुनेलवेली का मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि धार्मिक प्रतीकों का व्यावसायिक विज्ञापन में इस्तेमाल किस सीमा तक स्वीकार्य हो सकता है।
किसी देवी-देवता की तस्वीर को विज्ञापन में इस्तेमाल करना अपने आप में हर परिस्थिति में अपराध नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि किसी विज्ञापन से जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप सामने आता है, तो पुलिस शिकायत और कानूनी जांच हो सकती है। इस मामले में भी पुलिस अभी यह जांच कर रही है कि विज्ञापन तैयार कराने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।


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