मुरादाबाद में बड़ा GST घोटाला: फर्जी फर्म बनाकर 10.95 करोड़ की टैक्स चोरी, 5 डायरेक्टरों पर FIR दर्ज

लव इंडिया मुरादाबाद। मुरादाबाद में करोड़ों के जीएसटी घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। थाना नागफनी में दर्ज एफआईआर ने फर्जी फर्मों के जरिए टैक्स चोरी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि एक फर्जी कंपनी के नाम पर करोड़ों रुपये का फर्जी लेन-देन दिखाकर सरकार को भारी चूना लगाया गया।

🔴 क्या है पूरा मामला?

एफआईआर संख्या 0048/2026 के अनुसार, आरोपियों ने M/S Samsung Overseas Limited नाम की फर्जी फर्म के जरिए:
फर्जी खरीद (Inward Supply) दिखाई
₹21.13 लाख CGST + ₹21.13 लाख SGST का इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया
अलग-अलग सप्लायर दिखाकर कागजों में लेन-देन दर्शाया
जांच में पाया गया कि:
👉 फर्म का वास्तविक अस्तित्व नहीं था
👉 दिए गए पते पर कोई व्यवसाय नहीं मिला
👉 दस्तावेज पूरी तरह संदिग्ध और फर्जी थे

🔴 कर विभाग की जांच में बड़ा खुलासा


राज्य कर विभाग (State Tax) की जांच में सामने आया कि फर्म का पंजीकरण 16.08.2018 को लिया गया। 15.11.2018 को निरीक्षण में फर्म फर्जी पाई गई। 16.11.2018 को रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया। इसके बावजूद फर्जी तरीके से करोड़ों का लेन-देन दिखाया गया।

🔴 10.95 करोड़ की टैक्स चोरी का आरोप

जांच में कुल:
₹5,47,82,090 टैक्स
₹5,47,82,090 पेनल्टी
कुल मिलाकर ₹10,95,64,180 की वसूली निर्धारित की गई लेकिन अब तक यह राशि जमा नहीं की गई है।

🔴 किन पर दर्ज हुई FIR?


इस घोटाले में 5 लोगों को आरोपी बनाया गया है:
रेनू सतीजा (फर्म डायरेक्टर) – दिल्ली
विकास अहलावत (फर्म डायरेक्टर) – नोएडा
रेखा गिल (फर्म डायरेक्टर) – गुरुग्राम
भूषण कुमार चंदना (फर्म डायरेक्टर) – दिल्ली
चांद सतीजा (फर्म डायरेक्टर) – दिल्ली

🔴 गंभीर धाराओं में केस दर्ज

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं 61(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

🔴 कैसे हुआ घोटाला?


👉 फर्जी कंपनियों के नाम से बिलिंग
👉 बिना वास्तविक खरीद-बिक्री के ITC क्लेम
👉 दस्तावेजों में काल्पनिक सप्लायर दिखाना
👉 टैक्स विभाग को गुमराह करना
यह पूरा मामला संगठित आर्थिक अपराध की ओर इशारा करता है।

🔴 अब क्या होगा आगे?

पुलिस व जीएसटी विभाग की संयुक्त जांच जारी। बैंक खातों, लेन-देन और नेटवर्क की पड़ताल। आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना।

📢 लव इंडिया का सवाल


👉 क्या जीएसटी सिस्टम में इतनी बड़ी सेंध बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव है? क्या ऐसे फर्जी नेटवर्क देशभर में सक्रिय हैं?

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