विहिप नेता को बदनाम करने की साजिश या करोड़ों की जमीन का खेल? जांच के घेरे में पूरा मामला
उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के प्रांतीय गौ रक्षा प्रमुख डॉ. राजकमल गुप्ता और उनके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज भूमि विवाद का मामला अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर शिकायतकर्ता महिला ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन का बैनामा कराने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर डॉ. राजकमल गुप्ता का दावा है कि उन्होंने भूमि विधिवत तरीके से खरीदकर बैंक के माध्यम से भुगतान किया था।

थाना सिविल लाइंस में दर्ज एफआईआर के अनुसार अमरोहा जिले के कमालुद्दीन की मढ़ैया निवासी सावित्री देवी ने आरोप लगाया है कि मुकुलपुर फस्टामली स्थित उनकी कृषि भूमि को फर्जी आधार कार्ड और अन्य कूटरचित दस्तावेजों के जरिए अपने नाम कराने की साजिश रची गई। शिकायत में विहिप नेता डॉ. राजकमल गुप्ता, उनकी पत्नी डॉ. अर्चना रानी गुप्ता समेत सात लोगों को नामजद किया गया है।
महिला का आरोप है कि उसने न तो अपनी जमीन बेची और न ही किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर अथवा अंगूठा लगाया। इसके बावजूद कथित रूप से दूसरी महिला को प्रस्तुत कर भूमि का बैनामा कराया गया और स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड में बदलाव का प्रयास किया गया।

वहीं डॉ. राजकमल गुप्ता ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उन्होंने संबंधित भूमि सावित्री देवी से खरीदी थी। उनका कहना है कि बैनामा कराने से पहले सभी दस्तावेजों की जांच की गई और भुगतान बैंक खाते के माध्यम से किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग समझौते और धन की मांग कर रहे थे, जिसे स्वीकार न करने पर उनके खिलाफ शिकायत कराई गई।
मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अब दस्तावेजों की सत्यता है। जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि बैनामा कराने वाली महिला वास्तव में भूमि स्वामी थी या नहीं, आधार कार्ड और पहचान संबंधी दस्तावेज असली थे या फर्जी, तथा भुगतान किसे और किन परिस्थितियों में किया गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राजस्व अभिलेख, रजिस्ट्री रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन, आधार सत्यापन और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच की जाएगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
फिलहाल यह मामला दो विरोधी दावों के बीच खड़ा है। एक पक्ष इसे फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने का मामला बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे प्रतिष्ठा धूमिल करने की साजिश करार दे रहा है। ऐसे में पुलिस और राजस्व विभाग की जांच ही तय करेगी कि मामला वास्तव में भूमि धोखाधड़ी का है या फिर किसी व्यक्ति विशेष को विवाद में घसीटने का प्रयास। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष मानना उचित नहीं होगा।
