मोहर्रम पर राहत कदा में हुई ‘ज़िक्र-ए-शहीदाने करबला’ मजलिस, इमाम हुसैन की कुर्बानी और हजरत अली की शिक्षाओं को किया याद
सुहैल खां, मुरादाबाद। मोहर्रम के अवसर पर मुरादाबाद के मोहल्ला डेहरिया स्थित राहत कदा में ‘ज़िक्र-ए-शहीदाने करबला’ मजलिस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में करबला के शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया तथा उनके त्याग, बलिदान और इंसानियत के संदेश पर प्रकाश डाला गया।
यह मजलिस हर वर्ष की तरह पूर्व विधायक स्वर्गीय राहत मोलाई के आवास राहत कदा में आयोजित की गई, जिसमें शहर के अनेक धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
मौलाना डॉ. कौसर मुस्तफा अमरोही ने रखा विस्तृत बयान

मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना डॉ. कौसर मुस्तफा अमरोही ने हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए कहा कि करबला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, धैर्य और इंसानियत की रक्षा का अमर संदेश है।
उन्होंने हजरत मौला अली के व्यक्तित्व, ज्ञान और जीवन मूल्यों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हजरत अली को ‘मुश्किल कुशा’ कहा जाता है और उनका जीवन मानवता, न्याय तथा ज्ञान का अनुपम उदाहरण है।
मौलाना ने कहा कि करबला का संदेश हर दौर में प्रासंगिक है और इंसान को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है।
शायरों ने पेश किए कलाम

मजलिस में मशहूर शायर मंसूर उस्मानी ने अपने कलाम पेश कर करबला के शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा ख्याल मुरादाबादी और कशिश वारसी ने भी अपने कलाम के माध्यम से करबला के गम और उसके संदेश को प्रस्तुत किया।
असद मोलाई ने जताया आभार

कार्यक्रम के आयोजक वरिष्ठ सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता असद मोलाई ने सभी अतिथियों, उलेमा, शायरों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी मजलिसें नई पीढ़ी को करबला के आदर्शों और इंसानियत की शिक्षा से जोड़ने का कार्य करती हैं।
ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित
मजलिस में शकील सरवर हाशमी, एडवोकेट अमीरुल हसन जाफरी, एडवोकेट अरशद परवेज, मास्टर नदीम हैदर, पार्षद नदीमउद्दीन, हसनैन अख्तर, मोहसिन खान, अली हसनैन, सज्जादानशीन अहमद कमाल उर्फ गुल्लू मियां, खालिद नईम चिश्ती, सफदर नियाज़ी, सुहैल अहमद रिज़वी, ताजदार उस्मानी, दानिश रिज़वी, नदीम कादरी, जकारिया कुरैशी, नवाज़ हाशमी, एडवोकेट मोहम्मद मोलाई, मोहसिन रईस सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
