मुरादाबाद स्टेशन पर चार घंटे तक विजिलेंस अफसर बनकर घूमता रहा शातिर, नजीबाबाद में खुली पोल


उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। रेलवे प्रशासन को उस समय बड़ा झटका लगा जब रेलवे बोर्ड के विजिलेंस अधिकारी के रूप में स्टेशन का निरीक्षण कर रहा एक व्यक्ति फर्जी निकला। शातिर युवक ने खुद को रेलवे बोर्ड का विजिलेंस अफसर बताकर मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर करीब चार घंटे तक अधिकारियों और कर्मचारियों को छकाए रखा। उसने स्टेशन का निरीक्षण किया, कर्मचारियों से पूछताछ की, कैश चेक कराया, वीआईपी रूम में बैठकर नाश्ता किया और बाद में सेकंड एसी कोच में नजीबाबाद के लिए रवाना हो गया। हालांकि संदेह होने पर रेलवे अधिकारियों ने जांच कराई तो उसकी पोल खुल गई और नजीबाबाद में जीआरपी ने उसे गिरफ्तार कर लिया।


रेलवे बोर्ड का अधिकारी बनकर किया निरीक्षण


शुक्रवार को जावेद अली नामक व्यक्ति मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचा और खुद को रेलवे बोर्ड में तैनात विजिलेंस अधिकारी बताया। रेलवे बोर्ड का अधिकारी समझकर स्टेशन प्रशासन और रेलवे कर्मचारी पूरी तरह सक्रिय हो गए। उसने स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म, चेकिंग स्टाफ और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान कर्मचारियों से सवाल-जवाब भी किए और कमियां मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी तक दे डाली।

वीआईपी ट्रीटमेंट लिया


रेलवे सूत्रों के अनुसार शातिर ने स्टेशन के कैश और अन्य अभिलेखों की भी जांच कराई। अधिकारियों ने उसे रेलवे बोर्ड का वरिष्ठ अधिकारी समझते हुए पूरा प्रोटोकॉल दिया। वीआईपी रूम में बैठाकर उसका स्वागत किया गया और नाश्ते की व्यवस्था भी कराई गई।


निरीक्षण के बाद कथित अधिकारी ने नजीबाबाद जाकर भी निरीक्षण करने की इच्छा जताई। इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने उसे देहरादून जाने वाली लिंक एक्सप्रेस के सेकंड एसी कोच में बर्थ उपलब्ध कराकर रवाना कर दिया।


सस्पेंड कराने की धमकी से हुआ शक


मामले में उस समय नया मोड़ आया जब रेलवे के एक अधिकारी ने उससे औपचारिक जानकारी लेने का प्रयास किया। इस पर कथित विजिलेंस अफसर ने रेलवे बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों का नाम लेकर संबंधित अधिकारी को सीधे निलंबित कराने की धमकी दे डाली। यहीं से अधिकारियों को उसके व्यवहार पर संदेह हुआ।


मुरादाबाद मंडल के अधिकारियों ने तत्काल नजीबाबाद रेलवे स्टेशन को सूचना दी। वहां पहुंचने पर सीआईटी (Chief Ticket Inspector) ने उससे पहचान पत्र और अधिकृत दस्तावेज मांगे। लेकिन वह कोई वैध पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका और जवाब देने में सकपका गया।


नजीबाबाद में गिरफ्तारी


पहचान संदिग्ध लगने पर रेलवे अधिकारियों ने उसे जीआरपी के हवाले कर दिया। पूछताछ में वह खुद को रेलवे बोर्ड का अधिकारी साबित नहीं कर पाया। इसके बाद जीआरपी ने उसे हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी ने पहले भी कहीं इसी तरह रेलवे या अन्य सरकारी विभागों को निशाना बनाया है या नहीं।


रेलवे प्रशासन ने की पुष्टि


मुरादाबाद मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (सीनियर डीसीएम) महेश यादव ने बताया कि एक व्यक्ति द्वारा खुद को विजिलेंस अधिकारी बताने का मामला सामने आया था। जांच के बाद उसकी पहचान संदिग्ध पाई गई और नजीबाबाद में उसे पकड़कर जीआरपी को सौंप दिया गया। यह घटना रेलवे प्रशासन के लिए भी एक बड़ा सबक मानी जा रही है, क्योंकि बिना पर्याप्त सत्यापन के एक व्यक्ति को रेलवे बोर्ड का अधिकारी मानकर पूरा प्रोटोकॉल दिया गया।

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