पाकबड़ा जामा मस्जिद में शहीदाने कर्बला की याद में पांच दिवसीय कार्यक्रम का आगाज
लव इंडिया, मुरादाबाद। पाकबड़ा के शनिवार का बाजार स्थित जामा मस्जिद में शहीदाने कर्बला की याद में आयोजित पांच दिवसीय कार्यक्रम का आगाज अकीदत और एहतराम के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई। कारी जर्रार, कारी मुजम्मिल और हाफिज समीर ने कुरआन की तिलावत और नात-ए-पाक पेश कर महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जामा मस्जिद के इमाम काजी शम्मे आलम ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 जानिसारों की शहादत को लगभग 1400 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी पूरी दुनिया में इमाम हुसैन का जिक्र सम्मान और अकीदत के साथ किया जाता है। उन्होंने कहा कि इंसानियत, सब्र, कुर्बानी और इंसाफ का पैगाम हमेशा जिंदा रहेगा।
उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का घराना इंसानियत की खिदमत का प्रतीक था। उनके दर से कोई भूखा-प्यासा वापस नहीं लौटता था। उन्होंने लोगों से अपील की कि दूसरों के दुख-दर्द को दूर करने का प्रयास करें, क्योंकि जो किसी का गम कम करता है, अल्लाह उसके गम भी दूर करता है।
काजी शम्मे आलम ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि पानी की बर्बादी से बचें और नाबालिग बच्चों को बाइक चलाने के लिए न दें। उन्होंने कहा कि अच्छे कर्म ही इंसान की पहचान बनते हैं।
इस अवसर पर कारी असरार और कारी अय्यूब ने भी शहीदाने कर्बला की कुर्बानियों और हजरत इमाम हुसैन की सीरत पर विस्तार से रोशनी डाली।

कार्यक्रम में शामिल अकीदतमंदों को शाहनवाज, नाजिम, हाजी कल्लू, कमर, शानू, काशिफ, उस्मान और वसीम की ओर से शरबत और मिठाई वितरित की गई। कार्यक्रम का समापन देश में अमन, खुशहाली और तरक्की की दुआ के साथ हुआ।
