रामगंगा की धारा मोड़ने के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, कहा-ऐसा हुआ तो 50 गांव होंगे प्रभावित


लव इंडिया, मुरादाबाद। रामगंगा नदी की मुख्य धारा को कथित रूप से बलपूर्वक परिवर्तित किए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने एसीएम माधव उपाध्याय को ज्ञापन देकर मांग की कि रामगंगा नदी को उसके प्राकृतिक प्रवाह के अनुसार बहने दिया जाए तथा उसकी धारा को कृत्रिम रूप से बदलने का प्रयास रोका जाए।


ग्रामीणों का कहना है कि रामगंगा नदी की मुख्य धारा वर्षों से ग्राम रुस्तमपुर बढ़मार, नजरपुर, लोदीपुर बासू, वीरपुर बरियार होते हुए कोसी नदी में मिलती रही है। फसली अभिलेखों में भी नदी का प्राकृतिक बहाव इसी दिशा में दर्ज है। आरोप है कि कुछ लोग रुस्तमपुर बढ़मार क्षेत्र से सिकंदरपुर पट्टी की ओर नदी की मुख्य धारा को मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे व्यापक क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि यदि नदी की धारा को बलपूर्वक बदला गया तो क्षेत्र के करीब 50 गांवों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इससे किसानों की फसलें, ग्रामीणों की आजीविका, पशुधन और जन-धन को भारी नुकसान होने की आशंका है। साथ ही बाढ़ और कटान जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।


प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि जनहित और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए रामगंगा नदी के प्राकृतिक स्वरूप से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन को और व्यापक रूप दे सकते हैं।


ज्ञापन देने वालों में अशोक कुमार सिंह, अफसरी, महेश, राजेंद्र सिंह, शमीम अहमद, हरज्ञान सिंह, मोहम्मद उबेद, शिवनारायण सिंह, रईस अहमद, दिलावर सिंह, सुरेंद्र सिंह, ताहिर हुसैन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।

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