मुरादाबाद की अदालतों का सख्त संदेश: पुलिस पर हमला और नाबालिग बहनों से छेड़छाड़ के दोषियों को मिली सजा

लव इंडिया मुरादाबाद। मुरादाबाद की अदालतों ने शनिवार को दो अलग-अलग मामलों में अहम फैसले सुनाते हुए अपराधियों को सख्त सजा दी। एक ओर 11 साल पहले कटघर क्षेत्र में पुलिस टीम पर फायरिंग और हमला करने वाले तीन दोषियों को सजा सुनाई गई, वहीं दूसरी ओर ट्यूशन पढ़ने जा रही दो नाबालिग बहनों को बहलाकर ले जाने और छेड़छाड़ करने के मामले में दो दोषियों को पांच-पांच वर्ष के कारावास से दंडित किया गया।


पुलिस टीम पर हमला करने वाले तीन दोषियों को सजा


कटघर थाना क्षेत्र में 19 दिसंबर 2015 को डीयर पार्क, रफातपुर रोड के पास पुलिस टीम पर हमला और फायरिंग करने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट-2 के न्यायाधीश धीरेन्द्र सिंह ने फैसला सुनाया।
घटना के समय कटघर पुलिस को बदमाशों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। पुलिस टीम ने घेराबंदी की तो बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। हालांकि पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
विशेष लोक अभियोजक महेंद्र सिंह कश्यप के अनुसार अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर मूंढापांडे निवासी आसिफ और अनमोल को चार-चार वर्ष के कारावास तथा आशु को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। तीनों दोषियों पर 2,500-2,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार दोषियों के खिलाफ उत्तराखंड में भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

नाबालिग बहनों को बहलाकर ले जाने वाले दो दोषियों को 5-5 साल की सजा


दूसरे मामले में पोक्सो कोर्ट-1 की न्यायाधीश रेशमा चौधरी ने दो नाबालिग बहनों के अपहरण के प्रयास और छेड़छाड़ के मामले में हरदोई के दो आरोपियों को दोषी करार दिया।
विशेष लोक अभियोजक मनोज वर्मा और अभिषेक भटनागर के अनुसार 4 अगस्त 2021 को दर्ज मुकदमे में शिकायत की गई थी कि दो नाबालिग बहनें ट्यूशन पढ़ने जा रही थीं। रास्ते में बाबा के वेश में मिले दो व्यक्तियों ने उन्हें टॉफी देकर बहलाने-फुसलाने का प्रयास किया और अपने साथ ले जाने लगे।
बच्चियों के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए और दोनों आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर हरदोई के बब्लू और रहीस को दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को पांच-पांच वर्ष के कारावास और 60 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।


अदालतों का सख्त संदेश


एक ही दिन में आए इन दोनों फैसलों को कानून व्यवस्था और महिला एवं बाल सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालतों ने स्पष्ट किया कि पुलिस पर हमला करने वालों और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

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