मजलिस में मुस्लिम महिलाओं की उच्च शिक्षा पर जोर, शादी के बाद भी पढ़ाई जारी रखने की अपील



लव इंडिया मुरादाबाद। अजादनगर स्थित इमामबाड़ा मोहम्मदिया हॉल में रहबर-ए-मुअज्जम शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई के ईसाले सवाब के लिए मजलिस-ए-तरहीम का आयोजन किया गया। मजलिस को आलिजनाब मौलाना सैयद जमीर अब्बास जाफरी ने खिताब किया।
मजलिस के दौरान मौलाना सैयद जमीर अब्बास जाफरी ने विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं और बेटियों की शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज की तरक्की के लिए बेटियों को बेहतर और उच्च शिक्षा दिलाना जरूरी है।


उन्होंने कहा कि जिस तरह ईरान में महिलाएं विश्वविद्यालयों में जाकर उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं, उसी तरह भारत की मुस्लिम महिलाओं और बेटियों को भी उच्च शिक्षण संस्थानों में जाकर शिक्षा हासिल करनी चाहिए। उन्होंने बेटियों से शिक्षा के साथ-साथ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने और अपनी काबिलियत के माध्यम से देश की तरक्की में योगदान देने की अपील की।


शादी के बाद भी पढ़ाई जारी रखने की अपील


मौलाना ने कहा कि लड़कियों को शादी के बाद भी अपनी शिक्षा नहीं छोड़नी चाहिए। उन्हें उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई जारी रखते हुए आधुनिक तकनीक और विभिन्न क्षेत्रों में महारत हासिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षित महिला न केवल अपने परिवार को बेहतर दिशा दे सकती है, बल्कि समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान कर सकती है।


मौलाना ने हिंदुस्तान में मुसलमानों के सकारात्मक और जिम्मेदार किरदार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मुसलमान को अपने देश के प्रति वफादार रहना चाहिए और देश की तरक्की में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।


शिया-सुन्नी एकता और भाईचारे का संदेश


मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना ने कहा कि ईरान हमेशा भारत के लिए वफादार रहा है। उन्होंने कहा कि शहीद आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई ने शिया-सुन्नी एकता और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जब तक इंसान का अल्लाह पर भरोसा है और वह हुसैनी है, तब तक वह जुल्म के सामने झुक नहीं सकता। मजलिस के माध्यम से उन्होंने लोगों को शिक्षा, आपसी भाईचारे, सामाजिक जिम्मेदारी और देश के प्रति वफादारी का संदेश दिया।
मजलिस के अंत में मौजूद लोगों ने देश की तरक्की, अमन-चैन और खुशहाली के लिए दुआएं कीं।

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