“भाजपा की नई पश्चिमी यूपी टीम से राजेश सिंघल बाहर, ‘कार्यकर्ता था, हूं और रहूंगा’ पोस्ट से दिए बड़े सियासी संकेत”


लव इंडिया संभल। भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नई क्षेत्रीय कार्यकारिणी की घोषणा के बाद संभल की स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। 3 सितंबर को घोषित 37 सदस्यीय क्षेत्रीय टीम में संभल से पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल को इस बार कोई दायित्व नहीं मिला है। नई टीम में 10 क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, चार महामंत्री, 10 मंत्री और 13 सदस्य शामिल किए गए हैं।


राजेश सिंघल लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे हैं। पुरानी क्षेत्रीय कार्यकारिणी में उन्हें क्षेत्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली हुई थी। नई सूची में उनका नाम नहीं होने के बाद संभल के राजनीतिक और भाजपा संगठन से जुड़े हलकों में इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।


पद गया, लेकिन कार्यकर्ता रहने का संदेश


नई टीम में जगह नहीं मिलने के बाद राजेश सिंघल की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक बना दिया है। उन्होंने लिखा—
“कार्यकर्ता था, कार्यकर्ता हूं, कार्यकर्ता रहूंगा।”
उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि वर्ष 1990 से अब तक वह पार्टी में अलग-अलग दायित्वों पर रहकर संगठन को मजबूत करने का काम करते रहे हैं। उन्होंने सपा-बसपा सरकारों के दौरान विपरीत परिस्थितियों में कार्यकर्ताओं के साथ संघर्ष करने का भी उल्लेख किया।
राजेश सिंघल ने लिखा कि पार्टी ने उन्हें तीन बार भाजपा जिलाध्यक्ष, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष और संभल विधानसभा से तीन बार चुनाव लड़ने का अवसर दिया। इसके लिए उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया।
पोस्ट का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश उनका यह कथन माना जा रहा है कि “जिस प्रकार दल बदलू नेता पार्टी के लिए स्थाई नहीं होते हैं, उसी प्रकार पद भी स्थाई नहीं होते हैं। कार्यकर्ता स्थाई होता है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि पद रहे या न रहे, वह पार्टी हित और जनता तथा कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए काम करते रहेंगे।


क्या केवल संगठनात्मक बदलाव है या अंदरूनी समीकरण भी?


राजेश सिंघल को नई क्षेत्रीय टीम में जगह नहीं मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर इसके कारणों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जिला अध्यक्ष हरेंद्र सिंह और राजेश सिंघल के बीच कथित मतभेद अथवा तनातनी को भी कुछ राजनीतिक हलकों में इस बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और भाजपा की ओर से राजेश सिंघल को हटाए जाने का कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इसलिए इसे खबर में तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के रूप में ही रखना उचित होगा।
दिलचस्प बात यह भी है कि मई 2026 की एक भाजपा बैठक की रिपोर्ट में जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह और क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल दोनों के साथ मौजूद रहने का उल्लेख मिलता है।


इसी बीच परिवार से जुड़े मुकदमों की जांच भी बाहर


राजेश सिंघल के लिए संगठनात्मक बदलाव के बीच उनके भाई कपिल सिंघल और परिवार से जुड़े मुकदमों की जांच को संभल से बाहर स्थानांतरित किया जाना भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कपिल सिंघल की पत्नी मीनाक्षी सिंघल की शिकायत के बाद डीजीपी मुख्यालय के मानवाधिकार प्रकोष्ठ ने मामले की जांच मेरठ जोन के अंतर्गत मुजफ्फरनगर की एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ को सौंपने के निर्देश दिए हैं। संभल पुलिस को जांच पूरी होने तक संबंधित मामलों में कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए जाने की भी रिपोर्ट है।


मीनाक्षी सिंघल ने आरोप लगाया था कि उनके पति और परिवार के सदस्यों के खिलाफ राजनीतिक रंजिश के चलते मुकदमे दर्ज किए गए और संभल पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है। दूसरी ओर, इन मुकदमों में पुलिस और शिकायतकर्ताओं की ओर से अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं। इसलिए आरोपों को अंतिम सत्य के रूप में नहीं माना जा सकता।


रिपोर्टों के मुताबिक, जांच के दायरे में कपिल सिंघल से संबंधित कई मुकदमे और परिवार/करीबियों से जुड़े प्रकरण हैं। मुजफ्फरनगर पुलिस से इस मामले में 15 दिन में कार्रवाई की आख्या मांगी गई है।


राजेश सिंघल ने जांच ट्रांसफर पर क्या कहा था?

जांच दूसरे जिले में स्थानांतरित होने के बाद राजेश सिंघल ने कहा था कि अब “दूध का दूध, पानी का पानी” साफ हो जाएगा और उन्हें उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच से न्याय मिलेगा। संभल के सीओ ने भी पुष्टि की थी कि संबंधित मामलों की जांच मुजफ्फरनगर की एसपी क्राइम द्वारा की जा रही है।


अब निगाहें आगे की संगठनात्मक रणनीति पर


भाजपा की नई पश्चिम क्षेत्रीय कार्यकारिणी में संभल को प्रतिनिधित्व नहीं मिलना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक समीकरणों को लेकर पार्टी में गतिविधियां तेज हैं। नई सूची में संभल और मुरादाबाद को क्षेत्रीय टीम के प्रमुख पदों पर प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जबकि बिजनौर से तीन नेताओं को जगह मिली है।


ऐसे में राजेश सिंघल की भावुक पोस्ट को केवल पद न मिलने की प्रतिक्रिया मानना या इसे सीधे किसी अंदरूनी विवाद का परिणाम बताना—दोनों ही जल्दबाजी होगी। लेकिन उनकी पोस्ट का संदेश साफ है कि क्षेत्रीय पद समाप्त होने के बावजूद उन्होंने संगठन से अपनी दूरी का संकेत नहीं दिया है।
राजनीतिक तौर पर सबसे अहम सवाल अब यही है कि संभल भाजपा में राजेश सिंघल की आगे की भूमिका क्या होगी और क्या पार्टी आने वाले समय में उन्हें कोई नई जिम्मेदारी देती है।

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