विदेश में पढ़ाई और नौकरी का सपना दिखाना एजेंसी को पड़ा भारी, आयोग ने लगाया 4 लाख रुपये जुर्माना



मुरादाबाद/संभल
। विदेश में पढ़ाई और अच्छी नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर एक युवक से लाखों रुपये लेने वाली प्लेनेट ओवरसीज एजेंसी को सेवा में कमी और लापरवाही के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग, संभल के आदेश का सामना करना पड़ा है। आयोग ने एजेंसी के प्रबंधक/प्रोपराइटर अमृत सिंधु को परिवादी मनी मांगट को शेष फीस और लंदन से भारत वापसी का किराया मिलाकर 2,27,955 रुपये, उस पर परिवाद दाखिल करने की तारीख से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है।


इसके अलावा आयोग ने मानसिक कष्ट एवं आर्थिक हानि के लिए 4 लाख रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये अलग से अदा करने का आदेश दिया है। इस तरह ब्याज को छोड़कर आदेश में कुल 6,37,955 रुपये की राशि देने का निर्देश है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर ब्याज की दर 9 प्रतिशत वार्षिक होगी।


अखबार में विज्ञापन देखकर काशीपुर पहुंचा था युवक


ग्राम शेखूपुर खालसा, थाना एचोड़ा कंबोह निवासी मनी मांगट ने अपने भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अखबार में प्रकाशित एक विज्ञापन देखा था। विज्ञापन के आधार पर वह प्लेनेट ओवरसीज के काशीपुर स्थित कार्यालय पहुंचा।
वहां एजेंसी के संचालक अमृत सिंधु ने उसे विदेश में पढ़ाई कराने के साथ लगभग दो लाख रुपये प्रतिमाह की नौकरी दिलाने की बात बताई। मनी मांगट ने स्कॉटलैंड से बीसीए की पढ़ाई करने की इच्छा जताई।
आरोप के अनुसार, एजेंसी ने विदेश में पढ़ाई और यात्रा की व्यवस्था के नाम पर उससे अलग-अलग रकम जमा कराई।


फीस और टिकट के नाम पर जमा कराए 6.53 लाख रुपये

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मनी मांगट के अनुसार, 24 जुलाई 2023 को उससे 5,34,900 रुपये पढ़ाई के लिए जमा कराए गए। इसके अलावा लंदन होते हुए स्कॉटलैंड पहुंचने के लिए टिकट के नाम पर 1,19,000 रुपये और लिए गए।
इस तरह एजेंसी को कुल 6,53,900 रुपये दिए गए।
इसके बाद मनी मांगट 4 सितंबर 2023 को दिल्ली से लंदन के लिए रवाना हुआ।


लंदन पहुंचने के बाद नहीं मिला एजेंसी का प्रतिनिधि


एजेंसी की ओर से मनी मांगट को बताया गया था कि लंदन पहुंचने के बाद उसे विनय कुमार नाम का व्यक्ति मिलेगा और वही उसे आगे स्कॉटलैंड में पढ़ाई के लिए भेजेगा।
मनी मांगट के अनुसार, लंदन पहुंचने के बाद उसने विनय कुमार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद उसने अपने परिजनों और अमृत सिंधु से संपर्क किया।
मामला तब और गंभीर हो गया जब लंदन पुलिस ने आवश्यक दस्तावेज नहीं होने के कारण मनी मांगट को आगे की यात्रा की अनुमति नहीं दी और उसे वापस भारत भेज दिया।


रकम वापस मांगी तो पूरी धनराशि नहीं लौटाई


भारत लौटने के बाद मनी मांगट ने एजेंसी से अपनी जमा धनराशि वापस मांगी। उसके अनुसार, एजेंसी ने कुछ रकम तो वापस कर दी, लेकिन पूरी राशि लौटाने से इनकार कर दिया।
इसके बाद उसने मामले की जानकारी उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय को दी। अधिवक्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग, संभल में परिवाद दाखिल किया गया।


एजेंसी ने खर्च काटकर रकम लौटाने की बात कही


मामले की सुनवाई के दौरान प्लेनेट ओवरसीज की ओर से आयोग के समक्ष कहा गया कि एजेंसी ने जो खर्च किए थे, उन्हें काटने के बाद फीस की रकम वापस कर दी गई थी।
इस दलील का परिवादी की ओर से अधिवक्ता लवमोहन वार्ष्णेय ने विरोध किया।
उन्होंने आयोग के समक्ष तर्क दिया कि जब परिवादी स्कॉटलैंड पहुंच ही नहीं पाया, तो पढ़ाई की फीस में कटौती किस आधार पर की गई। साथ ही लंदन पहुंचने के बाद एजेंसी की ओर से बताए गए प्रतिनिधि विनय कुमार का परिवादी से संपर्क नहीं होना भी सेवा में कमी और लापरवाही को दर्शाता है।


आयोग ने माना सेवा में कमी


दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध साक्ष्य सुनने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग, संभल ने परिवाद स्वीकार कर लिया।
आयोग ने प्लेनेट ओवरसीज डोमिनास के प्रबंधक/प्रोपराइटर/स्वामी अमृत सिंधु को आदेश दिया कि परिवादी मनी मांगट को—
1,20,955 रुपये शेष धनराशि,
1,07,000 रुपये लंदन से नई दिल्ली वापसी के किराये के रूप में,
कुल 2,27,955 रुपये का भुगतान किया जाए।
इस रकम पर परिवाद दायर किए जाने की तारीख से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
इसके अतिरिक्त आयोग ने 4 लाख रुपये मानसिक कष्ट एवं आर्थिक हानि तथा 10 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का आदेश दिया है।


समय पर भुगतान नहीं किया तो 9% ब्याज


आयोग के आदेश के मुताबिक निर्धारित अवधि में रकम का भुगतान नहीं किए जाने पर देय ब्याज की दर 9 प्रतिशत वार्षिक होगी।
इस प्रकार विदेश में पढ़ाई और नौकरी के सपने के साथ शुरू हुआ यह मामला अंततः उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां एजेंसी को परिवादी को शेष रकम, यात्रा खर्च, मानसिक कष्ट एवं आर्थिक हानि और मुकदमे के खर्च की भरपाई करने का आदेश दिया गया।

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