टीएमयू रेडियोलॉजी स्टुडेंट्स को दिए इंजेक्शन देने के टिप्स
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ एलाइड एंड हेल्थकेयर साइंसेज़ में इन्नोवेशन-ड्राइवन स्क्लिअप वर्कशॉप ऑन प्रिसीजन इंजेक्शन टेक्निक्सः सिम्युलेशन, सेफ्टी एंड क्लिनिकल एक्सीलेंस पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण में स्टुडेंट्स ने किया मॉडल पर लाइव डेमोंस्ट्रेशन एवम् प्रायोगिक अभ्यास
लव इंडिया मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एलाइड एंड हेल्थकेयर साइंसेज़ के डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी विभाग में स्टुडेंट्स को प्रयोगात्मक मॉडल पर इंजेक्शन लगाने का लाइव डेमोंस्ट्रेशन एवम् प्रायोगिक अभ्यास कराया गया।

इन्नोवेशन-ड्राइवन स्क्लिअप वर्कशॉप ऑन प्रिसीजन इंजेक्शन टेक्निक्सः सिम्युलेशन, सेफ्टी एंड क्लिनिकल एक्सीलेंस पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण में कॉलेज ऑफ नर्सिंग में एमएसएन नर्सिंग के एचओडी प्रो. जितेन्द्र सिंह बतौर मुख्य एक्सपर्ट स्टुडेंट्स को इंजेक्शन के प्रकार, इंजेक्शन लगाने की विभिन्न विधियों, सावधानियों, सुरक्षा उपायों आदि पर विस्तार से समझाया। प्रो. सिंह ने कहा, सुरक्षित इंजेक्शन केवल दवा देने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता, संक्रमण नियंत्रण, रोगी सुरक्षा और मानवीय संवेदनशीलता का समन्वय है।

उन्होंने बताया, छोटे बच्चों के कूल्हे में इंजेक्शन लगाने से बच्चों में पैरालिसिस होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। साथ ही इंजेक्शन लगाते समय मेल या फीमेल बॉडी स्ट्रक्चर को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने स्टुडेंट्स को विभिन्न प्रकार के इंजेक्शनों- इंट्रामस्क्युलर, इंट्रावेनस और सबक्यूटेनियस इंजेक्शन तकनीकों का भी चरणबद्ध प्रशिक्षण भी दिया। प्रशिक्षण में स्टुडेंट्स ने स्वयं विभिन्न इंजेक्शन तकनीकों का अभ्यास करते हुए सही एंगल, सुई की गहराई, इंजेक्शन साइट का चयन, एसेप्टिक तकनीक, रोगी सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण बिंदुओं को व्यावहारिक रूप से समझा।
इससे पूर्व मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवम् सरस्वती पूजन के संग वर्कशॉप का शंखनाद हुआ। इस अवसर पर कॉलेज ऑफ एलाइड एंड हेल्थकेयर साइंसेज़ के प्राचार्य प्रो. नवनीत कुमार, कॉलेज ऑफ नर्सिंग में एमएसएन नर्सिंग के एचओडी प्रो. जितेन्द्र सिंह बतौर मुख्य एक्सपर्ट, मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी की एचओडी प्रो. रुचि कांत, मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी के एचओडी श्री अमित बिष्ट आदि मौजूद रहे।

मुख्य विशेषज्ञ प्रो. सिंह ने इंजेक्शन देने की वैज्ञानिक प्रक्रिया, विभिन्न प्रकार की इंजेक्शन तकनीकों, संक्रमण नियंत्रण, रोगी सुरक्षा, औषधि प्रशासन की सावधानियों और क्लीनिकल प्रोटोकॉल की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने रेडियोलॉजी में कॉन्ट्रास्ट मीडिया के उपयोग और सीटी स्कैन, एमआरआई, एंजियोग्राफी जैसी प्रक्रियाओं में इंजेक्शन की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। स्टुडेंट्स को इंजेक्शन से संबंधित संभावित जटिलताओं जैसे दर्द, सूजन, संक्रमण, इन्फिल्ट्रेशन, फ्लेबाइटिस, एक्स्ट्रावेजेशन, एलर्जिक प्रतिक्रिया एवम् एनाफाइलैक्सिस की पहचान और समय पर उचित कार्रवाई के महत्व से भी अवगत कराया।
कार्यक्रम के दौरान स्टुडेंट्स ने विशेषज्ञ से विभिन्न क्लीनिकल परिस्थितियों में इंजेक्शन तकनीकों से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने सरल एवम् वैज्ञानिक तरीके से समाधान किया। प्राचार्य प्रो. नवनीत कुमार ने कहा, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए स्टुडेंट्स को आधुनिक तकनीकों एवम् व्यावहारिक प्रशिक्षण से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

एचओडी अमित बिष्ट ने कहा, क्लीनिकल प्रशिक्षण स्टुडेंट्स के पेशेवर जीवन की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है। हैड्स-ऑन वर्कशॉप में फैकल्टीज़- डॉ. आभा तिवारी, डॉ. योगेश कुमार, श्री दीपक कटियार, श्री राहुल गंगवार, रौशन कुमार, श्रीमती रश्मि पाण्डेय, सुश्री प्राची सिंह, शुभम शर्मा के संग-संग मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
