‘मुस्कान’ व ‘सोनम’ के नक्शे कदम पर चलकर अपनों की धृणा की पात्र और अपराधी बन गई गुरैठा की ‘स्वाति’

उमेश लव लव इंडिया, मुरादाबाद। यह पाकबड़ा थाना क्षेत्र के गांव गुरेठा की नवयुवती ‘स्वाति’ की ‘छोटी सी लव स्टोरी’ की ऐसी दुखदाई कहानी है जिसने स्वाति को अपनों की ही धृणा का पात्र बना दिया और समाज व कानून की नजर में अपराधी भी… यह अलग बात है कि अभी अदालत में स्वाति के अपराध पर कानूनी मोहर लगना बाकी है…!

गुरैठा के योगेश जाटव की हत्या से शुरू हुई स्वाति पर शनि की छाया

इसी 18 सितंबर की सुबह को गांव मौढ़ा तैय्या के ग्रामीणों ने कब्रिस्तान जाने वाले रोड पर एक युवक का शव पड़ा देखा। बाद में इसकी शिनाख्त योगेश जाटव के रूप में हुई जो पाकबड़ा थाना क्षेत्र के गांव गुरैठा का निवासी था और मजदूरी करता था। योगेश के भाई उमेश जाटव ने रिपोर्ट दर्ज और इसमें गांव गुरेठा के ही शोभाराम और उसके दो बेटे कपिल और गौरव को नामजद किया। पुलिस ने पंचनामा भरकर योगेश के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी को दबिश दी तो तीनों आरोपी अपने घर पर ही मिल गए।

इस पर पुलिस का माथा थंका। क्योंकि नामजद आरोपी होने के बावजूद कोई फरार नहीं। उच्च अधिकारियों को जानकारी दी गई तो आला अधिकारियों ने पुलिस के सहयोग के लिए SOG टीम को भी लगा दिया। तहकीकात शुरू हुई तो पुलिस को कई एंगल मिले। इसमें सबसे खास था करने वाले योगेश जाटव के फोन से की गई कॉल का, एक कॉल नामजत पिता पुत्र में से गौरव को की गई तो दूसरी कॉल डायल 112 पुलिस को।

गौरव ने कॉल रिसीव की लेकिन कोई बोला नहीं इस पर गौरव ने फिर से कॉल की और इस बार भी कोई नहीं बोला जबकि दूसरी कॉल योगेश यादव के फोन से डायल 112 को की गई और इस पर बकायदा बात भी की गई और बताया गया कि गौरव, गौरव का भाई, शोभाराम ईंट पत्थर से मार रहे हैं तथा मारपीट कर रहे है। यह काॅल मनोज ने आवाज बदलकर डायल 112 को की थी।

इसी दौरान तहकीकात में छोटी सी लव स्टोरी का एंगल भी आ गया और पता चला कि नामजद शोभाराम की बेटी स्वाति की गांव में ही नाई की दुकान कर रहे मनोज से नजदीकियां हैं और घर के लोगों को इसकी जानकारी है इसलिए पाबंदी भी लगा दी गई है। दूसरी तरफ मृतक योगेश जाटव के भाई उमेश जाटव व अन्य परिजनों ने डायल 112 को दी गई सूचना की आवाज को योगेश की मानने से इनकार कर दिया।

तो इस बार पाकबड़ा पुलिस और एसओजी टीम को पूरी घटना में बड़ा पेंच नजर आया और एक ग्रामीण ने आवाज को नाई की दुकान चलाने वाले मनोज की होने का दावा किया और यह मनोज वही था जिससे स्वाति की लव, लव, लव की नजदीकियां थीं।

पुलिस ने मनोज को तलाश करना शुरू किया लेकिन खोजबीन के दौरान पुलिस टीम को पता चला की मनोज अपने ममेरे भाई मंजीत संग गायब है तो पुलिस का शक और सब के दायरे से बाहर निकलते हुए मजबूत हो गया।

इस बीच 20 सितंबर की रात नया मुरादाबाद के एमडीए की तरफ पुलिस टीम चेकिंग कर रही थी कि अचानक दो युवक दिखाई दिए। पुलिस को देखकर भेज तो पुलिस ने भी घेराबंदी कर ली और आत्म समर्पण को कहा। इस पर एक ने गोली चला दी तो पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में इसको लंगड़ा कर दिया और यही लंगड़ा हुआ शख्स मनोज था जो गुरेठा में नाई की दुकान करता था और रात में चोरी चोरी चुपके चुपके स्वाति से प्रेम की पींगे बढ़ा रहा था और इसी प्रेम में रोड़ा बनने पर स्वाति मेरठ की नीले ड्रम वाली मुस्कान और बेवफा सनम के अपराधिक मार्ग पर चली गई।

यही कारण है कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद स्वाति की पैरवी के लिए कोई परिजन बार रिश्तेदार सामने नहीं आया क्योंकि कानून की नजर में पकड़ में आने के बाद स्वाति ने जो कुछ भी बयां किया। वह छोटी सी लव स्टोरी का दुखद अंत भले ही है लेकिन कड़वा सच यह है कि उसने अपने प्रेमी को पाने के लिए पिता और भाइयों की जिंदगी भी दाब पर लगा दी।

सोमवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल ने क्राइम पेट्रोल की तर्ज पर हुए इस हत्याकांड का खुलासा करने वाली पुलिस टीम की पीठ थपथपाई और ₹25000 का इनाम भी दिया इस दौरान नगर पुलिस अधीक्षक कुमार रणवीर सिंह भी मौजूद थे।

मुख्य हत्यारोपी मनोज के ममेरे भाई ने खोले सभी राज

अभियुक्त मंजीत उपरोक से पूछताछ की गयी तो अभियुक्त मंजीत ने बताया कि मनौज मेरी सगी बुआ का लडका है। हम दोनों का एक-दूसरे के पास काफी आना जाना है। मनोज ग्राम गुरैठा में करीब एक साल पहले नाई की दुकान चलाता था। मनोज रंग पुताई का काम भी जानता है। मैं भी मनोज के पास आता जाता रहता था व योगेश का मनोज की दुकान पर आना जाना था क्योकि योगेश भी रंग पुताई का काम करता था। मनोज व योगेश ने एक साथ रंग पुताई का काम किया है। जिससे मैं भी योगेश को जानता पहचानता था। मनोज की दुकान से थोडी दूरी पर स्वाति नाम की लडकी जिसके पिता का नाम शोभाराम व भाई का नाम कपिल व गौरव हैं।

मनोज का प्रेम प्रसंग चल रहा था स्वाति से

स्वाति से मनोज का प्रेम प्रसंग चल रहा था तथा दोनो कई बार चोरी छिपे मिला करते थे। मनोज, स्वाति को नींद की गोलिया देता था तथा स्वाति इन नींद की गोलियों को आटे में मिलाकर परिवार वालो को खिला देती थी, जब सारे घरवाले नींद की गोली के आगोश में आ जाते थे तो मनोज व स्वाति छत पर मिलते थे। इसकी भनक स्वाति के परिवार वालों को हो गयी थी, इस वजह से स्वाति की मुलाकात मनोज से नहीं हो पा रही था। स्वाति ने फोन करके मनोज को बताया था कि जब तक मेरे भाई व पिता घर पर है, हमारी मुलाकात सम्भव नहीं है।

सावधान इंडिया और क्राइम पेट्रोल देखने के बाद रची साजिश, उम्मीद थी- गौरव व गौरव के भाई व पिता को जेल भेज देगी पुलिस

मनोज सावधान इण्डिया, क्राइम पैट्रोल जैसे टीवी सीरियल देखता था… तो मनोज ने एक योजना बनाई और स्वाति, और मुझे बताया कि किसी भी व्यक्ति की हत्या करके उसके मोबाइल से गौरव को फोन कर देंगे और फिर उसके बाद मरने वाले के ही फोन से 112 पर काल करके गौरव व गौरव के भाई व पिता शोभाराम का नाम लगा देंगे और जिस व्यक्ति की हत्या करनी है… के मोबाइल से आवाज बदलकर गौरव व गौरव के भाई व पिता के द्वारा मारपीट करने की सूचना दे देंगे। जिससे पुलिस गुमराह हो जायेगी और गौरव व गौरव के भाई व पिता को पुलिस जेल भेज देगी।

17 सितंबर की शाम को अचानक मनोज को मिल गया था योगेश

इस योजना को पूरा करने के लिए 17 सितंबर 2025 को सुबह से ही मनोज और मैंने शाम का प्लान बना रखा था कि जो भी व्यक्ति इस काम को अंजाम देने के लिए आसानी से मिलेगा। उसी के साथ इस तरह की घटना को अंजाम देना है। शाम के समय कैलसा रोड पर अचानक योगेश जो स्वाति के गांव गुरैठा का रहने वाला था, मनोज को मिल गया और मनोज ने मुझे वहीं बुला लिया।

महिला पुलिस की अभिरक्षा में स्वाति और मुख्य हत्यारोंपी का ममेरा भाई मंजीत

मनोज ने 200 रुपये देकर 2 देसी के क्वार्टर मंगवाये मनजीत सिंह

मनोज ने योगेश से पूछा कि कहां जा रहा है तो योगेश ने बताया कि मेरे एक व्यक्ति पर 1000 रुपये मजदूरी के बकाया हैं, उन्हें लेने आया हूं। योगेश साईकिल पर था और हम दोनों योगेश का पीछा करने लगे। जब योगेश अपना तकादा करके वापस आया तो हम दोनों योगेश को बहला फुसलाकर, शराब का लालच देकर एमडीए की तरफ ले गये तथा योगेश अपनी साईकिल पर था और मनोज मोटरसाईकिल चला रहा था… मैं पीछे बैठा था। मनोज ने योगेश की साइकिल पैट्रोल पम्प के बगल में हट्टी पर खड़ी करा दी और इसके बाद हम तीनो मंगूपुरा देसी शराब की हट्टी पर पहुंचे तो मनोज ने मुझे 200 रुपये देकर 2 देसी के क्वार्टर मंगवाये।

योगेश की शराब के पैग में नशीली गोलियां मिला दी थी

इसके बाद हम तीनों एमडीए में महाकालेश्वर मंदिर के सहारे से हर्बल पार्क को जाने वाले रास्ते पर खड़े हो गये और योगेश को नमकीन लाने के लिए भेज दिया और तभी मनोज ने योगेश की शराब के पैग में 6-7 नींद की गोली डाल दी जिससे योगेश को काफी नशा हो गया था। तो योगेश को मोटर साइकिल पर बीच में बैठाकर सुपर टेक के पास सुनसान जगह मे लिटाकर फिर हम दोनो पैट्रोल पम्प पर हट्टी के पास पूर्व से खडी की गयी योगेश की साइकिल को लेकर हर्बल पार्क की तरफ से गांगन नदी पर ले गये। मैं साईकिल को पकडकर बैठा था।

योगेश जाटव हत्याकांड का मुख्य आरोपी मनोज

मनोज ने योगेश के हाथ दबाए और और मनजीत में लिये और मुझसे कहा कि ईंट से इसके सिर को फोड दे। तब मैंने वहीं से ईट उठाकर योगेश के सिर पर कई वार किये

मनोज मोटर साईकिल चला रहा था और मनोज ने मोटरसाइकिल गांगन नदी के किनारे खड़ी करके मैंने व मनोज ने सडक से नीचे उतरकर ढ़लान के उपर से साईकिल नदी में फेक दी। जिस जगह को मैं अच्छी तरह से जानता हूं। फिर हम वही पर वापस आये, जहां पर योगेश को छोडकर गये थे। योगेश वही नशे की हालत में पड़ा था तब मैने और मनोज ने मिलकर योगेश को नशे की हालत में मोटर साईकिल पर बैठाकर जीरो प्वाइंट पुल के नीचे से बागड़पुर से होते हुए मोढ़ा तैय्या के कब्रिस्तान की तरफ जाने वाले रास्ते पर ले जाकर योगेश को मोटर साईकिल से उतारकर जमीन पर गिरा लिया और मनोज ने योगेश के उपर बैठकर योगेश के हाथ दबा लिये और मुझसे कहा कि ईंट से इसके सिर को फोड दे। तब मैंने वहीं से ईट उठाकर योगेश के सिर पर कई वार किये तथा चेहरे पर भी ईट से वार किया जिससे योगेश बेहोश हो गया और नशे में कह रहा था कि मुझे क्यों मार रहे हो तो उसके बाद मनोज ने योगेश का गला दबा दिया और जब तक सांस नहीं निकल गया तब तक मनोज ने गला नहीं छोडा और इस तरह हम दोनो ने योगेश की हत्या कर दी।

मृतक योगेश जाटव का फाइल फोटो

गौरव और डायल 112 को आवाज बदलकर की कॉल

योगेश की हत्या करने के बाद पूर्व से योजना के अनुसार मनोज ने स्वाति द्वारा दिये गये अपने भाई गौरव के फोन पर योगेश के फोन से काल की जो गौरव ने रिसीव की और उसके बाद उधर से भी फोन पर काल आयी जो रिसीव की पर हम लोग बोले नहीं। उसके बाद मनोज ने योगेश के फोन से ही 112 पर काल की और बताया कि गौरव, गौरव का भाई, शोभाराम ईंट पत्थर से मार रहे है तथा मारपीट कर रहे है। मनोज ने आवाज बदलकर काल की थी।

पाकबड़ा में नसीम ज्वेलर्स के यहां काम करता था मंजीत

इसके बाद हम लोग योगेश के मोबाइल को योगेश के पास रखकर ही तथा ईंट को वही झाडियों मे फेककर चले गये थे। मेरे कपडों पर खून के धब्बे लग गये थे। तो मनोज मुझे लेकर पाकबडा अपने कमरे पर आ गया था। मनोज ने कहा कि तेरे घर पर चल रहे है। फिर हम दोनो मेरे घर पर पहुंच गये। मनोज मेरे घर पर तो गया था। सुबह को मैं अपनी दुकान पर आ गया और मनोज अपने गांव खेडादास चला गया था। मैं नसीम ज्वलर्स जुमेरात का बाजार कस्बा पाकबडा में काम करता हूं। घटना में प्रयुक्त मोटर साईकिल मनोज द्वारा किसी से खरीदी गयी थी। तब से हम लोग इधर उधर घूम रहे थे। हम लोगों को आज पता चला कि पुलिस मनोज के बारे मे जानकारी करती घूम रही है। तो आज मैं और मनोज साइकिल की जगह बदलने के व ईंट को छिपाने के लिए गागन नदी की तरफ जा रहे थे।

स्वाति पर बीएस की धारा 61 के तहत आपराधिक साजिश कर

फिलहाल पुलिस ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मंजीत और स्वाति को भी पेश किया और पूरी कहानी बताई तब भी चेहरे को ढके हुए स्वाति की आंखों में पश्चाताप का भाव नजर नहीं आ रहा था। पुलिस ने स्वाति को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61 “आपराधिक साजिश” के तहत गिरफ्तार किया है। इसके तहत से कहा गया है कि जब दो या दो से अधिक व्यक्ति किसी अवैध कार्य को करने या वैध कार्य को अवैध तरीके से करने की सहमति देते हैं और उस समझौते के तहत कोई प्रत्यक्ष कार्य करते हैं, तो वे आपराधिक साजिश के दोषी होते हैं। इस धारा के तहत सजा अपराध की गंभीरता पर निर्भर करती है और इसमें छह महीने तक की कैद या जुर्माना हो सकता है, लेकिन गंभीर अपराधों के लिए यह अधिक हो सकती है।

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