Rashtriya Bhasha Hindi Prachar Samiti: कीर्तिशेष सतीश फिगार की स्मृति में मासिक काव्य

लव इंडिया, मुरादाबाद। 14 अप्रैल को राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, मुरादाबाद की ओर से लाइनपार स्थित विश्नोई धर्मशाला लाइनपार मुरादाबाद में वरिष्ठ कवि कीर्ति शेष सतीश फिगर जी की स्मृति में मासिक काव्य-गोष्ठी समपन्न हुई। अशोक विद्रोही द्वारा माॅं सरस्वती की वंदना से आरंभ हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ रचनाकार योगेंद्र पाल विश्नोई ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ महेश दिवाकर एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में रघुराज सिंह निश्चल मंचासीन हुए।

कार्यक्रम का संचालन अशोक विद्रोही ने किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ रचनाकार विवेक निर्मल द्वारा कीर्तिशेष सतीश फिगार के जीवन परिचय एवं साहित्य सृजन पर विस्तृत आख्या प्रस्तुत की, डॉ महेश दिवाकर ने सतीश फिगार के व्यक्तित्व एवं रचना कर्म पर प्रकाश डाला अपनी एक श्रेष्ठ रचना उन्होंने प्रस्तुत की। देशद्रोह के नाग खड़े हैं मार रहे फुंकार उठो कुचल दो फन बिषधर के डरो न, करो प्रहार।
विवेक निर्मल ने पढा, सत्य ने जब पैर में पहनी खड़ाऊं, झूठ तब तक सारी दुनिया घूम आया।

अशोक विद्रोही ने पढ़ा मैं कबीरा सूर तुलसी और मीरा की हूँ वाणी, ओज दिनकर की सदा ही दिल मेरा हिंदुस्तानी, चंद्रवरदाई की वाणी सा अमर हो जाऊंगा मैं रात के गहरे अंधेरों में कहीं खो जाऊंगा मैं । रामगोपाल त्रिपाठी ने पढ़ा चलो अच्छा ही हुआ उस दिन, वो दो पल को भी रूका नही , बिखरे हुए मेरे आत्मविश्वास को समेटने को वह झुका नही ।
आवरण अग्रवाल श्रेष्ठ ने कहा कि मानवता का करता भक्षण, है कैसा ये आरक्षण… ? रघुराज सिंह निश्चल ने कीर्तिशेष सतीश फिगर की सजल का वाचन किया योगेंद्र पाल बिश्नोई ने आध्यात्मिक पर अपनी अभिव्यक्ति दी. रामसिंह निशंक द्वारा आभार-अभिव्यक्ति के साथ कार्यक्रम समापन पर पहुॅंचा।

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