भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल के भाई कपिल सिंघल और उनके परिवार से जुड़े मुकदमों की जांच अब मुजफ्फरनगर पुलिस के हवाले
लव इंडिया, संभल। भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल के भाई कपिल सिंघल और उनके परिवार से जुड़े मुकदमों की जांच को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम सामने आया है। कपिल सिंघल की पत्नी मीनाक्षी सिंघल की शिकायत और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के मानवाधिकार प्रकोष्ठ ने मुकदमों की जांच संभल जिले से बाहर कराने का आदेश दिया है। अब प्रकरण की जांच मेरठ जोन के अंतर्गत मुजफ्फरनगर की पुलिस अधीक्षक अपराध इंदु सिद्धार्थ से कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले में जारी आदेश के अनुसार जांच पूरी होने तक संबंधित मुकदमों में विवेचनात्मक कार्रवाई को अग्रिम आदेश तक स्थगित रखने के लिए भी संभल पुलिस को निर्देशित किया गया है। मुख्यालय ने जांच के बाद स्पष्ट आख्या निर्धारित अवधि में उपलब्ध कराने को कहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने संभल की स्थानीय राजनीति और पुलिस कार्रवाई को लेकर चल रहे विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर मीनाक्षी सिंघल का आरोप है कि उनके पति और परिवार के खिलाफ दर्ज मुकदमों की स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष विवेचना नहीं हो पा रही थी, वहीं भाजपा नेता राजेश सिंघल का कहना है कि दूसरे जिले की पुलिस को जांच सौंपे जाने से अब निष्पक्ष जांच की उम्मीद बढ़ी है और सच्चाई सामने आएगी।
प्रमुख सचिव गृह को दिया गया था प्रार्थना पत्र
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार मीनाक्षी सिंघल ने अपने पति कपिल सिंघल और परिवार से संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए शासन स्तर पर प्रार्थना पत्र दिया था। प्रार्थना पत्र में उन्होंने मांग की थी कि संभल पुलिस के स्थान पर किसी स्वतंत्र एजेंसी, सीबी-सीआईडी अथवा किसी सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी या कार्यपालक मजिस्ट्रेट से जांच कराई जाए।
शिकायत में कहा गया कि कपिल सिंघल और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ अलग-अलग थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं और इन मुकदमों की विवेचना को लेकर परिवार को स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है।
मीनाक्षी सिंघल ने अपने प्रार्थना पत्र में पति कपिल सिंघल, बेटे सार्थक सिंघल, पवांसा ब्लॉक प्रमुख के पति हिरदेश यादव सहित कुल 13 लोगों से संबंधित मुकदमों की निष्पक्ष विवेचना की मांग की थी।
दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि प्रार्थिनी ने संबंधित मामलों की जांच संभल से बाहर किसी दूसरे जनपद में कराने की मांग की थी, ताकि स्थानीय परिस्थितियों और कथित राजनीतिक प्रभाव से अलग होकर विवेचना हो सके।
डीजीपी मुख्यालय के मानवाधिकार प्रकोष्ठ ने लिया संज्ञान
मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक मुख्यालय के मानवाधिकार प्रकोष्ठ की ओर से जारी पत्र सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में सामने आया है।
21 जुलाई 2026 को जारी आदेश में पुलिस अधीक्षक, अपराध, मुजफ्फरनगर को मामले की जांच कराए जाने का निर्देश दिया गया है। आदेश में शासन के पूर्व पत्र, समिति की आख्या, मीनाक्षी सिंघल के प्रार्थना पत्र तथा संभल पुलिस अधीक्षक की आख्या का उल्लेख किया गया है।
आदेश में कहा गया है कि संबंधित प्रकरण में पुलिस अधीक्षक अपराध, मुजफ्फरनगर से जांच कराकर कार्रवाई की स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यालय ने जांच की रिपोर्ट 15 दिवस के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए थे।
इस आदेश की प्रतिलिपि मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक, सहारनपुर परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक और संभल के पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है।
संभल पुलिस की विवेचना पर उठाए गए थे सवाल
मीनाक्षी सिंघल की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र में संभल जिले के अलग-अलग थानों में दर्ज मुकदमों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में उनके पति और परिवार को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया।
हालांकि ये आरोप शिकायतकर्ता के हैं और इनकी स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि का दावा नहीं किया जा सकता। संबंधित मुकदमों में पुलिस और अन्य पक्षों का अंतिम पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
शिकायत में यह भी कहा गया कि परिवार लंबे समय से राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है और कपिल सिंघल सामाजिक तथा राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं। इसी कारण परिवार का आरोप है कि राजनीतिक विरोध के चलते उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
कारोबार की जिम्मेदारी कर्मचारी को देने का किया गया उल्लेख
मीनाक्षी सिंघल ने अपने प्रार्थना पत्र में अपने पति के कारोबार और उनके कर्मचारी विपिन गुप्ता के संबंध में भी विस्तृत आरोप लगाए हैं।
शिकायत के अनुसार कपिल सिंघल सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहते थे, जिसके चलते उन्होंने अपने कारोबार की देखभाल की जिम्मेदारी अपने कर्मचारी विपिन गुप्ता को दे रखी थी।आरोप लगाया गया है कि धीरे-धीरे विपिन गुप्ता ने कपिल सिंघल का विश्वास हासिल कर कारोबार और संपत्ति संबंधी कार्यों में भूमिका बढ़ा ली। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ संपत्तियों को कथित रूप से अपने नाम कराने की कोशिश भी की गई।
इन आरोपों की सत्यता भी संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। दस्तावेज में शिकायतकर्ता ने इन घटनाओं को अपने परिवार के खिलाफ चल रहे विवादों से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कई मुकदमों का शिकायत में किया गया उल्लेख
मीनाक्षी सिंघल के प्रार्थना पत्र में संभल जिले के विभिन्न थानों में दर्ज 12 मुकदमों का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज में मुकदमा संख्या, तारीख, धाराएं और संबंधित थानों की जानकारी क्रमवार दी गई है।
इनमें संभल कोतवाली, कैलादेवी, नखासा और असमोली थाना क्षेत्रों से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि अलग-अलग घटनाओं को आधार बनाकर उनके पति और परिवार के सदस्यों के खिलाफ लगातार मुकदमे दर्ज हुए और इनकी विवेचना निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही है।
उन्होंने शासन से मांग की थी कि सभी मामलों को किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी अथवा संभल से बाहर किसी जिले की पुलिस को सौंपा जाए।
शिकायत में कई मुकदमों को बताया गया राजनीतिक षड्यंत्र
शिकायत के अनुसार परिवार का राजनीतिक जुड़ाव भी इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू है। मीनाक्षी सिंघल ने दावा किया कि उनका परिवार लंबे समय से भाजपा से राजनीतिक रूप से जुड़ा रहा है।
उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि उनके पति कपिल सिंघल सामाजिक कार्यों और भाजपा से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं। उनके जेठ राजेश सिंघल भी भाजपा में महत्वपूर्ण पद पर हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण विरोधियों ने परिवार को निशाना बनाने का प्रयास किया।
हालांकि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को मुकदमों का वास्तविक कारण मानना या नहीं मानना जांच का विषय है। पुलिस जांच में सामने आने वाले दस्तावेज, साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयान ही इस पहलू को स्पष्ट कर सकते हैं।
एक मामले में फर्जी मुकदमा दर्ज कराने का भी आरोप
प्रार्थना पत्र में एक ऐसे मुकदमे का भी उल्लेख किया गया है जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनके पति को फंसाने के लिए गलत तरीके से मामला दर्ज कराया गया।
दस्तावेज के अनुसार इस मामले में शिकायतकर्ता ने कहा कि जिस व्यक्ति के फोन नंबर से संबंधित घटना बताई गई, वह स्वयं ठगी का शिकार था। इसके बावजूद उसके पति को मामले में आरोपी बनाने का प्रयास किया गया।
इसी तरह एक अन्य मामले में फैक्ट्री से संबंधित कार्रवाई का उल्लेख करते हुए शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उनके पति का फैक्ट्री के संचालन और संपत्ति से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
इन सभी बिंदुओं को शिकायतकर्ता ने अपने पक्ष के समर्थन में रखा है। इनका अंतिम सत्यापन जांच के दौरान होना है।
फैक्ट्री प्रकरण भी जांच के दायरे में
प्रार्थना पत्र में कैलादेवी थाना पुलिस द्वारा एक फैक्ट्री पर की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार फैक्ट्री से जुड़े दस्तावेज और लाइसेंस वैध होने के बावजूद उनके पति के खिलाफ कार्रवाई की गई।
शिकायत में आरोप है कि फैक्ट्री पर पुलिस कार्रवाई के समय संबंधित व्यक्ति मौके पर मौजूद नहीं था और बाद में परिवार की ओर से दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराए गए।
मीनाक्षी सिंघल ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री के संबंध में भी उनके पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, जबकि उनके अनुसार कपिल सिंघल का फैक्ट्री के स्वामित्व या संचालन से सीधा संबंध नहीं था।
यह पूरा पक्ष भी अब मुजफ्फरनगर पुलिस की जांच में शामिल हो सकता है।
पुराने मुकदमों का भी हवाला
शिकायत में वर्ष 2023 में दर्ज एक मामले का भी उल्लेख है। इसमें शिकायतकर्ता के अनुसार पहले विवेचना पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट न्यायालय को भेजी गई थी, लेकिन बाद में उससे संबंधित पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए।
प्रार्थना पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी हवाला दिया गया है और दावा किया गया है कि कुछ मामलों में न्यायालय की अनुमति के बिना आगे की विवेचनात्मक कार्रवाई किए जाने पर आपत्ति है।
यह बिंदु भी शिकायतकर्ता के दावे के रूप में सामने आया है। संबंधित मामलों में अदालत के आदेश और पुलिस रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति जांच के दौरान ही स्पष्ट होगी।
12 मुकदमों की सूची भी शासन को दी
मीनाक्षी सिंघल ने अपने प्रार्थना पत्र के साथ संबंधित मुकदमों की क्रमवार सूची भी संलग्न की थी। दस्तावेज में कुल 12 मामलों का विवरण दिया गया है।
इनमें विभिन्न तिथियों में दर्ज मुकदमे शामिल हैं। शिकायतकर्ता ने इन सभी मामलों की निष्पक्ष विवेचना कराने की मांग की थी।
उनका कहना था कि परिवार के खिलाफ दर्ज मुकदमों के कारण वे मानसिक रूप से परेशान हैं और उन्हें स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने जांच का स्थान बदलने की मांग की।
शासन की समिति और पुलिस रिपोर्ट भी बनी आधार


डीजीपी मुख्यालय के मानवाधिकार प्रकोष्ठ के आदेश में केवल मीनाक्षी सिंघल के प्रार्थना पत्र का ही उल्लेख नहीं है। आदेश में उत्तर प्रदेश शासन के पत्र, समिति की आख्या और संभल पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट का भी संदर्भ दिया गया है।
दस्तावेज के अनुसार शासन स्तर पर मामले के तथ्यों को लेकर रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके बाद उपलब्ध रिकॉर्ड और शिकायत के आधार पर जांच को दूसरे जिले में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।
इससे यह स्पष्ट होता है कि जांच स्थानांतरण केवल शिकायतकर्ता की मांग पर मौखिक स्तर पर नहीं हुआ, बल्कि इसके लिए विभागीय पत्राचार और रिपोर्ट की प्रक्रिया भी हुई।
जांच पूरी होने तक कार्रवाई रोकने के निर्देश
इस प्रकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मुख्यालय के आदेश में संबंधित मुकदमों की विवेचना से जुड़ी कार्रवाई को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। संभल के पुलिस अधीक्षक को भेजी गई प्रति में कहा गया है कि संबंधित विवेचनाधीन अभियोगों में विवेचनात्मक कार्रवाई अग्रिम आदेश तक स्थगित रखी जाए।
इसका अर्थ यह है कि दूसरे जिले से होने वाली जांच और मुख्यालय के अगले आदेश तक संबंधित मामलों में आगे की विवेचनात्मक कार्रवाई को लेकर रोक के निर्देश दिए गए हैं। अब मुजफ्फरनगर पुलिस की जांच से यह पता चलेगा कि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है और संबंधित मुकदमों की विवेचना में कोई अनियमितता हुई या नहीं।
मुजफ्फरनगर पुलिस ने संभल पहुंचकर शुरू की जानकारी जुटाना
मुख्यालय के आदेश के बाद जांच प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। मंगलवार को मुजफ्फरनगर की एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ के संभल पहुंचने की जानकारी सामने आई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की जानकारी ली और सीओ कार्यालय में सीओ कुलदीप कुमार से प्रकरण से संबंधित रिकॉर्ड एवं तथ्यों की जानकारी प्राप्त की।
इस दौरान मुकदमों की पृष्ठभूमि, अब तक हुई विवेचना, पुलिस की कार्रवाई और उपलब्ध दस्तावेजों के संबंध में जानकारी लिए जाने की बात सामने आई है। जांच अधिकारी अब संबंधित केस डायरी, पुलिस रिकॉर्ड, शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज और मुकदमों से जुड़े अन्य साक्ष्यों का परीक्षण कर सकती हैं।
अब दूसरे जिले की जांच पर टिकी निगाहें
मामले में जांच मुजफ्फरनगर पुलिस को सौंपे जाने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि नई जांच में क्या निष्कर्ष सामने आता है।
क्या दर्ज मुकदमों में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं?
क्या विवेचना में कहीं प्रक्रिया संबंधी खामी रही?
क्या राजनीतिक दबाव अथवा किसी अन्य प्रभाव की शिकायत में कोई आधार है?
क्या शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज मुकदमों की दिशा बदल सकते हैं?
इन तमाम सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
राजेश सिंघल बोले—अब दूध का दूध, पानी का पानी होगा
भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल ने इस घटनाक्रम पर कहा कि सभी मुकदमों की जांच मुजफ्फरनगर पुलिस ने शुरू कर दी है। उनके अनुसार, “इस निष्पक्ष जांच से अब दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो जाएगा।” राजेश सिंघल ने कहा कि शासन की समिति ने संबंधित पक्षों और पुलिस का पक्ष जानने के बाद विवेचना दूसरे जिले को स्थानांतरित की है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच होगी और परिवार को न्याय मिलेगा।
राजेश सिंघल का यह बयान उनके पक्ष को दर्शाता है। दूसरी ओर, जिन लोगों या पक्षों के खिलाफ शिकायत में आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष और जांच में सामने आने वाले तथ्य इस मामले की पूरी तस्वीर तय करेंगे। भाजपा क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल ने निष्पक्ष जांच से न्याय मिलने की उम्मीद जताई है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि ने बढ़ाया मामले का महत्व
संभल में इस प्रकरण का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें एक प्रमुख भाजपा नेता के परिवार से जुड़े व्यक्ति और कई मुकदमों की जांच का सवाल है। मीनाक्षी सिंघल ने अपने प्रार्थना पत्र में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को मुकदमों के पीछे का कारण बताते हुए आरोप लगाए हैं। वहीं अब शासन स्तर से जांच दूसरे जिले में कराए जाने के आदेश के बाद मामला स्थानीय पुलिस की सामान्य विवेचना से आगे निकलकर विभागीय निगरानी में आ गया है। यह भी महत्वपूर्ण है कि दूसरे जिले से जांच कराने का निर्णय अपने आप में किसी पक्ष को दोषी या निर्दोष घोषित नहीं करता। इसका उद्देश्य शिकायतकर्ता की निष्पक्ष जांच संबंधी मांग को देखते हुए विवेचना को अलग स्थान से कराना है।
जांच रिपोर्ट से साफ होगी आगे की तस्वीर
डीजीपी मुख्यालय के मानवाधिकार प्रकोष्ठ ने मुजफ्फरनगर पुलिस से मामले की जांच कर स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने को कहा है। इसलिए आने वाले समय में जांच रिपोर्ट इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी। यदि जांच में शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित मुकदमों की विवेचना और पुलिस कार्रवाई पर आगे सवाल उठ सकते हैं। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो शिकायतकर्ता के दावों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
फिलहाल इतना तय है कि संभल में दर्ज 12 मुकदमों की जांच अब दूसरे जिले की पुलिस के हाथ में पहुंच चुकी है और स्थानीय पुलिस की विवेचना पर उठाए गए सवालों की स्वतंत्र जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मामले में आगे होने वाली जांच, संबंधित पक्षों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य ही तय करेंगे कि विवाद की वास्तविकता क्या है।
दस्तावेज से सामने आए प्रमुख तथ्य

मीनाक्षी सिंघल ने पति कपिल सिंघल और परिवार से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
शिकायत में संभल के अलग-अलग थानों में दर्ज 12 मुकदमों का उल्लेख है।
शिकायतकर्ता ने जांच संभल से बाहर कराने की मांग की थी।
उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के मानवाधिकार प्रकोष्ठ ने 21 जुलाई 2026 को जांच मुजफ्फरनगर पुलिस को सौंपने का आदेश जारी किया।
जांच की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक अपराध, मुजफ्फरनगर इंदु सिद्धार्थ को दिए जाने का उल्लेख है।
आदेश में 15 दिनों के भीतर जांच आख्या उपलब्ध कराने को कहा गया।
संबंधित विवेचनाधीन मामलों में अग्रिम आदेश तक विवेचनात्मक कार्रवाई स्थगित रखने का निर्देश भी दिया गया।
आदेश की प्रतियां मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक, सहारनपुर परिक्षेत्र के डीआईजी और संभल एसपी को भेजी गईं।
आदेश के बाद मुजफ्फरनगर की एसपी क्राइम ने संभल पहुंचकर संबंधित अधिकारियों से मामले की जानकारी ली।
फोकस टाइटल:
संभल के 12 मुकदमों की जांच अब मुजफ्फरनगर पुलिस के हवाले, डीजीपी मुख्यालय का बड़ा आदेश
Meta Description:
संभल में भाजपा नेता राजेश सिंघल के भाई कपिल सिंघल और परिवार से जुड़े 12 मुकदमों की जांच अब मुजफ्फरनगर पुलिस करेगी। मीनाक्षी सिंघल ने संभल पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे।
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