Moradabad में बड़ी मेडिकल उपलब्धि: Cosmos Hospital में सफल ऑटो लॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट

उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद, 5 मई 2026। कॉसमॉस हॉस्पिटल, मुरादाबाद ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पहला सफल ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Autologous Bone Marrow Transplant) किया है। इस सफलता को क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अब उच्च रक्त रोग चिकित्सा, उच्च जोखिम वाली कीमोथेरेपी एवं ट्रांसप्लांट स्तर का उपचार मुरादाबाद जैसे शहरों में भी सुरक्षित रूप से संभव है।किन मरीजों के लिए उपयोगी है यह उपचारयह उपचार मुख्य रूप से मल्टीपल मायलोमा, कुछ प्रकार के लिंफोमा,चयनित ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में किया जाता है। विशेषज्ञों ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि- हर एनीमिया केवल कमजोरी नहीं होता।- डाॅ अनुराग अग्रवाल


अस्पताल प्रबंधन डाॅ अनुराग अग्रवाल के अनुसार, यह जटिल प्रक्रिया एक गंभीर रक्त रोग से पीड़ित मरीज पर सफलतापूर्वक की गई। पहले इस तरह के इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा मुरादाबाद में ही उपलब्ध हो गई है।


🧬 क्या है ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट


इस प्रक्रिया में मरीज के अपने ही स्टेम सेल का उपयोग किया जाता है। पहले स्टेम सेल निकाले जाते हैं। फिर कीमोथेरेपी के बाद उन्हें पुनः शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। इससे बोन मैरो (अस्थि मज्जा) का पुनर्निर्माण होता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर 2 से 3 सप्ताह के निर्धारित प्रोटोकॉल में पूरी की जाती है।

🏥 इलाज के दौरान क्या रहा परिणाम


अस्पताल की विशेषज्ञ टीम के मुताबिक मरीज का ट्रांसप्लांट सफल रहा। लगभग 10 दिनों में रिकवरी शुरू हो गई। इलाज के दौरान कोई बड़ी जटिलता या संक्रमण नहीं हुआ। इस सफलता से यह साबित होता है कि अब मुरादाबाद जैसे शहरों में भी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।

⚕️ किन मरीजों के लिए फायदेमंद


यह उपचार मुख्य रूप से इन बीमारियों में उपयोगी है:
मल्टीपल मायलोमा
कुछ प्रकार के लिंफोमा
अन्य गंभीर रक्त कैंसर
विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर जांच और सही निदान इस तरह के इलाज की सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं।

👨‍⚕️ विशेषज्ञों की राय


इस जटिल ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट प्रक्रिया का सफल नेतृत्व एवं संपूर्ण चिकित्सा प्रबंधन डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी द्वारा किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल एक सफल केस नहीं, बल्कि क्षेत्र में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत है। अस्पताल का उद्देश्य है कि मरीजों को बड़े शहरों में भटकने की जरूरत न पड़े और उन्हें अपने ही शहर में बेहतर इलाज मिल सके।

🧾 कॉसमॉस हॉस्पिटल की यह सफलता


कॉसमॉस हॉस्पिटल की यह सफलता पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक मील का पत्थर है। इससे न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर भी और मजबूत होगा।

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