अमेरिका-ईरान समझौता: युद्धविराम से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक, जानिए समझौते के हर बड़े बिंदु का मतलब
वॉशिंगटन/तेहरान। लगभग साढ़े तीन महीने तक चले तनाव और सैन्य संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान एक ऐतिहासिक समझौते पर पहुंचे हैं। इस समझौते का उद्देश्य सैन्य टकराव को समाप्त करना, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य करना और लंबे समय से विवादित परमाणु मुद्दे पर नई वार्ता शुरू करना है। हालांकि समझौते का पूरा आधिकारिक पाठ अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और दोनों देशों के बयानों से इसके प्रमुख बिंदु सामने आए हैं।
1. स्थायी युद्धविराम पर सहमति
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अमेरिका और ईरान के बीच सभी सैन्य अभियानों को तत्काल रोकना है। दोनों पक्षों ने संघर्ष समाप्त करने और आगे सैन्य कार्रवाई से बचने पर सहमति जताई है।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा
दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार का रास्ता माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा। युद्ध के दौरान यहां जहाजरानी गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी। समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है।

3. अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटेगी
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी हटाने पर सहमत हुआ है। इससे ईरान के तेल निर्यात और समुद्री व्यापार को राहत मिल सकती है।
4. 60 दिनों की नई वार्ता अवधि
दोनों देशों ने अगले 60 दिनों तक विस्तृत वार्ता जारी रखने का फैसला किया है। इस दौरान परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
5. परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत
ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम और परमाणु गतिविधियों पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। यह मुद्दा आगे की वार्ताओं में प्रमुख रहेगा।
6. प्रतिबंधों में राहत की संभावना
समझौते के तहत ईरान पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दिए जाने की संभावना जताई गई है। हालांकि अंतिम निर्णय आगे की बातचीत और शर्तों के पालन पर निर्भर करेगा।

7. जमे हुए अरबों डॉलर के फंड पर चर्चा
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान की विदेशों में जमा कुछ धनराशि को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा सकता है। हालांकि इस राशि को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
8. लेबनान और क्षेत्रीय संघर्षों पर असर
समझौते में लेबनान में जारी तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों को कम करने की बात भी शामिल बताई जा रही है। हालांकि इस हिस्से को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।
9. स्विट्जरलैंड में होगा औपचारिक हस्ताक्षर
समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर स्विट्जरलैंड में होने प्रस्तावित हैं। इसके बाद ही अधिकांश प्रावधान प्रभावी होंगे।

10. तेल बाजार को मिली बड़ी राहत
समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि मध्य पूर्व में स्थिरता लौटने से वैश्विक ऊर्जा संकट का दबाव कम होगा।
अभी भी बने हुए हैं कई सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश युद्धविराम का पालन करते हैं या नहीं, परमाणु कार्यक्रम पर क्या अंतिम सहमति बनती है और प्रतिबंधों को लेकर क्या व्यवस्था तय होती है। अभी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
