मुरादाबाद में बड़ा गन्ना तौल घोटाला: इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से छेड़छाड़ कर करोड़ों की हेराफेरी, FIR

उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। मुरादाबाद जिले में चीनी मिल से जुड़ा एक बेहद गंभीर और संगठित घोटाला सामने आया है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक तौल प्रणाली से छेड़छाड़ कर किसानों और मिल को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। दीवान शुगर मिल, अगवानपुर के यूनिट हेड (अध्यासी) महेश कुमार पांडेय की तहरीर पर थाना सिविल लाइंस में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।

🔍 एफआईआर के अनुसार क्या है पूरा मामला

एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक:मिल गेट पर लगे इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों (इंडिकेटर) में छेड़छाड़ की गईइस छेड़छाड़ के जरिए गन्ना तौल में अंतर पैदा कर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गयायह कार्य साजिशन और योजनाबद्ध तरीके से किया गयामिल प्रबंधन द्वारा कराई गई जांच में तौल प्रणाली में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद यह मामला पुलिस तक पहुंचा।

🔍 घोटाले का पूरा तंत्र कैसे काम करता था

एफआईआर में दर्ज तथ्यों के अनुसार यह कोई सामान्य गड़बड़ी नहीं, बल्कि पूरी तरह योजनाबद्ध और तकनीकी साजिश थी। मिल गेट पर लगे इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों (Weighbridge) के इंडिकेटर से छेड़छाड़तौल डेटा में बदलाव कर वास्तविक वजन से कम या ज्यादा दिखानाकिसानों की गन्ना पर्चियों और मिल रिकॉर्ड में अंतर पैदा करना। इस पूरे खेल में तौल लिपिक, ट्रांसपोर्टर, इलेक्ट्रॉनिक फिटर और संबंधित कंपनी के लोग की मिलीभगत होने का आरोप लगाया गया है।

⚠️ जांच में चौंकाने वाले खुलासे

जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य सामने आए कि खाली वाहनों के वजन में असामान्य अंतर पाया गया। यह अंतर कुछ मामलों में लगभग 26 कुंतल तक दर्ज हुआ। आईटी डेटा और सॉफ्टवेयर रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी के संकेत मिले। इसका सीधा मतलब है किहर ट्रॉली/ट्रक पर किसानों के गन्ने का वजन कम दिखाकर पैसा काटा जा सकता था।

🏢 कंपनियों और टेक्निकल स्टाफ की भूमिका

एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि मेरठ की एक इलेक्ट्रॉनिक कंपनी को तौल उपकरणों का मेंटेनेंस दिया गया था। उसी कंपनी के फिटर पर तकनीकी छेड़छाड़ कर घोटाले में शामिल होने का आरोप है।सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों स्तर पर बदलाव की आशंका जताई गई है।

👨‍🌾 किसानों पर सीधा असर

यह मामला सिर्फ मिल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सबसे बड़ा नुकसान किसानों को हो सकता है। गन्ने का वजन कम दिखाकर भुगतान घटाया जा सकता था।किसानों को वास्तविक कीमत नहीं मिल रही थी। लंबे समय से यह घोटाला चल रहा हो सकता है। यानी यह मामला सीधे तौर परकिसानों की आय और हक से जुड़ा हुआ है।

🧾 जांच समिति की रिपोर्ट भी संदिग्धता की पुष्टि

मिल प्रबंधन द्वारा बनाई गई उच्च स्तरीय समिति ने कई वाहनों के वजन में अंतर पाया। तौल प्रक्रिया में अनियमितताओं की पुष्टि की। विस्तृत जांच की सिफारिश की।

⚖️ किन धाराओं में केस दर्ज

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इनमें 318(4)338336(3)340(2)61(2) शामिल हैं। ये धाराएं धोखाधड़ी, साजिश और आर्थिक अपराध से जुड़ी हैं।

🗣️ एफआईआर में नामजद आरोपी

एफआईआर के अनुसार निम्नलिखित लोगों को नामजद किया गया है। इनमें महेंद्र कसाना पुत्र नेपाल सिंह, ग्राम ढकिया, थाना ठाकुरद्वारा, जनपद मुरादाबाद (तौल लिपिक), विट्टू सिंह पुत्र लोकेंद्र सिंह, ग्राम धनसुपुरा, थाना छजलैट, जनपद मुरादाबाद, चंदन पांडेय उर्फ बंटी पांडेय (इलेक्ट्रॉनिक फिटर, मेंटेनेंस कंपनी से संबंधित), तारिक मतीन (प्रोपराइटर, मेंटेनेंस कंपनी – मेरठ) आरोपितकिए गए हैं। एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि अन्य अज्ञात लोग भी इस साजिश में शामिल हो सकते हैं।

🏢 कंपनी और तकनीकी छेड़छाड़ का एंगल


एफआईआर में कहा गया है कि मिल के तौल उपकरणों का मेंटेनेंस एक मेरठ स्थित कंपनी को दिया गया था। उसी कंपनी के फिटर द्वारा उपकरणों में छेड़छाड़ की गई। तौल इंडिकेटर के साथ तकनीकी छेड़छाड़ कर वजन में अंतर पैदा किया गया।

👨‍🌾 किसानों और मिल को नुकसान


एफआईआर के अनुसार तौल में हेराफेरी से किसानों और चीनी मिल दोनों को आर्थिक नुकसान हुआ। यह नुकसान करोड़ों रुपये तक होने की आशंका जताई गई है

🚨 पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई

एफआईआर दर्ज कर जांच शुरूतकनीकी और फॉरेंसिक जांच की संभावनासंबंधित कंपनियों और कर्मचारियों से पूछताछ आने वाले दिनों में इस मामले मेंऔर बड़े खुलासे हो सकते हैं।

📊 क्यों यह मामला बेहद गंभीर है

यह सिर्फ घोटाला नहीं, बल्कि सिस्टम से छेड़छाड़ का मामला है। तकनीक का गलत इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर आर्थिक अपराध। किसानों के भरोसे और सरकारी व्यवस्था पर असर।

⚖️ दीवान शुगर मिल के यूनिट हेड महेश कुमार पांडेय ने तहरीर में कहा है कि आरोपियों ने मिलकर योजनाबद्ध तरीके से तौल प्रणाली में छेड़छाड़ की जिससे मिल और किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई। मामले में सख्त कार्रवाई की जाए। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे किसानों के भुगतान और पारदर्शिता से जुड़ा है। तकनीकी सिस्टम में छेड़छाड़ गंभीर है। इसमें संगठित साजिश की आशंका है।

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