पत्रकार/ शिक्षक के बेटे अक्षत मिश्रा ने रचा इतिहास, पहले ही प्रयास में बने असिस्टेंट कमिश्नर कमर्शियल

उमेश लव, लव इंडिया, मुरादाबाद। कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और बिना किसी कोचिंग के निरंतर अध्ययन—इन तीन स्तंभों पर खड़े होकर अक्षत मिश्रा ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। अक्षत ने अपने पहले ही प्रयास में असिस्टेंट कमिश्नर कमर्शियल (रैंक 34) पद हासिल कर यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है।


🎯 बिना कोचिंग, सिर्फ सेल्फ स्टडी से सफलता


आज के दौर में जहां प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग को अनिवार्य माना जाता है, वहीं अक्षत ने इस धारणा को तोड़ते हुए। पूरी तैयारी घर पर रहकर सेल्फ स्टडी से की। किसी भी प्रकार की कोचिंग या ट्यूशन नहीं ली। रोजाना 6 से 8 घंटे पढ़ाई कर निरंतरता बनाए रखी। यह सफलता उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखते हैं।

📚 शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड


अक्षत शुरू से ही मेधावी छात्र रहे हैं:
🎓 12वीं (साइंस स्ट्रीम) – स्प्रिंग फील्ड कॉलेज, 93% अंक (प्रथम श्रेणी)
🎓 स्नातक (पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स) – आर्यभट्ट कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, 79% (प्रथम श्रेणी)
🎓 परास्नातक (पॉलिटिकल साइंस) – हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, 67% (प्रथम श्रेणी)

👨‍👩‍👧 साधारण परिवार से असाधारण उपलब्धि


👨‍🏫 पिता – श्री रमेश चंद्र मिश्रा (बेसिक शिक्षक)
👩 माता – मीरा मिश्रा (गृहिणी)
👩‍🏫 बहन – शगुन मिश्रा (बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका)
👉 एक शिक्षित और सादगीपूर्ण परिवार ने अक्षत को हमेशा प्रेरित किया। रमेश चंद्र मिश्रा बेसिक शिक्षक होने के साथ-साथ लंबे अरसे तक मुरादाबाद में अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ जुड़े रहे और उन्होंने निष्पक्ष पत्रकारिता की।

🏏 पढ़ाई के साथ संतुलित जीवन


अक्षत केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय रहे:
क्रिकेट खेलना (अच्छे बैटर)
संगीत सुनना
पर्यटन करना
👉 यही संतुलन उनकी सफलता का एक महत्वपूर्ण कारण रहा।

🎯 भविष्य का लक्ष्य


अक्षत मिश्रा का अगला लक्ष्य और भी बड़ा है:
👉 आईएएस (IAS) बनना उन्होंने कहा कि वे अपनी तैयारी को और बेहतर बनाकर आगे की परीक्षाओं में भी सफलता हासिल करना चाहते हैं।

🗣️ प्रेरणा देने वाली कहानी


अक्षत की सफलता यह संदेश देती है कि संसाधन सीमित हों तो भी मेहनत सीमित नहीं होनी चाहिए। कोचिंग जरूरी नहीं, सही दिशा और अनुशासन जरूरी है। पहला प्रयास भी आखिरी नहीं, बल्कि सफल भी हो सकता है।

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