रिश्वतखोर डीपीआरओ को जेल में जागा ‘किताब प्रेम’, अब पंचायत राज एक्ट पढ़ने की मांग


मुरादाबाद जेल में बंद बिजनौर के डीपीआरओ ने अदालत में दी अर्जी, पंचायत राज एक्ट की किताबें मांगने का मामला चर्चा में


उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद/बिजनौर। रिश्वत लेने के आरोप में जेल भेजे गए बिजनौर के जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) रिजवान अहमद अब जेल में रहते हुए पंचायत राज कानून और अन्य पठन-पाठन सामग्री पढ़ना चाहते हैं। करीब एक महीने से मुरादाबाद जिला कारागार में बंद अधिकारी ने पंचायत राज एक्ट से जुड़ी किताबें उपलब्ध कराने की मांग की है।


जानकारी के अनुसार, जेल प्रशासन ने जिला जेल मैन्युअल का हवाला देते हुए फिलहाल किताबें उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया। इसके बाद आरोपी अधिकारी ने अदालत की शरण ली है। मुरादाबाद स्थित एंटी करप्शन कोर्ट में इस संबंध में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है, जिस पर सुनवाई जारी है।


जेल में पढ़ाई की इच्छा बनी चर्चा का विषय


बताया जा रहा है कि डीपीआरओ रिजवान अहमद की ओर से उनके अधिवक्ता सुरेश पाल सिंह ने अदालत में आवेदन देकर पंचायत राज एक्ट की पुस्तकें और अन्य अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है।


अपर जिला शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) मुनीश भटनागर ने बताया कि आरोपी अधिकारी की ओर से अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया गया है और मामला फिलहाल विचाराधीन है। अदालत के आदेश के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।


यह था पूरा मामला
बिजनौर के जिला पंचायत राज अधिकारी रिजवान अहमद के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन (विजिलेंस) को मिली थी। शिकायत के आधार पर टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की।
आठ अप्रैल 2026 को विजिलेंस टीम ने बिजनौर स्थित कार्यालय में छापेमारी कर डीपीआरओ को कथित रूप से 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया था। टीम ने कार्यालय परिसर में बने कक्ष से रिश्वत की रकम बरामद करने का दावा किया था।
कार्रवाई के बाद आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया और न्यायालय में पेशी के बाद 9 अप्रैल से उन्हें मुरादाबाद जिला जेल भेज दिया गया, जहां वह वर्तमान में बंद हैं।

बिना सक्षम आदेश के किताबें उपलब्ध नहीं कराई गईं


भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार अधिकारी द्वारा जेल में कानून की किताबें पढ़ने की इच्छा जताने का मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, डीपीआरओ जेल में समय बिताने के दौरान पंचायत व्यवस्था और संबंधित कानूनों का अध्ययन करना चाहते हैं। हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि किसी भी बंदी को बाहरी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। इसी कारण बिना सक्षम आदेश के किताबें उपलब्ध नहीं कराई गईं।

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