नागौर में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल: हिंदू भाई ने मुस्लिम बहन की बेटी के विवाह में भरा मायरा

नागौर (राजस्थान)। ऐसे समय में जब समाज में अक्सर धर्म और जाति के नाम पर विभाजन की चर्चाएं होती हैं, राजस्थान के नागौर जिले से सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। यहां एक हिंदू परिवार ने अपनी मुस्लिम धर्म बहन की बेटी के विवाह में मायरा भरकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया।


नागौर जिले के हरसोलाव क्षेत्र निवासी राकेश नारधणिया और उनके परिवार ने अपनी धर्म बहन ताहिरा की बेटी के विवाह अवसर पर मायरा भरकर वर्षों पुराने भाई-बहन के रिश्ते को निभाया। इस अवसर पर दोनों समुदायों के लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की अनूठी मिसाल बताया।


जानकारी के अनुसार, करीब सात वर्ष पूर्व ताहिरा ने राकेश नारधणिया को अपना धर्म भाई बनाया था। तभी से दोनों परिवारों के बीच आत्मीय और पारिवारिक संबंध कायम हैं। समय के साथ यह रिश्ता और मजबूत होता गया। जब ताहिरा की बेटी के विवाह का अवसर आया तो राकेश नारधणिया ने मामा का फर्ज निभाते हुए मायरे की रस्म अदा की।


मायरे में उन्होंने 31 हजार रुपये नकद के साथ विवाह से जुड़ी आवश्यक सामग्री भेंट की। इतना ही नहीं, विवाह की तैयारियों में भी सक्रिय सहयोग किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और दोनों समुदायों के लोग शामिल हुए।


मायरा भरने की रस्म के दौरान माहौल भावुक हो गया। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से इस पहल का स्वागत किया और कहा कि ऐसे उदाहरण समाज में आपसी प्रेम, विश्वास और भाईचारे को मजबूत करते हैं।


कार्यक्रम में सुखदेव नारधणिया, रामनिवास ज्याणी, गुड़िया, संजू, मंजू, विमला सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने इस पहल को सामाजिक एकता और गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताया।


स्थानीय लोगों का कहना है कि धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत और रिश्तों को महत्व देने वाले ऐसे उदाहरण समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं। नागौर की यह घटना न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए भाईचारे और सद्भाव का संदेश देती है।

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