राम मंदिर दान विवाद पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा पलटवार, बोले- सबूत दो या आरोप वापस लो…

लव इंडिया, मुरादाबाद। मुरादाबाद पहुंचे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम मंदिर दान विवाद, गांव-गांव से चंदा लेने के आरोप, SIT जांच में हो रही देरी और गौ-संरक्षण जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने अपने ऊपर आरोप लगाने वालों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी के पास कोई प्रमाण है तो वह सार्वजनिक करे, अन्यथा निराधार आरोप लगाना बंद करे।

जांच को अनावश्यक रूप से लंबा खींचा जा रहा


राम मंदिर दान विवाद पर शंकराचार्य ने कहा कि लगातार चोरी के आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस तथ्य सामने नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई थी और प्रारंभिक रिपोर्ट कुछ दिनों में आनी थी, लेकिन अब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। उन्होंने कहा, “जांच को अनावश्यक रूप से लंबा खींचा जा रहा है। कहीं ऐसा न हो कि समय बीत जाए और मामला लोगों की नजरों से ओझल हो जाए।”


“कैमरा लेकर चलो, एक गांव भी साबित कर दो”


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गांव-गांव जाकर चंदा लेने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह किसी भी गांव में चंदा मांगने नहीं गए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “जिसे लगता है कि हमने किसी गांव से चंदा लिया है, वह गांव का नाम बताए। कैमरा लेकर हमारे साथ चलिए। यदि वहां का कोई व्यक्ति कह दे कि हमने उससे चंदा मांगा या लिया है, तब बात करेंगे। झूठ फैलाना बंद होना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि उन पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में पहले प्रमाण पेश किए जाएं। बिना साक्ष्य के आरोप लगाना उचित नहीं है।


“गुरु का धन गुरु का ही होता है”


सोना-चांदी विद्या पीठ में रखे जाने से जुड़े आरोपों पर उन्होंने कहा कि यदि गुरु की संपत्ति सुरक्षित रखी गई है तो उसमें गलत क्या है। उन्होंने कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध विश्वास का होता है और इस विषय को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।


गौमाता को ‘पशु’ कहने पर सरकार को घेरा


शंकराचार्य ने गौ-संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय केवल पशु नहीं बल्कि माता का स्थान रखती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि गाय को ‘पशु’ की श्रेणी में रखने के बजाय उसके सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के अनुरूप सम्मान दिया जाए।


उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों में जाकर गौ-संरक्षण के प्रति जनजागरण करना है और लोगों से गौमाता की रक्षा के लिए संकल्प लेने की अपील करना है।


शंकराचार्य ने कहा कि गौ-संरक्षण केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में स्पष्ट और प्रभावी कानून बनाने की मांग भी दोहराई।

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