458th Shri Ramlila Festival: श्रीराम बारात की शोभा को देखकर भक्ति के सागर में डूबे झुमका नगरी के सनातनी

लव इंडिया, बरेली458 वर्ष पुरानी श्रीरामलीला महोत्सव में सोमवार को शहर में निकली राम बारात की शोभायात्रा का शुभारंभ बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम के साथ रामलीला समिति अध्यक्ष पंडित राम गोपाल मिश्रा ने आरती उतारकर किया। चौधरी तालाब में 458 वर्षों से हो रही सबसे पुरानी श्री रानी महालक्ष्मी बाई रामलीला समिति (रजि.) बरेली के तत्वावधान में चल रही रामलीला में दर्शकों को भक्ति के सागर में डुबो दिया है।

शहर में निकली राम बारात का शुभारंभ महापौर डॉ. उमेश गौतम ने किया
परंपरागत राम बारात की शोभायात्रा रानी साहब फाटक से प्रारंभ होकर शहर के मुख्य मार्गों से निकाली गई। शोभायात्रा में आगे- आगे बैंड की मधुर धुन और पीछे- पीछे घोड़े, रथ और आकर्षक झाँकियाँ चल रही थीं। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की सजीव झाँकियाँ देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मार्ग में जगह-जगह व्यापारियों, महिलाओं और बच्चों ने पुष्पवर्षा कर राम बारात का स्वागत किया। शोभायात्रा बाबा ब्रह्मदेव मंदिर, गौरीशंकर मंदिर, बजरिया पूरन मल, चाहबाई, काली मंदिर, कोहाडॉपीर चौकी, कुतुबखाना चौराहा, नीम की चढ़ाई, साहूकारा, किला बाजार होते हुए अलखनाथ मंदिर के सामने से निकलकर मुरावपुरा पहुँची और पुनः रानी साहब फाटक से होते हुए चौधरी मोहल्ला स्थित रामलीला मैदान पहुँची।

.शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह सजे स्वागत द्वार, झालरें और बिजली की जगमगाती झाल- मालाओं ने नगर को विवाहोत्सव की झलकियों से भर दिया। बीती शाम को राम लीला मंचन में श्रीराम– सीता विवाह और उसके पश्चात श्रीराम का कलेवा की लीला का मंचन हुआ। इन लीलाओं ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अध्यात्म और भक्ति के सागर में डुबो दिया। श्रीराम–सीता विवाह की भव्य लीला रामलीला मैदान पहुँचने के बाद भगवान श्रीराम की बारात का जनकपुरी दरबार में स्वागत हुआ। फूलों से सजे मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह की विधि संपन्न हुई।


माता सीता ने श्रीराम के गले में जयमाला पहनाई और पूरा मैदान “जय सिया राम” के नारों से गूंज उठा। इस अवसर पर भरत– मांडवी, लक्ष्मण– उर्मिला और शत्रुघ्न– श्रुतकीर्ति का विवाह भी मंचित किया गया।मंगलगीतों और शहनाई की गूंज से पूरा वातावरण भावविभोर हो उठा। दर्शक इस दिव्य विवाह के दृश्य देखकर भावुक हो गए और उनके जयकारों से मैदान बार-बार गूंजता रहा। श्रीराम का कलेवा – प्रेम और आदर का प्रतीक विवाह उपरांत जनकपुरी महल में कलेवा (भोजन प्रसंग) का मंचन किया गया।


पंगत में बैठाए गए सभी बारातियों का राजा जनक और महारानी सुनयना ने सत्कारपूर्वक स्वागत किया। श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ समस्त बारातियों को प्रतीकात्मक रूप से विविध व्यंजन परोसे गए। झाँकी के माध्यम से फलों, मिठाइयों और पकवानों की छटा दर्शकों के मन को मोह रही थी। इस दृश्य ने संदेश दिया कि आतिथ्य और सत्कार भारतीय संस्कृति की आत्मा है। श्रद्धालुओं का उत्साह शोभायात्रा से लेकर विवाह और कलेवा तक हर क्षण में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। महिलाएँ मंगलगीत गा रही थीं, बच्चे छतों से पुष्पवर्षा कर रहे थे और बुजुर्ग श्रद्धा भरे स्वर में “जय सिया राम” का उद्घोष कर रहे थे।


रामलीला समिति के अध्यक्ष राम गोपाल मिश्रा ने बताया कि यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि समाज को भक्ति, आदर और पारिवारिक संस्कारों का संदेश भी देता है। समिति के पदाधिकारी पं. रामगोपाल मिश्रा (अध्यक्ष), हरीश शुक्ल, घनश्याम मिश्रा, प्रदीप बाजपेयी, नीरज शुक्ला, महामंत्री शिव नारायण दीक्षित, श्रेयांश बाजपेयी, धीरेंद्र शुक्ला, बृजेश प्रताप सिंह, आदित्य शुक्ल, शशिकांत गौतम, विनोद राजपूत, यश चौधरी, आकाश गंगवार, शिवम वर्मा, प्रतीक अरोड़ा आदि उपस्थित रहे।

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