कलेक्ट्रेट पर गरजे अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय छात्र परिषद के कार्यकर्ता, छोटे कोचिंग सेंटरों की सीलिंग पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर छोटे कोचिंग संस्थानों के लिए अलग नीति बनाने की मांग
लव इंडिया, मुरादाबाद। लखनऊ में कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड के बाद प्रदेशभर में चल रही कार्रवाई के बीच मुरादाबाद में अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय छात्र परिषद से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर छोटे और मध्यम कोचिंग संस्थानों के पक्ष में आवाज उठाई। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लखनऊ की घटना अत्यंत दुखद है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन उसकी आड़ में छोटे कोचिंग संस्थानों पर बिना भेदभाव के सीलिंग और दंडात्मक कार्रवाई करना उचित नहीं है। इससे हजारों शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

ज्ञापन में कहा गया कि अधिकांश छोटे कोचिंग सेंटर एक या दो कमरों में संचालित होते हैं और उन पर बड़े संस्थानों जैसे जटिल नियम लागू करना व्यवहारिक नहीं है। संगठन ने मांग की कि छोटे और बड़े कोचिंग संस्थानों के लिए अलग-अलग सुरक्षा मानक तय किए जाएं।
ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
➡️छोटे एवं बड़े कोचिंग संस्थानों के लिए अलग-अलग नियम और मानक निर्धारित किए जाएं।
➡️एक या दो कमरों में संचालित छोटे कोचिंग सेंटरों को फायर एनओसी, एमडीए नक्शा और अन्य जटिल औपचारिकताओं से राहत अथवा सरल प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाए।
➡️छोटे संस्थानों के लिए अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास, प्राथमिक उपचार किट और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों को ही अनिवार्य किया जाए।
➡️सीलिंग की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोकी जाए तथा पहले नोटिस देकर सुधार का अवसर दिया जाए।
➡️कोचिंग संचालकों के लिए सरल पंजीकरण व्यवस्था लागू की जाए।
➡️भविष्य में किसी भी कार्रवाई से पहले कोचिंग संचालकों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनी जाएं।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य सुरक्षा मानकों का विरोध करना नहीं, बल्कि छोटे कोचिंग संस्थानों के हितों की रक्षा करते हुए व्यावहारिक व्यवस्था लागू कराना है। उनका कहना था कि सुरक्षा और शिक्षा—दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मांग की गई कि छोटे कोचिंग संचालकों और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक एवं न्यायसंगत नीति लागू की जाए।
