भाजपा के भीतर ‘जमीन युद्ध’ की गेंद मंडलायुक्त के पाले में: विधायक रितेश गुप्ता ने मेयर विनोद अग्रवाल के सौदे को जोड़ा आजाद समाज पार्टी के पूर्व प्रत्याशी चांद बाबू व उसके भाई से, दोनों को बताया भू-माफिया

वर्ष 20 27 के चुनाव से पहले मुरादाबाद की भाजपा की सियासत में नई हलचल हो गई है और वह, यह है कि मुरादाबाद के वरिष्ठ भाजपा नेता और मौजूदा मेयर विनोद अग्रवाल ने जिस चांद बाबू से धीमरी गांव में खरीदी थी और प्रशासन ने उस जमीन को सरकारी बताते हुए बुलडोजर चला था तो मेयर ने जमीन को निर्वादित बताते हुए कहा था कि यह उन्होंने चांद बाबू से खरीदी थी जो आजाद समाज पार्टी के नेता है और कुंदरकी विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं। अब शहर विधायक रितेश गुप्ता ने इसी चांद बाबू, इसके भाई शौकीन और एक अन्य मौहम्मद शाह उमाद को भू-माफिया बताया है और मंडलायुक्त अंजनेय कुमार सिंह को पत्र लिखकर जल्द जांच और कार्रवाई की मांग की है और इसी के साथ भाजपा के सियासी गलियारों में हलचल मच गई है।


📍 लव इंडिया, मुरादाबाद। मुरादाबाद की राजनीति में इस समय ऐसा भूचाल आया है जिसने सत्ता पक्ष की अंदरूनी खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। सरकारी जमीन, भू-माफिया और सत्ताधारी नेताओं के बीच कथित रिश्तों को लेकर अब सीधे-सीधे सवाल उठ रहे हैं।नगर विधायक रितेश गुप्ता द्वारा मंडलायुक्त को लिखे गए पत्र ने न सिर्फ प्रशासन को सक्रिय कर दिया है, बल्कि भाजपा के भीतर भी असहजता और हलचल तेज कर दी है।

🔥 विधायक का सीधा वार: “भू-माफिया सक्रिय, सरकारी जमीन पर डाका”


विधायक रितेश गुप्ता ने अपने पत्र में साफ आरोप लगाया है कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के गांव धीमरी में मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी कम्पोजिट विद्यालय योजना के लिए चिन्हित सरकारी भूमि पर संगठित तरीके से कब्जा करने की साजिश चल रही है।
पत्र में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें चांद बाबू और उनके सहयोगियों को “भू-माफिया” बताया गया है। विधायक ने आरोप लगाया कि ये लोग सरकारी जमीन को कब्जाने के लिए न सिर्फ फर्जीवाड़ा कर रहे हैं, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लेकर सरकारी योजना को लटकाने की भी तैयारी में हैं।
साफ शब्दों में कहा जाए तो विधायक का आरोप है कि सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बनाने की खुली कोशिश हो रही है।

🚜 बुलडोजर के बाद भी नहीं रुकी कहानी, अब सियासत में विस्फोट


यह वही जमीन है जिस पर प्रशासन पहले ही बुलडोजर कार्रवाई कर चुका है। लेकिन अब विधायक के पत्र ने इस पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। बुलडोजर कार्रवाई के बाद मामला शांत होने की बजाय और ज्यादा भड़क गया है, क्योंकि अब इसमें सत्ता पक्ष के ही लोगों के नाम जुड़ते दिखाई दे रहे हैं।

⚡ सबसे बड़ा खुलासा: ‘भू-माफिया’ से मेयर का जमीन सौदा!

इस पूरे विवाद ने तब विस्फोटक रूप ले लिया जब सामने आया कि जिस चांद बाबू को विधायक “भू-माफिया” बता रहे हैं, उसी से मुरादाबाद के मेयर विनोद अग्रवाल ने जमीन खरीदी थी। यानी एक तरफ विधायक उसी व्यक्ति पर आरोप लगा रहे हैं, दूसरी तरफ उसी व्यक्ति से सत्ता के ही एक बड़े पद पर बैठे नेता का जमीन सौदा सामने आ रहा है। यहीं से यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव और अंदरूनी संघर्ष का खुला उदाहरण बन गया है।


🗣️ मेयर का बचाव: “कानूनी तरीके से खरीदी जमीन”


विवाद बढ़ने के बाद मेयर विनोद अग्रवाल ने सफाई देते हुए कहा—जमीन उन्होंने आजाद समाज पार्टी से जुड़े नेता हाजी चांद बाबू से खरीदी थी। सौदा पूरी तरह वैध प्रक्रिया के तहत हुआ। इस जमीन में उनके साथ संजय रस्तोगी साझेदार थे। बाद में संजय रस्तोगी ने अपना हिस्सा अमित चौधरी को दे दिया। मेयर ने सीधे तौर पर किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया है।

🧩 परत दर परत खुलता मामला: विवादित चेहरों का नेटवर्क


जैसे-जैसे मामला खुल रहा है, कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं— अमित चौधरी, भाजपा नेता ऋषिपाल चौधरी के भाई बताए जा रहे हैं। चांद बाबू पहले से ही विवादित जमीन सौदों को लेकर चर्चा में रहे हैं। नेशनल हाईवे बाईपास क्षेत्र में ग्रामीणों ने उन पर जमीन कब्जाने के आरोप लगाए। चकबंदी से जुड़े कुछ लेखपालों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए हैं। यानी मामला सिर्फ एक जमीन तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।


⚖️ अब प्रशासन पर दबाव: जांच या लीपापोती


विधायक के पत्र के बाद अब प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी राजनीतिक दबाव में दब जाएगा ?

🧠 भाजपा में अंदरूनी जंग या ईमानदार कार्रवाई


यह पूरा घटनाक्रम कई गंभीर सवाल छोड़ता है—
क्या भाजपा के भीतर ही टकराव खुलकर सामने आ गया है? क्या यह भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई है या सियासी शक्ति प्रदर्शन? क्या भू-माफिया के खिलाफ लड़ाई सच में होगी या सिर्फ बयानबाजी। फिलहाल इतना तय है कि मुरादाबाद की राजनीति में यह मामला लंबा चलने वाला है।

📌 जमीन से उठी चिंगारी अब सियासी आग बन चुकी है


सरकारी जमीन, भू-माफिया और सत्ताधारी नेताओं के बीच संबंधों के आरोपों ने मुरादाबाद की राजनीति को झकझोर दिया है।
अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
और अगर नहीं हुई—तो यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।

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