AI में नहीं मनुष्य जैसी भावनाएं और संवेदनाएं, समझदारी से हो प्रयोगः गोलक

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ कंप्यूटिंग साइंसेज़ एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी- सीसीएसआईटी और फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग- एफओई की ओर से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स पर दो दिनी अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का शंखनाद

लव इंडिया मुरादाबाद। बीएलएस इंटरनेशनल सर्विस लिमिटेड, नई दिल्ली के टेक्नोलॉजी एंड इन्नोवेशन प्रेसिडेंट श्री गोलक कुमार सिमली ने तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव पर बोलते हुए कहा, किसी भी समस्या का समाधान सीधे तकनीक के माध्यम से शुरू नहीं करना चाहिए। सबसे पहले समस्या और उसके मूल कारण को समझना आवश्यक है। उन्होंने लोग, उद्देश्य, प्रक्रिया और समृद्धि के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, जनरेटिव एआई और एजेंटिक एआई के बारे में समझाते हुए बताया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता सही आंकड़ों और संदर्भ के आधार पर बेहतर परिणाम दे सकती है।

उन्होंने स्टुडेंट्स को सलाह दी, तकनीक का उपयोग बिना सोचे-समझे नहीं, बल्कि समझदारी और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता में मनुष्य जैसी भावनाएं और संवेदनाएं नहीं होतीं, इसलिए इसके उपयोग में मानवीय निर्णय और जिम्मेदारी बहुत महत्वपूर्ण हैं। श्री सिमली तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ कंप्यूटिंग साइंसेज़ एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी- सीसीएसआईटी और फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग- एफओई की ओर से डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स पर दो दिनी फर्स्ट अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

इससे पूर्व मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन के संग ऑडिटोरियम में कॉन्फ्रेंस का शंखनाद हुआ। अतिथियों को बुके देकर स्वागत और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, इंटेलिजेंट सिस्टम्स, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, साइबर सुरक्षा, स्मार्ट टेक्नोलॉजी और अन्य उभरती डिजिटल तकनीकों में नवीन अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करना है। इस मौके पर कॉन्फ्रेंस की प्रोसीडिंग का विमोचन भी हुआ।

आईबीएम इंडिया/साउथ एशिया के अकाउंट टेक्निकल लीडर डॉ. प्रभात मनोचा ने बतौर विशिष्ट अतिथि कहा, उद्योग जगत और तकनीकें तेज़ी से बदल रही हैं। क्लाउड, जेननेटिवएआई, न्यूरल नेटवर्क और एजेंटिक एआई इसके प्रमुख उदाहरण हैं। यूनिवर्सिटीज़ केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि अनुभव, संवाद और एक-दूसरे से जुड़ने का माध्यम भी होना चाहिए। उन्होंने रूरल नेटवर्क और क्लाउड कंप्यूटिंग पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. मनोचा ने चार प्रमुख तकनीकी रुझानों- इंगेजमेंट, इंहेंसमेंट, सिक्योरिटी और क्वांटम की उपयोगिता का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि क्वांटम-सेफ तकनीक डेटा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर सुरक्षित तरीके से भेजने में क्लासिकल कंप्यूटिंग की तुलना में बेहतर समाधान प्रदान करती है। क्वांटम एडवांटेज को उन्होंने चैटजीपीटी जैसी तकनीक से जोड़ते हुए हेल्थकेयर और अनुसंधान में इसकी उपयोगिता बताई। अंत में उन्होंने कहा कि तकनीक ज्ञान और नवाचार का महत्वपूर्ण माध्यम है।

ख़ास बातें
डॉ. प्रभात मनोचा बोले, तकनीक ज्ञान और नवाचार का महत्वपूर्ण माध्यम
डॉ. इंदर पाल सिंह सेठी का भारतीय भाषा मॉडल विकसित करने पर जोर
रियल-टाइम प्रोजेक्ट की वर्किंग से ही वास्तविक ज्ञान संभवः प्रो. वीके जैन
प्रो. मंजुला जैन ने विकसित भारत 2047 के विजन को मानव बुद्धिमत्ता से जोड़ा

केन्द्र सरकार शिकायत अपीलीय समिति के पूर्णकालिक सदस्य एवम् नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर-एनआईसी, दिल्ली के पूर्व महानिदेशक डॉ. इंदर पाल सिंह सेठी ने बताया, पिछले महीने लगभग 24 अरब यूपीआई लेन-देन हुए। डिजिलॉकर के करीब 60 करोड़ उपयोगकर्ता हो गए हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना और वन नेशन वन राशन कार्ड के माध्यम से लगभग 80 करोड़ नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। लगभग 29 करोड़ ड्राइविंग लाइसेंस डिजिटल रूप से जारी किए जा चुके हैं।

उन्होंने डेटा सेंटर, क्लाउड और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से भविष्य के परिदृश्य का पूर्वानुमान लगाने और बड़ी बचत करने की बात कही। उन्होंने बताया, अब वाहन नंबर प्लेट के आधार पर पॉल्यूशन सर्टिफिकेट का नवीनीकरण बिना पुराने दस्तावेज़ की फोटोकॉपी से संभव हो गया है। श्री सेठी ने इंडियाएआई मिशन के तहत भारतीय भाषा मॉडल विकसित करने और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

टीएमयू के वीसी प्रो. वीके जैन ने डिजिटाइजेशन को भौतिक डेटा के डिजिटल रूप में परिवर्तन बताते हुए कहा, इंटेलिजेंट सिस्टम प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाते हैं। वास्तविक ज्ञान तब मिलता है जब छात्र प्रोजेक्ट बनाते हैं, स्टार्टअप शुरू करते हैं या रियल-टाइम प्रोजेक्ट पर काम करते हैं। तकनीक एआई के कारण बहुत तेज़ी से बदल रही है, इसलिए निरंतर अपडेट रहना आवश्यक है।

उन्होंने ऑटोमेटेड सैटेलाइट सिस्टम और ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का उल्लेख किया। यूनिवर्सिटी को आईईसी 4-स्टार रेटिंग प्राप्त है। उच्च शिक्षा रैंकिंग में 18,000 संस्थानों में शीर्ष स्थानों पर है। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन में विश्वविद्यालय की टीम ने प्रथम पुरस्कार जीता है। विश्वविद्यालय माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और आईबीएम के साथ सहयोग कर रहा है और कई पुरस्कार प्राप्त कर चुका है।

डीन अकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने टेक्नोलॉजीः बून और बेन बोलते हुए कहा, तकनीक के दो पहलू हैं, एक ओर यह अंतर्राष्ट्रीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है, वहीं दूसरी ओर एआई और चैटजीपीटी जैसी तकनीकों से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। तकनीक विकास और प्रगति की भाषा है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के साथ लागत भी आती है, और यह लागत इस बात पर निर्भर करती है कि उसका कितना बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग किया जाए। उन्होंने विकसित भारत 2047 के विजन को मानव बुद्धिमत्ता से जोड़ा। प्रो. जैन ने इंक्यूबेशन सेंटर की स्थापना और नवाचार के अवसरों पर बात करते हुए कहा, सीमित समय का अधिकतम उपयोग करना चाहिए।

इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में सीसीएसआईटी के वाइस प्रिंसिपल प्रो. अशोक कुमार, कॉन्फ्रेंस की कन्वीनर डॉ. शालिनी निनोरिया एवम् डॉ. नूपुर मित्तल चौहान, कॉन्फ्रेंस सचिव डॉ. रूपल गुप्ता एवम् डॉ. मोहन विशाल गुप्ता, पब्लिकेशन चेयर डॉ. दीप्तिनिल बनर्जी एवम् श्री विनीत सवेन कॉन्फ्रेंस ट्रेजरर डॉ. पराग अग्रवाल एवम् डॉ. अजय रस्तोगी, टेक्निकल चेयर प्रो. प्रदीप कुमार, डॉ. नमित गुप्ता, डॉ. आदित्य जैन, डॉ. अमित सिंह आदि मौजूद रहे।

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