कलेक्ट्रेट पर आशा वर्कर्स का प्रदर्शन, 6 फरवरी के समझौते को लागू कराने की मांग

लव इंडिया, मुरादाबाद। अपनी विभिन्न मांगों और पूर्व में सरकार के साथ हुए समझौते को लागू कराने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं ने गुरुवार, 13 अगस्त को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और संबंधित मांगों का ज्ञापन प्रदेश सरकार के नाम जिला प्रशासन को सौंपा।


यूनियन की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं और मांगों को लेकर 6 फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री एवं यूनियन पदाधिकारियों के बीच समझौता वार्ता हुई थी। यूनियन का आरोप है कि समझौते में तय बिंदुओं को अपेक्षित रूप से लागू नहीं किया गया है। इसी को लेकर प्रदेशव्यापी कार्यक्रम के तहत जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया गया।


6 फरवरी के समझौते को लागू कराने की मांग


ज्ञापन में कहा गया है कि आशा वर्कर्स के आधार भुगतान, प्रोत्साहन राशि और विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों से जुड़े भुगतान को लेकर सरकार के स्तर पर आश्वासन दिए गए थे। यूनियन ने इन आश्वासनों को लागू करने तथा लंबित भुगतान शीघ्र कराने की मांग की है।
ज्ञापन के अनुसार आशा वर्कर्स के आधार भुगतान को बढ़ाने तथा आशा संगिनियों के भुगतान में भी बढ़ोतरी किए जाने की मांग की गई है। यूनियन ने कहा कि जिन मांगों को लेकर सरकार और संगठन के बीच सहमति बनी थी, उनका समयबद्ध तरीके से क्रियान्वयन होना चाहिए।


स्वास्थ्य अभियानों की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की मांग


आशा कार्यकर्ताओं ने पोलियो, फाइलेरिया, दस्तक और संचारी रोग नियंत्रण जैसे अभियानों में किए जाने वाले कार्यों की प्रोत्साहन राशि को पुनरीक्षित करने की मांग रखी है। ज्ञापन में इन अभियानों के लिए दैनिक ₹500 की दर निर्धारित किए जाने की मांग की गई है।
साथ ही पूर्व वर्षों में विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों से संबंधित लंबित प्रोत्साहन राशि और अन्य भुगतानों का तत्काल निस्तारण किए जाने की मांग भी उठाई गई है।


बीमा और स्वास्थ्य सुरक्षा की मांग


यूनियन ने आशा वर्कर्स के लिए स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को मजबूत करने की मांग की है। ज्ञापन में कैशलेस चिकित्सा सुविधा के अतिरिक्त ₹5 लाख का चिकित्सा बीमा तथा दुर्घटना बीमा की राशि को ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख किए जाने की मांग रखी गई है।
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में लगातार योगदान देने वाली कार्यकर्ताओं को पर्याप्त सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
मातृत्व अवकाश और श्रम सम्मेलन की सिफारिशें लागू करने की मांग
ज्ञापन में आशा वर्कर्स को चार माह का मातृत्व अवकाश दिए जाने की मांग भी की गई है। इसके साथ ही 45वें एवं 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करने के लिए आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया शुरू किए जाने की मांग की गई है।
यूनियन का कहना है कि आशा कार्यकर्ताओं को केवल प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था तक सीमित रखने के बजाय उनके श्रम और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित श्रमिक अधिकार और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।


आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग


ज्ञापन में 15 दिसंबर 2025 से 6 फरवरी 2026 तक चले आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए एक मुकदमे को वापस लेने की मांग भी की गई है। यूनियन ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान उत्पीड़न की नीयत से मुकदमा दर्ज किया गया था और समझौते के दौरान इसे समाप्त करने का आश्वासन दिया गया था। संगठन ने संबंधित मुकदमा वापस लेने की मांग दोहराई है।


“मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष”


प्रदर्शन के दौरान आशा वर्कर्स ने सरकार से पूर्व में हुए समझौते और आश्वासनों को धरातल पर लागू करने की मांग की। यूनियन ने स्पष्ट किया कि आशा कार्यकर्ताओं से जुड़े भुगतान, मानदेय, प्रोत्साहन राशि, बीमा, मातृत्व अवकाश और श्रमिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर शीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए।
ज्ञापन में कहा गया है कि संगठन सरकार से अपनी मांगों के त्वरित समाधान की अपेक्षा करता है। मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकेत भी दिया गया है।इस दौरान,अध्यक्ष निर्मला पाल,सचिव नीतू गोस्वामी,लता सागर, सरोज देवी, सुनीता देवी, सुमन, शाहजहां,मेहराब,नाज़ुक,संजू देवी, रीना देवी, संगिनी, भगवती देवी,सोनी, नीरज व अन्य महिलाएं मौजूद रहीं।

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