भोजपुर पुलिस पर झूठे मुकदमे का आरोप, चौकी इंचार्ज समेत 10 लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज
लव इंडिया, मुरादाबाद। थाना भोजपुर पुलिस पर कथित रूप से झूठा मुकदमा दर्ज कर लोगों को जेल भेजने के आरोपों का मामला अदालत पहुंच गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) मुरादाबाद के आदेश पर सिरसवां गौड़ चौकी प्रभारी, पांच पुलिसकर्मियों और पांच ग्रामीणों सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज किया गया है। अदालत ने सभी आरोपितों को 4 अगस्त को उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला थाना भोजपुर क्षेत्र के गांव जैतपुर का है। गांव निवासी नजारुल ने अपने अधिवक्ता आशकार हुसैन के माध्यम से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में परिवाद दायर किया। परिवाद में चौकी प्रभारी विपिन कुमार राठी, उपनिरीक्षक अजीत सिंह, हेड कांस्टेबल कमल सिंह, मनोज कुमार, अनूप यादव तथा ग्रामीण तेजपाल, गिरीश पाल, रमेश, रामरतन और मानसिंह को पक्षकार बनाया गया है। मामले में अब्दुल हसन, आबिद और सुनील को साक्षी बताया गया है।
परिवाद के अनुसार, शिकायतकर्ता के भतीजे सालिम पुत्र नजाकत अली, यश उर्फ गोलू तथा खालिद पुत्र नजाकत के खिलाफ पहले एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि 8 मई को उन्हें सूचना मिली कि सालिम और एक युवती कचहरी परिसर में मौजूद हैं और एसएसपी कार्यालय में पेश होने आए हैं। उनका दावा है कि युवती ने स्वयं को बालिग बताते हुए सालिम के साथ अपनी मर्जी से रहने की बात कही थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ ग्रामीण दोनों को जबरन अपने साथ ले गए, जिसके बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर थाना भोजपुर पहुंचाया। आरोप है कि 8 मई से 12 मई तक उन्हें थाने में रखा गया और बाद में 10 मई को एक अन्य झगड़े के मामले में चालान कर दिया गया। परिवाद में यह सवाल भी उठाया गया है कि यदि संबंधित व्यक्ति पहले से पुलिस हिरासत में था तो वह गांव में झगड़ा करने कैसे पहुंच सकता है।

शिकायतकर्ता के अधिवक्ता आशकार हुसैन ने बताया कि यह परिवाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक निर्णय के आलोक में दायर किया गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायालय से निष्पक्ष सुनवाई और न्याय की उम्मीद है। इस मामले में लगाए गए सभी आरोप परिवाद में किए गए दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों पर संबंधित पुलिसकर्मियों या अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। मामले की सुनवाई न्यायालय में लंबित है।
