मशहूर शायर बशीर बद्र के इंतक़ाल पर संभल में शोक सभा, अदबी दुनिया ने दी श्रद्धांजलि


लव इंडिया, संभल। उर्दू अदब की दुनिया के मशहूर शायर और पद्मश्री सम्मानित साहित्यकार बशीर बद्र के इंतक़ाल पर संभल में गहरा शोक व्यक्त किया गया। उनके निधन की खबर से साहित्य प्रेमियों, शायरों और उर्दू अदब से जुड़े लोगों में मायूसी छा गई।

इसी क्रम में बज़्म-ए-सुख़न वराँ संभल के तत्वावधान में एक शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के साहित्यकारों, शिक्षकों, समाजसेवियों और उर्दू प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर मरहूम शायर को श्रद्धांजलि अर्पित की। बशीर बद्र का 91 वर्ष की आयु में भोपाल स्थित आवास पर लंबी बीमारी के बाद निधन हुआ था।


शोक सभा में वक्ताओं ने बशीर बद्र की शायरी, उनके व्यक्तित्व और उर्दू साहित्य में दिए गए अमूल्य योगदान को याद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उस्ताद शायर रफ़ीक़ राही ने की जबकि संचालन मास्टर वसीम अख्तर सम्भली ने किया।


रफ़ीक़ राही ने कहा कि बशीर बद्र ने अपनी ग़ज़लों के जरिए इंसानी जज़्बात, मोहब्बत और जिंदगी की सच्चाइयों को बेहद खूबसूरत अंदाज़ में पेश किया। उनकी शायरी आने वाली नस्लों के लिए भी रहनुमाई का काम करती रहेगी।


फ़ईम साकिब ने कहा कि बशीर बद्र केवल एक शायर नहीं बल्कि उर्दू अदब की पहचान थे। उनकी रचनाओं में मोहब्बत, दर्द, तहज़ीब और इंसानियत की गहरी खुशबू महसूस होती है।


मुदस्सिर हुसैन एडवोकेट ने कहा कि बशीर बद्र ने अपनी शायरी के माध्यम से समाज को जोड़ने और मोहब्बत का पैग़ाम देने का काम किया। उनका इंतक़ाल उर्दू साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है।


डॉ. अज़ीज़ उल्लाह ख़ान ने कहा कि उनकी ग़ज़लों में जिंदगी की सच्चाइयों को बेहद आसान और असरदार अंदाज़ में पेश किया गया है। यही वजह है कि उनकी शायरी हर वर्ग के लोगों के दिलों तक पहुंची।


मास्टर वसीम अख्तर ने कहा कि बशीर बद्र जैसे शायर सदियों में पैदा होते हैं। उनकी ग़ज़लें आज भी युवाओं और बुज़ुर्गों के दिलों पर राज करती हैं और आने वाले समय में भी उनकी लोकप्रियता बनी रहेगी।


सैयद शुजात हुसैन ने कहा कि बशीर बद्र की अदबी सेवाओं को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने उर्दू भाषा और शायरी को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


बद्र जहां खुर्शीद ने कहा कि बशीर बद्र का नाम हमेशा अदब की दुनिया में ज़िंदा रहेगा और उनकी ग़ज़लें लोगों के दिलों में हमेशा ताज़ा रहेंगी।


इसके अलावा सुहैल अनवर, अनस माजिद, मोहम्मद ज़ाहिद, मोहम्मद रफ़ी, मोहम्मद मुमताज़ आलम सहित अनेक लोगों ने भी शोक व्यक्त करते हुए मरहूम शायर को श्रद्धांजलि दी।
सभा के अंत में बशीर बद्र की मग़फ़िरत और उर्दू अदब की तरक़्क़ी के लिए सामूहिक दुआ की गई।

error: Content is protected !!