रोडवेज बस अड्डे के सामने के खोखा दुकानें हटाने के विरोध में बंद, दुकानदारों ने किया प्रदर्शन, ज्ञापन


लव इंडिया, मुरादाबाद। रेलवे भूमि पर वर्षों से आबाद दुकानदारों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर बिना पुनर्वास के बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रेलवे विभाग द्वारा जिला प्रशासन को भ्रामक जानकारी देकर सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा किया जा रहा है।


ज्ञापन में बताया गया कि मुरादाबाद महानगर के रोडवेज बस स्टैंड डबल फाटक, सम्भल चौराहा एवं साउथ कॉलोनी क्षेत्र की भूमि पर रेलवे द्वारा सैकड़ों लोगों को वर्षों पूर्व किरायेदार के रूप में बसाया गया था। यह भूमि पहले नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे (एनईआर) के अधीन थी, बाद में इसे नॉर्थ रेलवे को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके चलते किराया लेना बंद कर दिया गया।


किरायेदारों ने भूमि नॉर्थ रेलवे में आने के बाद किराया देने और बढ़ाने का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन रेलवे की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद रेलवे संपदा अधिकारी द्वारा लगभग 150 बेदखली के मुकदमे दायर किए गए, जिन्हें एक ही दिन में निस्तारित कर दिया गया।
दुकानदारों का कहना है कि इन आदेशों के खिलाफ जिला जज न्यायालय मुरादाबाद में 50 से अधिक अपीलें अभी लंबित हैं। कुछ मामलों में न्यायालय ने बेदखली आदेशों को अवैध मानते हुए निरस्त भी कर दिया है। कई प्रकरण उच्च न्यायालय इलाहाबाद में भी विचाराधीन हैं।


प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि रेलवे विभाग ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर यह भ्रम फैलाया है कि सभी अपीलें खारिज हो चुकी हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। दुकानदारों ने शीतकाल में बिना पुनर्वास बेदखली को अमानवीय बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया।


ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि जब तक सभी न्यायालयीन प्रकरणों का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक किसी भी दुकानदार को बेदखल न किया जाए।

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