कांग्रेस, क्षेत्रीय दलों से BJP … और फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी: सुवेंदु अधिकारी से सम्राट चौधरी तक, भाजपा ने कैसे विपक्षी चेहरों पर खेला बड़ा दांव

उमेश लव, लव इंडिया। भारतीय राजनीति में दल बदल कोई नई बात नहीं है, लेकिन पिछले एक दशक में भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह दूसरे दलों से आए नेताओं को सीधे मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाया, उसने राजनीति की दिशा ही बदल दी। कभी कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, जदयू, राजद, तृणमूल कांग्रेस, जनता दल, जेएमएम और क्षेत्रीय दलों में सक्रिय रहे कई नेताओं ने भाजपा का दामन थामा और बाद में अपने-अपने राज्यों की सत्ता के शीर्ष पद तक पहुंचे।


पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना इस राजनीतिक रणनीति का सबसे चर्चित उदाहरण माना जा रहा है। कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले सुवेंदु ने टीएमसी छोड़ भाजपा का दामन थामा और अब राज्य की राजनीति के केंद्र में हैं।


दरअसल भाजपा ने पूर्वोत्तर से लेकर दक्षिण भारत और बिहार तक ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाया, जिनकी अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत सामाजिक और राजनीतिक पकड़ रही। भाजपा ने इन नेताओं को केवल पार्टी में शामिल ही नहीं किया, बल्कि संगठन और सरकार में बड़ी जिम्मेदारी देकर उन्हें मुख्यमंत्री तक बनाया।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की यह रणनीति दो स्तरों पर काम करती है—पहला, विपक्षी दलों को कमजोर करना और दूसरा, स्थानीय प्रभावशाली चेहरों के जरिए नए राज्यों में राजनीतिक विस्तार करना।

…नीचे ऐसे प्रमुख नेताओं की राजनीतिक यात्रा दी जा रही है, जो कभी कांग्रेस या अन्य दलों में रहे और बाद में भाजपा के मुख्यमंत्री बने।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी

पुरानी पार्टी: कांग्रेस, फिर तृणमूल कांग्रेस (TMC)
भाजपा में शामिल: 2020
मुख्यमंत्री बने: भाजपा की जीत के बाद

सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति का बड़ा नाम हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वर्ष 1995 में कांथी नगर निकाय चुनाव जीतकर पहली बार सुर्खियों में आए।
जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस बनाई तो सुवेंदु भी उनके साथ चले गए। टीएमसी सरकार में वे ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे।
2009 में वे तामलुक से सांसद बने और बाद में बंगाल की राजनीति में बेहद प्रभावशाली चेहरा बन गए। हालांकि 2020 में ममता बनर्जी से मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने टीएमसी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा बनाया और बाद में मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाया गया।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी


पुरानी पार्टी: राष्ट्रीय जनता दल (RJD), फिर जदयू
भाजपा में शामिल: 2017
मुख्यमंत्री बने: 15 अप्रैल 2026

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल से शुरू हुआ। वे बिहार की पिछड़ी राजनीति के बड़े चेहरों में गिने जाते हैं।
बाद में वे जनता दल यूनाइटेड में शामिल हुए, लेकिन 2017 में जदयू छोड़कर भाजपा में आ गए। भाजपा ने उन्हें ओबीसी चेहरे के रूप में आगे बढ़ाया।
पहले विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और फिर बिहार भाजपा अध्यक्ष बनाए गए। बाद में डिप्टी सीएम बने और आखिरकार 2026 में बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा


पुरानी पार्टी: कांग्रेस
भाजपा में शामिल: 2015
मुख्यमंत्री बने: 2021

हिमंता बिस्वा सरमा कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता तरुण गोगोई के करीबी माने जाते थे। वे असम सरकार में मंत्री भी रहे।
लेकिन कांग्रेस नेतृत्व से असंतुष्ट होकर 2015 में भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें पूर्वोत्तर में संगठन विस्तार की बड़ी जिम्मेदारी दी।
2016 में भाजपा की सरकार बनने पर मंत्री बने और 2021 में मुख्यमंत्री। लगातार दूसरी बार भी भाजपा ने उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लड़ा।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू


पुरानी पार्टी: कांग्रेस
भाजपा में शामिल: 2016
मुख्यमंत्री बने: पहले कांग्रेस से, बाद में भाजपा से

पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू कांग्रेस के बड़े नेता और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। पेमा ने भी राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की।
2016 में वे मुख्यमंत्री बने, लेकिन बाद में अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाए रखा।
इसके बाद 2019 और 2024 में भी भाजपा ने उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाया।

असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल


पुरानी पार्टी: असम गण परिषद (AGP)
भाजपा में शामिल: 2011
मुख्यमंत्री बने: 2016

सर्बानंद सोनोवाल ने छात्र राजनीति से शुरुआत की। वे ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़े रहे और बाद में असम गण परिषद में शामिल हो गए।
2011 में भाजपा में आए और पूर्वोत्तर में भाजपा के सबसे बड़े चेहरों में शामिल हो गए। 2016 में भाजपा की पहली असम सरकार बनी तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह


पुरानी पार्टी: तृणमूल कांग्रेस
भाजपा में शामिल: 2013
मुख्यमंत्री बने: 2026

युमनाम खेमचंद सिंह पहले डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी और बाद में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े रहे।
2013 में भाजपा में शामिल हुए। भाजपा सरकार बनने पर विधानसभा अध्यक्ष और बाद में मंत्री बनाए गए।
2026 में मणिपुर के मुख्यमंत्री बने।

मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह


पुरानी पार्टी: कांग्रेस
भाजपा में शामिल: 2016
मुख्यमंत्री बने: 2017

एन बीरेन सिंह का राजनीतिक सफर डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी से शुरू हुआ था। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हुए और मंत्री बने।
2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए। अगले ही साल भाजपा ने उन्हें मणिपुर का मुख्यमंत्री बना दिया।
2022 में दोबारा मुख्यमंत्री बने, लेकिन मणिपुर हिंसा के बाद 2025 में पद छोड़ना पड़ा।

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री गेगोंग अपांग


पुरानी पार्टी: कांग्रेस
भाजपा में शामिल: 2014 मुख्यमंत्री बने

भाजपा सरकार के दौरान गेगोंग अपांग अरुणाचल प्रदेश की राजनीति का बड़ा नाम रहे। लंबे समय तक कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे।
2014 में अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद राज्य में भाजपा की सरकार बनी और उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई


पुरानी पार्टी: जनता दल
भाजपा में शामिल: 2008
मुख्यमंत्री बने: 2021

बसवराज बोम्मई कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसआर बोम्मई के बेटे हैं। उन्होंने राजनीति की शुरुआत जनता दल से की।
2008 में भाजपा में शामिल हुए। भाजपा ने उन्हें संगठन और सरकार में अहम जिम्मेदारियां दीं। 2021 में बीएस येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा


पुरानी पार्टी: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)
भाजपा में शामिल: 2000
मुख्यमंत्री बने: 2003

अर्जुन मुंडा झारखंड आंदोलन के समय जेएमएम से जुड़े थे। बाद में भाजपा में शामिल हुए।
झारखंड राज्य बनने के बाद भाजपा ने उन्हें तेजी से आगे बढ़ाया और 2003 में मुख्यमंत्री बना दिया। वे राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा


पुरानी पार्टी: कांग्रेस
भाजपा में शामिल: 2016
मुख्यमंत्री बने: 2022

डॉ. माणिक साहा पेशे से दंत चिकित्सक रहे हैं। उन्होंने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की।
2016 में भाजपा में शामिल हुए। भाजपा ने पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया और फिर 2022 में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद भी भाजपा ने उन पर भरोसा बनाए रखा।

भाजपा की रणनीति क्यों सफल रही


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने उन नेताओं को आगे बढ़ाया जिनकी अपने राज्यों में मजबूत जातीय, क्षेत्रीय या सामाजिक पकड़ थी।
पूर्वोत्तर राज्यों में कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के प्रभावशाली नेताओं को भाजपा में शामिल कराकर पार्टी ने तेजी से अपना विस्तार किया। वहीं बिहार, बंगाल और दक्षिण भारत में भी भाजपा ने स्थानीय चेहरों को मुख्यमंत्री बनाकर राजनीतिक संतुलन साधा।
इन नेताओं के जरिए भाजपा को स्थानीय संगठन मजबूत करने, नए वोट बैंक जोड़ने और विपक्षी दलों को कमजोर करने में मदद मिली।

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