कुइयां वाली मस्जिद में तीन रोज़ा बयानात-ए-सीरत तैय्यबा का समापन


🕌 आखिरी दिन मौलाना आदम मुस्तफा फिरोजाबादी ने औरतों की दीनदारी। रमज़ान की तैयारी और दावत-ए-तबलीग पर किया असरदार खिताब


लव इंडिया, मुरादाबाद। शहर के मोहल्ला नई बस्ती स्थित कुइयां वाली मस्जिद में आयोजित तीन रोज़ा बयानात-ए-सीरत तैय्यबा प्रोग्राम का समापन तीसरे और आखिरी दिन बड़े ही रूहानी माहौल में हुआ। इस मौके पर हजरत मौलाना आदम मुस्तफा फिरोजाबादी, इस्लामिक लेक्चरार, हजरत अबू हरेरा कॉलेज, फिरोजाबाद ने तीन अहम विषयों पर विस्तार से खिताब फरमाया।


🕋 तिलावत-ए-कलाम और नात से हुआ प्रोग्राम का आगाज़

प्रोग्राम की शुरुआत मौलाना मुनव्वर हुसैन द्वारा तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुई। इसके बाद मस्जिद के इमाम व खतीब हजरत मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सलमान कासमी ने नातिया कलाम पेश कर माहौल को पूरी तरह रूहानी बना दिया।

👩‍👧 औरतों व बच्चियों की दीनदारी पर ज़ोर

अपने पहले विषय में मौलाना आदम मुस्तफा फिरोजाबादी ने कहा कि घर के माहौल में औरतों की दीनदारी का ख्याल रखना बेहद ज़रूरी है। बच्चियों को दीन की तालीम देना चाहिए ताकि वे आने वाले फितनों से महफूज़ रह सकें।
उन्होंने हुजूर की हदीस बयान करते हुए कहा कि—
जो औरतें पाँच वक्त की नमाज़ पढ़ती हैं, अपनी इज़्ज़त की हिफाज़त करती हैं और शौहर की फरमाबरदारी करती हैं,
क़यामत के दिन उनसे कहा जाएगा कि जिस दरवाज़े से चाहें जन्नत में दाख़िल हो जाएँ।


🌙 रमज़ान की तैयारी और रोज़े की हिफाज़त की नसीहत

मौलाना ने कहा कि माह-ए-रमज़ान क़रीब है, इसलिए अभी से उसकी तैयारी करनी चाहिए। रमज़ान का एहतराम करते हुए वक्त का सही निज़ाम बनाया जाए—
इबादत के साथ-साथ कारोबार का भी तय समय हो।
उन्होंने नसीहत की कि रमज़ान में बेवजह सड़कों और बाज़ारों में निकलने से बचें। रोज़े को झूठ, ग़ीबत और चुगलखोरी से महफूज़ रखें। लड़ाई-झगड़ों से दूर रहें। तरावीह का खास एहतमाम करें।


📿 दावत-ए-तबलीग पर दिया पैग़ाम


दावत-ए-तबलीग विषय पर बोलते हुए मौलाना ने कहा कि
अगर वक्त और हालात इजाज़त दें तो अल्लाह के रास्ते में निकलें। लोगों को अल्लाह के दीन और हुजूर की शरीयत से जोड़ें। उन्होंने कहा कि जो लोग दीन-ईमान से ग़ाफ़िल हैं,
उन्हें मस्जिद में आने और नमाज़ से जुड़ने की दावत दें।


🤲 “सुभानल्लाह” की सदाओं से गूंजती रही मस्जिद

खिताब के दौरान मस्जिद में बार-बार “सुभानल्लाह, सुभानल्लाह” की सदाएं बुलंद होती रहीं,
जिससे पूरा माहौल ईमान-अफ़रोज़ बन गया।


👥 बड़ी संख्या में महिला-पुरुष रहे मौजूद


इस मौके पर मुफ्ती राहिल, हाफिज अज़ीम, हाफिज रिज़वान, परवेज़ नाज़िम, हाजी मोहम्मद असलम, हाजी बाबू, हाजी अब्दुल माजिद, मोहम्मद क़ासिम उर्फ़ गुल्लू
सहित बड़ी तादाद में महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे।


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