इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: Electro homeopathy का प्रमाणपत्र Allopathy करने का अधिकार नहीं देता


लव इंडिया, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी (Electrohomeopathy) का प्रमाणपत्र या डिप्लोमा किसी व्यक्ति को एलोपैथिक (आधुनिक) चिकित्सा पद्धति का अभ्यास करने का अधिकार नहीं देता। अदालत ने कहा कि आवश्यक योग्यता और वैध पंजीकरण के बिना आधुनिक चिकित्सा करना मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।


यह फैसला जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने एटा निवासी संतोष कुमार शर्मा की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने अपने क्लीनिक के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती देते हुए राहत की मांग की थी।


अदालत के समक्ष रखी गई जांच रिपोर्ट में बताया गया कि संबंधित क्लीनिक में कई गंभीर कमियां पाई गईं। इनमें अस्पताल का विधिवत पंजीकरण न होना, बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था का अभाव, अग्निशमन विभाग की अनापत्ति (फायर एनओसी) न होना तथा संक्रमण नियंत्रण से जुड़े आवश्यक मानकों का पालन न किया जाना शामिल था।


हाईकोर्ट ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) का अभ्यास केवल वही व्यक्ति कर सकता है, जिसके पास कानूनन मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्री और संबंधित मेडिकल काउंसिल में वैध पंजीकरण हो। इलेक्ट्रो होम्योपैथी का प्रमाणपत्र इस अधिकार का विकल्प नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में राज्य का दायित्व है कि वह नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करे और गैर-अधिकृत चिकित्सा प्रैक्टिस पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे।


खंडपीठ ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का भी उल्लेख किया और कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए बिना वैध योग्यता वाले व्यक्तियों को आधुनिक चिकित्सा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी।


क्या यह फैसला इलेक्ट्रो होम्योपैथी पर प्रतिबंध है


नहीं। यह निर्णय इलेक्ट्रो होम्योपैथी के अस्तित्व या उसके अभ्यास पर सामान्य प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं है। अदालत ने केवल इतना स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी का प्रमाणपत्र या डिप्लोमा किसी व्यक्ति को एलोपैथिक चिकित्सा करने का कानूनी अधिकार नहीं देता।

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