Timit में International Conference का भव्य शुभारंभ, सतत विकास लक्ष्यों पर वैश्विक मंथन

टिमिट कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट की पहल, देश-विदेश के विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

लव इंडिया, मुरादाबाद। मुरादाबाद स्थित तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (टीएमयू) में टिमिट – कॉलेज ऑफ़ मैनेजमेंट द्वारा “सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स: चुनौतियां, मुद्दे एवं व्यवहार” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस-2026 का प्रथम दिवस शुक्रवार को अत्यंत भव्य एवं सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।

शिक्षा और प्रबंधन के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा देना आवश्यक” — प्रो. डॉ. सुरेश अय्यर

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 9:00 बजे से पंजीकरण एवं 9:15 बजे से नाश्ते के साथ हुई, जिसके बाद विद्यार्थियों को ऑडिटोरियम में व्यवस्थित किया गया। 10:30 बजे अतिथियों एवं प्रतिनिधियों का पारंपरिक तिलक एवं स्वागत किया गया। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों ने सहभागिता की। इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति ने वातावरण को उत्साहपूर्ण बना दिया।

उद्घाटन के बाद प्रोफेसर विपिन जैन, डीन, फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट, टिमिट ने स्वागत भाषण देते हुए कॉन्फ्रेंस की थीम पर प्रकाश डाला और सतत विकास लक्ष्यों की वर्तमान वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
कॉन्फ्रेंस के दौरान स्मारिका एवं प्रोसिडिंग्स का विमोचन भी किया गया।


“युवा शक्ति ही सस्टेनेबल डेवलपमेंट की सबसे बड़ी ताकत” — प्रो. पी.बी. सिंह

इसके बाद मुख्य वक्ताओं की श्रृंखला आरंभ हुई, जिसमें प्रोफेसर डॉ. सुरेश अय्यर, निदेशक, दून बिजनेस स्कूल, देहरादून ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए शिक्षा और प्रबंधन के माध्यम से सतत विकास की दिशा में प्रयासों पर जोर दिया। प्रोफेसर पी.बी. सिंह, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली ने युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।


“कॉर्पोरेट सेक्टर की सक्रिय भागीदारी से ही सतत विकास संभव” — प्रभंजन प्रस्सन

वहीं, बिरलासॉफ्ट के सीनियर डायरेक्टर प्रभंजन प्रस्सन ने कॉर्पोरेट सेक्टर की भागीदारी पर प्रकाश डाला।प्रोफेसर के. एस. चंद्रशेखर, कुलपति, जम्मू क्लस्टर विश्वविद्यालय, जम्मू एवं कश्मीर (राज्य विश्वविद्यालय) ने कहा कि शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।


“शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सके” -प्रोफेसर के. एस. चंद्रशेखर

ओरेकल के सीनियर डायरेक्टर नीरज नारंग ने ग्लोबल एचसीएम रणनीतियों में सस्टेनेबिलिटी के महत्व को समझाया, जबकि एनडीटीवी के सीनियर एडिटर हिमांशु शेखर मिश्रा ने मीडिया की भूमिका को रेखांकित किया। इसके अतिरिक्त डीन (अकादमिक) प्रोफेसर मंजुला जैन तथा कुलपति प्रोफेसर वी.के. जैन ने अपने संबोधन में शिक्षा जगत की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि प्रोफेसर के.एस. चंद्रशेखर, कुलपति, क्लस्टर यूनिवर्सिटी जम्मू ने अपने उद्बोधन में सतत विकास के लिए नवाचार एवं अनुसंधान को अनिवार्य बताया। इसके पश्चात अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं—अनुषी जैन, पारस जैन, प्रोफेसर सोनल अग्रवाल, प्रोफेसर अब्दुल कादिर खान एवं प्रोफेसर अर्शिया खान—ने वैश्विक दृष्टिकोण साझा करते हुए विभिन्न देशों में अपनाई जा रही रणनीतियों की जानकारी दी।


“ग्लोबल एचसीएम रणनीतियों में सस्टेनेबिलिटी को शामिल करना समय की मांग” — नीरज नारंग


कार्यक्रम के अंत में इंडियन प्रोफेसर विपिन जैन ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के सफल आयोजन मेंकॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी: प्रो. (डॉ.) मनोज अग्रवाल, प्रो. (डॉ.) चंचल चावला, डॉ. मोहित रस्तोगी। कॉन्फ्रेंस कन्वीनर डॉ. प्रतिभा शर्मा, डॉ. सत्येंद्र आर्य, श्री आनंद जोशी, डॉ. पंखुड़ी अग्रवाल एवं डॉ. चारुल वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

साथ ही आयोजन समिति के सदस्य— श्रीमती अंशु चौहान, डॉ. अविनाश राजकुमार, डॉ रोमा खन्ना डॉ आनंद जोशी आदि उपस्थित रहे।डॉ. गौरव सोम, श्री मोहित कुमार गर्ग, डॉ. मुकता गर्ग, डॉ. नितिन अग्रवाल, डॉ. पुनीत सेठी, प्रो. राजीव वर्मा, डॉ. राजेश कुमार, मीडिया कोऑर्डिनेटर टिमिट डॉ. विभोर जैन सहित अन्य सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।


“मीडिया समाज में जागरूकता फैलाकर विकास की दिशा तय करता है” — हिमांशु शेखर मिश्रा

डॉ अलका अग्रवाल, डॉ अमित कंसल, डॉ अरुण कुमार आदि की भी विशेष उपस्थिति रही। दोपहर भोज के उपरांत द्वितीय तकनीकी सत्रो की शुरुआत हुई, जिसमें ऑफलाइन एवं ऑनलाइन माध्यम से शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। विभिन्न सत्रों में बाह्य एवं आंतरिक चेयरपर्सन की देखरेख में शोधार्थियों ने अपने विचार साझा किए।इस प्रकार कॉन्फ्रेंस का प्रथम दिवस ज्ञानवर्धक चर्चाओं, प्रभावी प्रस्तुतियों एवं अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने सतत विकास के क्षेत्र में नए दृष्टिकोण प्रदान किए।

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