संसदीय कमेटी 8 जून को Rishikesh-Karnprayag Rail Project समेत Chardham Connectivity पर करेगी मंथन

रेलवे, आरवीएनएल और आईआरसीटीसी के अधिकारियों के साथ होगी अहम बैठक, पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने पर रहेगा फोकस

उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा, पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और रेल कनेक्टिविटी को नई गति देने के उद्देश्य से संसद की एक महत्वपूर्ण समिति 8 और 9 जून को दो दिवसीय दौरे पर योगनगरी ऋषिकेश पहुंचेगी। 31 सदस्यों वाली संसदीय कमेटी अपने दौरे के दौरान केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना सहित विभिन्न रेल विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही रेलवे, रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) और इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) के अधिकारियों के साथ विस्तृत मंथन भी किया जाएगा।

दौरे को लेकर रेलवे प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कमेटी के स्वागत, सुरक्षा, आवास और बैठकों की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह दौरा उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित रेल परियोजनाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

चारधाम यात्रा और पर्वतीय विकास पर रहेगा विशेष जोर

सूत्रों के अनुसार संसदीय कमेटी का मुख्य उद्देश्य चारधाम यात्रा को और अधिक सुगम, सुरक्षित तथा सुविधाजनक बनाना है। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन, व्यापार, रोजगार और आधारभूत संरचना के विकास को गति देने के लिए चल रही परियोजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी।

उत्तराखंड देश का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन राज्य है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा करते हैं। इसके बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन और कनेक्टिविटी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में संसदीय कमेटी का यह दौरा भविष्य की योजनाओं और परियोजनाओं के लिए दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।

रेलवे, आरवीएनएल और आईआरसीटीसी के साथ होगी समीक्षा बैठक

दो दिवसीय दौरे के दौरान समिति रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों, आरवीएनएल और आईआरसीटीसी के प्रतिनिधियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें करेगी। इन बैठकों में रेल परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्य की गति, बजट, तकनीकी चुनौतियों और समयबद्ध पूर्णता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

कमेटी यह भी जानने का प्रयास करेगी कि पर्वतीय क्षेत्रों में रेल सेवाओं और पर्यटन सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए किन कदमों की आवश्यकता है। आईआरसीटीसी द्वारा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही योजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस

संसदीय कमेटी के दौरे का सबसे महत्वपूर्ण विषय ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना मानी जा रही है। यह परियोजना उत्तराखंड के इतिहास की सबसे बड़ी रेल परियोजनाओं में शामिल है। लगभग 125 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों को देश के प्रमुख रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम करेगी।

परियोजना के पूरा होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक की यात्रा न केवल आसान होगी, बल्कि चारधाम यात्रा को भी नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार, व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।

रेलवे और आरवीएनएल द्वारा इस परियोजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। परियोजना में बड़ी संख्या में सुरंगों और पुलों का निर्माण शामिल है, जो इसे देश की सबसे चुनौतीपूर्ण रेल परियोजनाओं में शामिल करता है।

पांच जिलों को मिलेगा सीधा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के पूरा होने के बाद उत्तराखंड के कई पर्वतीय जिलों की तस्वीर बदल सकती है। इस परियोजना से देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। आपदा की स्थिति में भी राहत एवं बचाव कार्यों को गति मिलेगी।

निर्माण की चुनौतियों के कारण बढ़ी परियोजना लागत

जब ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को मंजूरी दी गई थी, तब इसकी अनुमानित लागत लगभग 14 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी। हालांकि निर्माण कार्य के दौरान सामने आई भौगोलिक और तकनीकी चुनौतियों के कारण लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पर्वतीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में लंबी सुरंगों का निर्माण, भूगर्भीय परिस्थितियों में बदलाव, डिजाइन में संशोधन तथा सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता के चलते परियोजना की लागत लगभग दोगुनी होने की बात सामने आई है।

इसके बावजूद केंद्र सरकार और रेलवे इस परियोजना को राष्ट्रीय महत्व की योजना मानते हुए प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रहे हैं।

तैयारियों में जुटा रेल प्रशासन

संसदीय कमेटी के दौरे को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों के अनुसार कमेटी के आगमन से पहले सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है। सुरक्षा, प्रस्तुतीकरण, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और निर्माण कार्यों की अद्यतन जानकारी तैयार की जा रही है ताकि समिति को परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जा सके।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि समिति का दौरा परियोजनाओं की प्रगति को और गति देने में सहायक होगा तथा भविष्य में उत्तराखंड के रेल नेटवर्क विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं।

विकास की नई दिशा तय कर सकता है दौरा

विशेषज्ञों का मानना है कि संसदीय कमेटी का यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के विकास की नई दिशा तय करने वाला कदम साबित हो सकता है। यदि परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी होती हैं तो चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व लाभ मिलेगा।

यही कारण है कि रेलवे, आरवीएनएल, आईआरसीटीसी और स्थानीय प्रशासन इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण मानते हुए इसकी तैयारियों में पूरी गंभीरता के साथ जुटे हुए हैं।

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