Bulldozer Action के बाद भाजपा और BJP मेयर की साख पर दाग, हाईकमान की अनदेखी से…

लव इंडिया, मुरादाबाद: मुरादाबाद में नेशनल हाईवे बाईपास के पास हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस कार्रवाई में भाजपा के ही मेयर विनोद अग्रवाल की बाउंड्रीवाल ढहाए जाने का दावा सामने आने के बाद मामला अब स्थानीय प्रशासन और सत्तारूढ़ दल के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
मेयर विनोद अग्रवाल ने इस कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताते हुए प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और भाजपा संगठन को पत्र भेजकर जांच की मांग की है। दूसरी ओर जिला प्रशासन का कहना है कि संबंधित जमीन सरकारी है और उसे सरकारी परियोजना के लिए कब्जा मुक्त कराया गया है।


पूरा मामला: सीएम मॉडल स्कूल के लिए जमीन खाली कराने का दावा


मुरादाबाद के सदर तहसील क्षेत्र के धीमरी गांव के पास नेशनल हाईवे बाईपास के किनारे स्थित करीब 20 बीघा जमीन पर 12 मार्च को प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस भूमि का एक हिस्सा ‘सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय’ के निर्माण के लिए आरक्षित किया गया है। इसी परियोजना के तहत मौके पर मौजूद अवैध कब्जों और बाउंड्रीवाल को हटाने की कार्रवाई की गई।
अधिकारियों का कहना है कि मौके पर बनी कई बाउंड्रीवाल सरकारी भूमि पर बनाई गई थीं, इसलिए उन्हें हटाकर जमीन को परियोजना के लिए साफ कराया गया।


मेयर का आरोप: “कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया”

नगर निगम मुरादाबाद के मेयर विनोद अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2017 में धीमरी गांव के पास लगभग साढ़े नौ बीघा जमीन खरीदी थी।
उनका दावा है कि जमीन खरीदने के बाद उन्होंने राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज कराया और उसके बाद अपनी भूमि की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया था।
मेयर का आरोप है कि 12 मार्च को प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उनकी करीब 55 मीटर लंबी बाउंड्रीवाल को बुलडोजर से गिरा दिया। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें लगभग 70 से 75 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।


हाईकमान तक शिकायत: शासन और भाजपा संगठन को भेजा पत्र


मेयर विनोद अग्रवाल ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव को विस्तृत पत्र भेजा है।
इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को भी पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जांच कराने और न्याय दिलाने की मांग की है।
मेयर का कहना है कि यदि किसी भूमि को लेकर विवाद था तो प्रशासन को पहले नोटिस जारी कर संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर देना चाहिए था।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला: अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल


मेयर ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि अतिक्रमण हटाने के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
उनके अनुसार ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष को कम से कम 15 दिन का नोटिस देना आवश्यक होता है ताकि वह अपना पक्ष रख सके।
मेयर का कहना है कि बिना नोटिस सीधे बुलडोजर चलाना न्यायिक प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

निष्पक्ष जांच की मांग: दूसरे जिले के अधिकारी से पैमाइश कराने की मांग


मेयर ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि जमीन की पैमाइश किसी अन्य जिले के अधिकारी से कराई जानी चाहिए।
उन्होंने पत्र में लिखा है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाएगी तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
मेयर का कहना है कि उन्हें कुछ स्थानीय अधिकारियों के कामकाज पर संदेह है, इसलिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।

प्रशासन का पक्ष: सरकारी भूमि होने का दावा


दूसरी ओर जिला प्रशासन का कहना है कि जिस जमीन पर कार्रवाई की गई है वह सरकारी रिकॉर्ड में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है।
अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा विभाग की परियोजना के लिए जमीन चिन्हित की गई थी और मौके पर अवैध रूप से बनाई गई बाउंड्रीवाल को हटाना जरूरी था।
प्रशासन का यह भी कहना है कि भूमि को सरकारी परियोजना के लिए कब्जा मुक्त कराया गया है और इस संबंध में राजस्व अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई की गई।

जमीन खरीद को लेकर भी चर्चा: पुराने सौदे और विवाद भी आए सामने


इस जमीन को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं।
बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र की जमीनों को लेकर पहले भी कई विवाद सामने आ चुके हैं। कुछ लोगों का कहना है कि हाईवे किनारे होने के कारण इस इलाके की जमीन की कीमत काफी बढ़ गई है, जिससे जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर विवाद भी होते रहे हैं।

प्रशासन ने कराई दोबारा पैमाइश: तीन दिन से चल रही नापजोख


बुलडोजर कार्रवाई के बाद प्रशासन ने पूरे इलाके की दोबारा पैमाइश कराने का निर्णय लिया है।
बताया जा रहा है कि एसडीएम और तहसील की टीम लगातार क्षेत्र में जमीन की नापजोख कर रही है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
दूसरी ओर मेयर की ओर से भी निजी स्तर पर जमीन के दस्तावेज और पैमाइश से जुड़े रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं।
सियासी हलकों में चर्चा

विपक्ष ने भी उठाए सवाल


इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हल्कों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर सरकार की बुलडोजर नीति पर सवाल उठा रहे हैं।
वहीं भाजपा के भीतर भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि कार्रवाई सीधे पार्टी के ही एक प्रमुख जनप्रतिनिधि से जुड़ी बताई जा रही है।

आगे क्या होगा: जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति

अब सभी की नजर प्रशासन की जांच और पैमाइश की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यदि जांच में जमीन को सरकारी बताया जाता है तो प्रशासन की कार्रवाई सही मानी जाएगी, जबकि यदि निजी स्वामित्व साबित होता है तो मामला और बड़ा विवाद बन सकता है।

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