नगर निगम के उप नगर आयुक्त रामपाल को कोर्ट से नोटिस, 10 नामजद व 50-60 अज्ञात के खिलाफ CJM कोर्ट में मुकदमा
उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। नगर निगम मुरादाबाद के टाउन हॉल स्थित कार्यालय में मारपीट और गर्भपात के गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए वाद स्वीकार कर लिया है। अदालत ने मामले में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए पत्रावली तलब की है।

मामला अपना दल (कमेरावादी) के जिलाध्यक्ष रामेश्वर दयाल तुरैहा और उनकी पत्नी मंजू राठौर से जुड़ा है। मंजू राठौर ने बीएनएस की धारा 173 (4) के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में दाखिल वाद पत्र में आरोप लगाया है कि 27 अक्टूबर 2025 को उनके पति कुछ भू-माफियाओं से जमीन कब्जा मुक्त कराने की मांग को लेकर नगर आयुक्त को ज्ञापन देने नगर निगम कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान नगर निगम कर्मचारियों और निगम के नेताओं ने मारपीट की।
पति के फोन पर पहुंची थीं नगर निगम कार्यालय

प्रार्थना पत्र के अनुसार, उस समय मंजू राठौर चार माह की गर्भवती थीं और घर पर मौजूद थीं। आरोप है कि पति का फोन आने पर वह वाहन लेकर नगर निगम कार्यालय पहुंचीं, जहां पहले से मौजूद लोगों ने उनके साथ अभद्रता और मारपीट की।
याचिका में दावा किया गया है कि आरोपियों ने उनके पेट और शरीर के अन्य हिस्सों पर हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। इतना ही नहीं, उनके पास मौजूद नकदी, मोबाइल फोन और वाहन की चाबी छीन लेने का भी आरोप लगाया गया है।
मारपीट के कारण गर्भ गिरने का आरोप

प्रार्थिनी का आरोप है कि मारपीट के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उनका चार माह का गर्भ गिर गया। उन्होंने यह भी कहा कि घटना की सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई और न ही समुचित कार्रवाई की गई।
पुलिस से राहत न मिलने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली और बीएनएसएस की धारा 173(4) के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
उप नगर आयुक्त सहित 10 नामजद आरोपी

न्यायालय में दाखिल वाद में उप नगर आयुक्त रामपाल, प्रेम बाबू वाल्मीकि, ओमी लाल वाल्मीकि, धर्मेंद्र मुल्तानी, गीता सक्सेना, नीरजपाल पाराशर, अनिल लश्करी, मोहम्मद सुब्हान अली, नाजिर सौरभ और मोहम्मद आशिफ को नामजद किया गया है। इसके अलावा 50 से 60 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बताया गया है।
कोर्ट ने स्वीकार किया वाद

न्यायालय के आदेश के अनुसार प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए संबंधित विपक्षी को नोटिस जारी किए गए हैं। अदालत ने मामले की पत्रावली आगामी सुनवाई के लिए तलब की है। अदालत ने मामले की पत्रावली आगामी 29 जून को सुनवाई के लिए तलब की है।
आरोपों की अभी न्यायिक जांच बाकी

मामले में अभी अदालत ने केवल वाद स्वीकार कर नोटिस जारी किए हैं। आरोपों की सत्यता पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा। फिलहाल अदालत में मामला विचाराधीन है और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
