UN महासभा में नेतन्याहू का भाषण: प्रतिनिधियों के वॉकआउट से शुरू हुआ संबोधन, ईरान, गाजा, हमास, तुर्किये और पश्चिमी देशों पर साधा निशाना


न्यूयॉर्क। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 24 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में संबोधन किया। नेतन्याहू के मंच पर पहुंचते ही बड़ी संख्या में प्रतिनिधि हॉल से बाहर निकल गए। इसके बाद उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत ही बाहर जा रहे प्रतिनिधियों पर टिप्पणी से की। उनके पूरे भाषण का आधिकारिक पाठ इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किया गया है।


शुरुआत ही वॉकआउट पर टिप्पणी से


नेतन्याहू ने कहा कि भाषण शुरू करने से पहले उनकी एक छोटी-सी घोषणा है। इसके बाद उन्होंने हॉल में बचे लोगों से भी बाहर जाने को कहा और उन्हें “moral cowards” यानी “नैतिक कायर” कहा।


उन्होंने इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा उठाया। नेतन्याहू ने कहा कि 14 वर्ष पहले उन्होंने इसी मंच से ईरान को लेकर “रेड लाइन” खींची थी और उनका उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। उनके अनुसार इजरायल ने आखिरकार ईरान की परमाणु क्षमताओं पर हमला करके वही किया।


ईरान पर हमला क्यों किया—नेतन्याहू का तर्क


नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट करना बेहद कठिन था, लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में उनके लिए यह सबसे आसान फैसलों में से एक था। उनका तर्क था कि यदि इजरायल ने ऐसा नहीं किया होता तो इजरायल और दुनिया के लिए गंभीर खतरा पैदा हो जाता।


उन्होंने आगे दावा किया कि इजरायल की कार्रवाई से उन देशों को भी सुरक्षा मिली, जिनके प्रतिनिधि उसी समय UN हॉल से बाहर जा रहे थे। नेतन्याहू ने यह भी दावा किया कि इनमें से कई देशों के नेता निजी तौर पर इजरायल को ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ कार्रवाई के लिए धन्यवाद देते हैं। यह नेतन्याहू का दावा है, स्वतंत्र रूप से सभी संबंधित सरकारों की पुष्टि नहीं।


ब्रिटेन और फ्रांस पर निशाना


इसके बाद नेतन्याहू ने इजरायल पर लगाए जाने वाले “colonialism” के आरोपों को निशाना बनाया। उन्होंने विशेष रूप से ब्रिटेन और फ्रांस का उल्लेख करते हुए कहा कि औपनिवेशिक इतिहास उन्हीं देशों से जुड़ा रहा है। उन्होंने इजरायल के खिलाफ “colonialism” के आरोप को खारिज किया।


1967 के युद्ध और अपने भाई योनातन का जिक्र


भाषण में नेतन्याहू ने 1967 के छह-दिवसीय युद्ध की घटनाओं को याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय इजरायल को अस्तित्व पर खतरा महसूस हो रहा था।
उन्होंने अपने भाई योनातन “योनी” नेतन्याहू का भी उल्लेख किया, जो उस समय इजरायली पैराट्रूपर अधिकारी थे। नेतन्याहू के अनुसार उन्होंने अपने भाई से पूछा था कि क्या होगा। उनके भाई ने जवाब दिया था:
“We’re going to win. We have no other choice.”
नेतन्याहू ने कहा कि यह वाक्य उन्हें आज भी याद है और बाद के भाषण में इसे उन्होंने इजरायल की मौजूदा स्थिति से जोड़ा।


एन्तेबे ऑपरेशन का जिक्र


इसके बाद नेतन्याहू ने 1976 के एन्तेबे बंधक बचाव अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि फिलिस्तीनी आतंकवादियों द्वारा विमान अपहरण के बाद युगांडा के एन्तेबे हवाईअड्डे पर बंधकों को रखा गया था।
नेतन्याहू ने बताया कि उनके भाई योनी ने बचाव अभियान का नेतृत्व किया और इस अभियान में उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने युगांडा द्वारा योनी की स्मृति में प्रतिमा लगाए जाने का भी उल्लेख करते हुए धन्यवाद दिया।


फिर 7 अक्टूबर और हमास का मुद्दा


नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले को इजरायल के इतिहास का सबसे काला दिन बताया। उन्होंने हमास के हमले के दौरान हुई हत्याओं और बंधक बनाए जाने की घटनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इजरायल के दुश्मनों को उम्मीद थी कि इजरायल टूट जाएगा, लेकिन उनके अनुसार इजरायल ने जवाब में सैन्य कार्रवाई की।


सात मोर्चों पर युद्ध का दावा


नेतन्याहू ने कहा कि पिछले वर्षों में इजरायल को एक साथ कई मोर्चों पर लड़ना पड़ा। उन्होंने इसे “seven-front war” के रूप में पेश किया और हमास, हिजबुल्लाह, ईरान तथा क्षेत्र के अन्य सशस्त्र समूहों के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियानों का उल्लेख किया।
उन्होंने इजरायल और अमेरिका के सहयोग को भी रेखांकित किया तथा कहा कि दोनों देशों ने मिलकर हमास और ईरान के खिलाफ कार्रवाई की।


ईरान की सैन्य क्षमता पर दावा


नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल ने ईरान की वायुसेना, नौसेना और परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने हिजबुल्लाह के शीर्ष नेताओं की मौत और संगठन की सैन्य क्षमता पर भी बात की।


गाजा में नरसंहार के आरोपों को खारिज किया


भाषण के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में नेतन्याहू ने गाजा में इजरायल पर लगाए जा रहे genocide यानी नरसंहार के आरोपों को खारिज किया।
उन्होंने इस आरोप को “सदी का सबसे बड़ा झूठ” बताया और कहा कि इजरायल ने नागरिक आबादी की रक्षा के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने पोलियो टीकाकरण और गाजा में खाद्य सहायता पहुंचाने का उदाहरण दिया।


हालांकि, इस हिस्से में यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि नेतन्याहू के दावों के विपरीत इजरायल की गाजा नीति को लेकर गंभीर अंतरराष्ट्रीय आरोप और आलोचनाएं मौजूद हैं। इसलिए समाचार रिपोर्ट में नेतन्याहू के दावे को तथ्य के रूप में नहीं बल्कि उनका पक्ष बताते हुए लिखना उचित होगा।


न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी पर हमला


नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी को भी निशाना बनाया। उन्होंने ममदानी को “antisemitic” कहा और आरोप लगाया कि उनके मेयर बनने के बाद न्यूयॉर्क में कई यहूदी खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। ममदानी ने नेतन्याहू के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें आधारहीन बताया।
नेतन्याहू ने ममदानी से कहा कि उन्होंने उन्हें न्यूयॉर्क आने से रोकने की कोशिश की, लेकिन वे उन्हें चुप नहीं करा सकते।


तुर्किये और कतर की आलोचना


नेतन्याहू ने तुर्किये और कतर पर भी निशाना साधा। उन्होंने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन और तुर्किये की इजरायल संबंधी नीतियों की आलोचना की।
भाषण में उन्होंने इजरायल के खिलाफ लगाए जाने वाले आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके देश को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।


डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद


इसके विपरीत नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने ट्रंप के नेतृत्व और अमेरिका-इजरायल सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर उन ताकतों के खिलाफ कार्रवाई की जिन्हें वे सभ्यता के लिए खतरा मानते हैं।


पश्चिमी देशों को लेकर चेतावनी


भाषण के आगे के हिस्से में नेतन्याहू ने पश्चिमी यूरोप के कुछ देशों की इजरायल नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोपीय नेता यहूदी-विरोधी भीड़ के दबाव में आ रहे हैं और स्वतंत्रता की रक्षा करने से डर रहे हैं।
उन्होंने इसे “democracies की brotherhood” और “Muslim Brotherhood” के बीच चुनाव के रूप में पेश किया। यह नेतन्याहू की राजनीतिक व्याख्या थी।


ईरान के लोगों को संदेश


भाषण के अंतिम हिस्से में नेतन्याहू ने ईरान की जनता को सीधे संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एक दिन, संभवतः बहुत दूर नहीं, ईरान के लोग स्वतंत्र होंगे और उनके अनुसार ईरान का मौजूदा शासन उसके झूठ, भ्रष्टाचार और क्रूरता के कारण खत्म होगा।


अंत में फिर वही संदेश—“हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं”


भाषण के समापन में नेतन्याहू ने यहूदी इतिहास, इजरायल की प्राचीन विरासत और अपने देश के अस्तित्व की बात की। उन्होंने कहा कि यहूदी लोगों की कहानी हजारों वर्ष पुरानी है और इजरायल की पहचान उसी इतिहास से जुड़ी है। इसके बाद उन्होंने अपने भाषण में बार-बार दोहराए गए संदेश को फिर दोहराया: “We have no other choice.”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि इजरायल साहस और दृढ़ संकल्प बनाए रखता है तो वह आगे भी जीतता रहेगा। भाषण के अंत में उन्हें लगभग 30 सेकंड तक तालियां मिलीं।


वॉकआउट पर अंतिम तथ्य


नेतन्याहू के भाषण के दौरान प्रतिनिधियों के बाहर निकलने की घटना वास्तविक थी। UN महासभा के अध्यक्ष को कई बार व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। लेकिन हर अनुपस्थित प्रतिनिधिमंडल को “विरोध में वॉकआउट करने वाला” कहना सही नहीं होगा—कुछ प्रतिनिधिमंडल पहले से हॉल में मौजूद नहीं थे।

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